अल्लाह का अमानवीय उपदेश दो आयात ही पर्याप्त है |

|| अल्लाह का अमानवीय उपदेश दो आयात ही पर्याप्त है ||
जब एक दुसरे को मारने के लिए प्रेरणा देने पर वह दोषी है तो कुरान क्यों नहीं ?
कुरआन भरा पड़ा है ऐसी आयातों से, अल्लाह ने अपनी कुरान में मानव शब्द से नहीं एक को मुसलमान दूसरे को गैरमुस्लिम,काफ़िर,कहा और इन दोनों को आपस में लडवाया है |
अल्लाह ने मुसलमानों को जोश दिलाते हुए, जो मुस्लिम नहीं है या इस्लाम जिन्हों ने कुबूल नहीं किया है उन्हें क़त्ल करने का आदेश दिया, कुरान के अनेक जगह पर है यहाँ मात्र दो प्रमाण दे रहा हूँ |
हमारे भारत वर्ष में कोई किसी को मारने के लिए कहे या मारने के लिए प्रेरणा दे उसपर दफा लगाया जाता है और उसे गिरिफ्तार भी किया जाता है, किन्तु जो कुरान का अल्लाह है उन्होंने मुसलमानों को स्पष्ट आदेश दिया है उत्तेजित किया है, की जो मुसलमान नहीं बने उन्हें कत्ल करो यह कहना है अल्लाह का, देखें कुरान से दिया गया यह प्रमाण |
जब की दुनिया में कोई एक नेक इंसान क्या करता है ? झगड़ने से मानव को रोकता है और यहाँ कुरानी अल्लाह कुरान में मुसलमानों को गैर मुस्लिमों को कत्ल करने का आदेश दे रहे हैं, तो क्या ऐसी कुरान पर प्रतिवंध लगना नहीं चाहिए ? जब एक दुसरे को मारने के लिए प्रेरणा देनेपर वह दोषी है तो कुरान क्यों नहीं ?

فَمَا لَكُمْ فِي الْمُنَافِقِينَ فِئَتَيْنِ وَاللَّهُ أَرْكَسَهُم بِمَا كَسَبُوا ۚ أَتُرِيدُونَ أَن تَهْدُوا مَنْ أَضَلَّ اللَّهُ ۖ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُ سَبِيلًا [٤:٨٨]
(मुसलमानों) फिर तुमको क्या हो गया है कि तुम मुनाफ़िक़ों के बारे में दो फ़रीक़ हो गए हो (एक मुवाफ़िक़ एक मुख़ालिफ़) हालॉकि ख़ुद ख़ुदा ने उनके करतूतों की बदौलत उनकी अक्लों को उलट पुलट दिया है क्या तुम ये चाहते हो कि जिसको ख़ुदा ने गुमराही में छोड़ दिया है तुम उसे राहे रास्त पर ले आओ हालॉकि ख़ुदा ने जिसको गुमराही में छोड़ दिया है उसके लिए तुममें से कोई शख्स रास्ता निकाल ही नहीं सकता | सूरा निसा 4 का 88
وَدُّوا لَوْ تَكْفُرُونَ كَمَا كَفَرُوا فَتَكُونُونَ سَوَاءً ۖ فَلَا تَتَّخِذُوا مِنْهُمْ أَوْلِيَاءَ حَتَّىٰ يُهَاجِرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۚ فَإِن تَوَلَّوْا فَخُذُوهُمْ وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ وَجَدتُّمُوهُمْ ۖ وَلَا تَتَّخِذُوا مِنْهُمْ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا [٤:٨٩]
उन लोगों की ख्वाहिश तो ये है कि जिस तरह वह काफ़िर हो गए तुम भी काफ़िर हो जाओ ताकि तुम उनके बराबर हो जाओ पस जब तक वह ख़ुदा की राह में हिजरत न करें तो उनमें से किसी को दोस्त न बनाओ फिर अगर वह उससे भी मुंह मोड़ें तो उन्हें गिरफ्तार करो और जहॉ पाओ उनको क़त्ल करो और उनमें से किसी को न अपना दोस्त बनाओ न मददगार | सूरा निसा 4 का 89

मैंने यहाँ प्रमाण के लिए दो आयात प्रस्तुत किया, कुरान के अनेक स्थानों पर इसी प्रकार अल्लाह ने मुसलमानों को हुक्म दिया है गैर मुस्लिमों को मारने का कत्ल करने का | मानव कहलाने वालों आज दुनिया में जितने भी इस्लामी आतंकवादी अपना काम को अंजाम दे रहा है यही कुरानी आयातों से प्रेरित होकर ही |

भले ही कोई यह कहे की आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता वह कोरा झूठ है, इसी कुरान से प्रेरित होकर दुनिया में इस्लाम के मानने वाले आतंकवादी बनते हैं |
इस कुरान नामी किताब पर अविलम्व प्रतिबन्ध लगना चाहिए, कारण जब तक यह किताब है इस्लाम वाले इसी से प्रेरित होकर आतंकवाद को अंजाम देते रहेंगे |
महेन्द्रपाल आर्य = 12 /4 /19 =