अल्लाह जो चाहता है करता है, यह वाक्य मानवता विरोधी है ||

|| अल्लाह जो चाहता करता है, यह वाक्य मानवता विरोधी है ||

दुनिया वालों मुझे भी लिखकर आप लोगों के सामने प्रस्तुत करने में शर्म आ रही है | वह इस लिए की सम्पूर्ण इसलाम जगत में भले ही बरेलवी जगत इस कुरान की तफसीर {भाष्य} इबने कसीर को ना माने किन्तु देवबंदी खेमे में जो सबसे बड़ा तबका विद्वान जगत का है इस्लाम में यह सभी आलिम इबने कसीर नामी इस कुरान भाष्य, या तफसीर को सबसे जयादा प्रमाणित मानते हैं | और इसी किताब में यह जो किस्सा लिखा है उसे लिखने और उसमें क्या है यह बताने में संकोच बोध कर रहा हूँ | की कैसे कैसे गप्पे इसमें लिखागया है पढने में भी लोगों को सन्देह नहीं हुवा और ना हो रहा है सन्देह इस में आज तक | जबकि यह किताब लिखी गई हिजरी 774 सात सौ चुहत्तर हिजरी में – तबसे लेकर आज तक लोग पढ़ते आ रहे हैं इस पर किसीने सन्देह तक नहीं किया ? और ना इस्लाम जगत इसे गप्प माना ? यह कैसी अंध विश्वास को जन्म दिया है देखें क्या लिखा है इसमें |

हजरत मूसा को अल्लाह से कलाम करने वाला माना है,इसलाम के मानने वालों ने आज तक यह नहीं समझा की कलाम सिर्फ मानव ही कर सकता है मानवों को छोड़ कोई प्राणी धरती पर नहीं है जो बात कर सके ? दूसरी बात अल्लाह ने मूसा को वह ताकत दी की उसकी छड़ी पत्थर पर मारने पर उन्हीं पत्थरों से पानी निकलना शुरू हो जाये, वहां से चश्मा फौवारा निकलने लगे क्या यह सत्य है ? क्या यह सृष्टि नियम के विरुद्ध नहीं है क्या यह घटना विज्ञानं विरुद्ध नहीं हैं ? इसे इसलाम सच मान रहा है ? क्या यह मानवता विरुद्ध नहीं है ? फिर इस तफसीरे इबने कसीर में यह लिखते भी लेखक की बुद्धि काम नहीं किया और यह लिखा की जो इनकी लडाई बनू इस्राईल से हो रही थी, तो एक पैगम्बर युषाबिन नौन जो अल्लाह का पैगम्बर था उसने सूरज को कहा की ऐ सूरज तू अल्लाह का गुलाम है डूबने से रुकजा | और इस किताब में लिखा है की सूरज नहीं डूबा और रुक गया |

इस बात को जो लोग सत्य मानते हों क्या वह लोग मानव कहलाने के अधिकारी होंगे ? कारण सूरज का निकलना और डूबना होता है पृथ्वी के घुमने पर जब यह पृथ्वी सूरज के सामने हो तो दिन. और जब पीछे हो तो रात्रि | अब कोई सूरज को यह कहे की तू अल्लाह का गुलाम है मैं भी अल्लाह का गुलाम हूँ तू अभी डूबना नहीं रुक जा यह बातें काबिले कुबूल है क्या ? अगर यह पृथ्वी से कहते की तू रुकजा तो भी रुकना सम्भव नहीं था कारण यह सृष्टि का नियम है 24 घंटे में एक दिन होने का कोई उसे 22 घंटे में कर सकता है क्या ? नहीं कर सकता यही है सृष्टि नियम | इसी लिए ऋषि दयानंद जी का कहना है की जो सृष्टि नियम को नहीं जानता वह कुछ भी नहीं जाना अर्थात परमात्मा को जानने के लिए भी सृष्टि नियम को जानना जरूरी है |

मानव कितना ही बड़ा शक्ति शाली हो प्रकृति नियम को भंग नहीं कर सकता, उस नियम के विरुद्ध कोई भी काम मानव का नहीं हो सकता | आम के पेड़ में इमली मानव नहीं लगा सकता यह तो ठीक है, य काम ईश्वर भी नहीं कर सकते, कारण यह ईश्वर का काम ही नहीं हैं क्यों की ईश्वर नियम बनाते हैं नियमों का उलंघन करना ईश्वर का काम ही नहीं है | ईश्वर का कार्य क्या है लोगों ने जानने का भी प्रयास नहीं किया और सब कुछ ईश्वर करता है कहकर ईश्वर पर दोषारोपण करने लगे जब की यह काम भी मानव का नहीं है | मानव भी कोई तभी कहला सकता है जब मानवता पर अमल करे, विचार पूर्वक कार्य करे इसका कारण है मानव विषार शील हैं यही कारण बना मानव जैसा अन्य कोई प्राणी धरती पर नहीं है | इसके बाद भी मानव ईश्वर को बिना जाने ही सब काम ईश्वर करता है या कराता है कहे तो इस का भी नाम अमानवीयता ही है | महेन्द्रपाल आर्य -18 /5 /19