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Mahender Pal Arya 23 hrs · || पाप से मुक्ति पाने का वादा हर पन्थोंने किया है || पक्ष दो है यह शाश्वत है, आदि सृष्टि से है और अंततक ही

|| पाप से मुक्ति पाने का वादा हर पन्थोंने किया है || पक्ष दो है यह शाश्वत है, आदि सृष्टि से है और अंततक ही रहना है, जैसा धर्म, अधर्म,

|| आर्यों का देखा अजब तमाशा || मुझे सत्य सनातन वैदिक धर्मके बारेमें जानकारी मिली ऋषिकृत अमरग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश के माध्यम से और उसमें अन्तिम समुल्लास को जब देखा. मेरा प्यारा

| धर्म मानव मात्र के लिये एक ही है अलग नही | धर्मपर आचरण करने वालों का नाम मानव है कोई पशु धर्म नही जानता और ना पशु के लिए

|| वेद कहता है मानव बनो, कुरान कहता है मुस्लमान बनो || तन्तुं तन्वन रजसो भानुमिन्विहि, ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान | अनुल्बणं वयत जोगुवामपो, मनुर्भव जनया दैव्यं जनम् ||

|| वेदो अखिलो धर्म मूलम् || वेद ही अखिल विश्व के धर्म का आदि मूल है |   आयें हम मानव कहलाने वाले जरा विचार करें, आज धरती पर जितने

https://youtu.be/ftTIP5VOPxA   अप दुनिया के लोग भी इसे कुरान से देखें | مَّن ذَا الَّذِي يُقْرِضُ اللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا فَيُضَاعِفَهُ لَهُ أَضْعَافًا كَثِيرَةً ۚ وَاللَّهُ يَقْبِضُ وَيَبْسُطُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ [٢:٢٤٥]

||सृष्टि उत्पत्ति व,धर्म वेदसे,हटते हटते,मतों का जन्म,भाग 12 || धर्मिक कृत्य और मन्तव्यों की उपयुक्त समानताओं के अतिरिक्त कुछ अन्य छोटो छोटी बातों में भी सदृश्य है, उन्हें भी देखते

सृष्टि विषय,व धर्म का आदि स्रोत वेद से है= भाग 11 1 = जीवन दुःखमय है, 2 =दुःख का कारण ईच्छा व तृष्णा है, 3 =तृष्णा के नाश से दुःख

सृष्टि विषय, वेद से हटकर मंत पंथ बने = भाग 10 {5} ईसाई =जो व्यवहार अन्यों से तुम अपने लिए करना चाहते हो वैसा ही उनके साथ तुम भी करो


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