अल्लाह ने देखा मूसा के जूते को, अल्लाह का शारीर है |

|| अल्लाह ने देखा मूसा के जूते को ||
दुनिया वालों कुरानी अल्लाह अगर शरीर धारी नही तो, हज़रत मूसा को जूते उतार दो यह किसने कही ? देखें कुरान सूरा =ताहा= आयत =12 में अल्लाह ने क्या कहा |
मै तुम्हारा रब हूँ, पस तुम अपने जूते उतार दो,क्यों के तुम तो एक पाक वादी यानि तवामें हो |
اِنِّىْٓ اَنَا رَبُّكَ فَاخْلَعْ نَعْلَيْكَ ۚ اِنَّكَ بِالْوَادِ الْمُقَدَّسِ طُوًى 12۝ۭمیں تو تمہارا رب ہوں، پس تم اپنے جوتے اتار دو، کیونکہ تم تو ایک پاک وادی یعنی طویٰ میں ہو
नोट:-यहाँ अल्लाह ने साफ कहा मै तुम्हारा रब हूँ बस तुम जूता उतार दो,अर्थात अल्लाह जहाँ है वह जगह पाक, साफ है की वहां कोई जूता पहन कर नही जा सकता | पहली बात, दूसरी बात है की अल्लाह अगर शारीर धारी नही तो मूसा को जूता पहन कर जाते किसने देखा, जो अपने को रब भी बताया, कि मै तुम्हारा रब हूँ | क्या इस प्रमाण से अल्लाह का शारीर धारी प्रमाणित नही हो रहा है ? फिर आयत 14 से यह प्रमाण मिला कि हज़रत मूसा को जूता पहन के जाते हुए देखने वाला अल्लाह ही है | देखें =सूरा ताहा –आयत 14 ====
اِنَّنِيْٓ اَنَا اللّٰهُ لَآ اِلٰهَ اِلَّآ اَنَا فَاعْبُدْنِيْ ۙ وَاَ قِمِ الصَّلٰوةَ لِذِكْرِيْ بے شک میں ہی اللہ ہوں میرے سوا کوئی معبود نہیں پس میری ہی بندگی کر اور میری ہی یاد کے لیے نماز پڑھا کر
अर्थ:- बेशक मै ही अल्लाह हूँ मेरे सिवा कोई माबूद नही,पस मेरी ही बन्दगी कर और मेरी ही याद के लिए नमाज पढ़ा कर |
नोट :-यहाँ और भी स्पष्ट हो गया, की अल्लाह वही है जो मूसा को अपनी बन्दगी और.नमाज के लिए उपदेश दे रहे हैं | और यह भी बता रहे हैं की मेरे सिवा और कोई माबूद नही –यानि किसी और की उपासना नही करनी मुझे छोड़ कर | यानि एक अल्लाह को छोड़ किसी और की उपासना नही करनी | अब जिस नमाज को अल्लाह की उपासना बताया गया, या अल्लाह ने खुद कहा नमाज पढ़ा कर | क्या उस नमाज में सिर्फ अल्लाह की ही इबादत है ? अथवा उसी अल्लाह के साथ. साथ मुहम्मद को भी याद किया जाता है ? अगर उसी नमाज में अल्लाह के साथ साथ हज़रत मुहम्मद को भी याद किया, अथवा उनका नाम लिया जाता है, तो फिर अल्लाह का यह कहना की मुझे छोड़ किसी और की इबादत न करना यह सिद्ध किस प्रकार होगा भला ? उसी अल्लाह के साथ ही जब मुहम्मद को जोड़ा जा रहा है, तो अल्लाह कि इबादत हुई या अल्लाह और मुहम्मद दोनों की ? सम्पूर्ण नमाज में अल्लाह को कम और मुहम्मद को ज्यादा याद किया जाता है, देख लेना पूरी नमाज को कहाँ, और क्या क्या बोला जा रहा है ?
فَلَمَّا قَضٰى مُوْسَى الْاَجَلَ وَسَارَ بِاَهْلِهٖٓ اٰنَسَ مِنْ جَانِبِ الطُّوْرِ نَارًا ۚ قَالَ لِاَهْلِهِ امْكُثُوْٓا اِنِّىْٓ اٰنَسْتُ نَارًا لَّعَلِّيْٓ اٰتِيْكُمْ مِّنْهَا بِخَبَرٍ اَوْ جَذْوَةٍ مِّنَ النَّارِ لَعَلَّكُمْ تَصْطَلُوْنَ 29؀مو سٰی علیہ السلام نے مدتپوری کر لی اور اپنے گھر والوں کو لے کر چلے تو کوہ طور کی طرف آگ دیکھی۔ اپنی بیوی سے کہنے لگے ٹھہرو! میں نے آگ دیکھی ہے بہت ممکن ہے کہ میں وہاں سے کوئی خبر لاؤں یا آگ کا کوئی انگارہ لاؤں تاکہ تم سینک لو ۔
अर्थ :- मूसा ने मुद्दत पूरी करली और अपने घर वालों को ले कर चले तो कोहे तुर कि तरफ आग देखि, अपने बीवी से कहने लगे ठहरो मैंने आग देखि है बहुत मुमकिन है वहां से कोई खबर लाऊँ या आग का कोई अंगार लाऊँ ताके तुम सेंक लो |सूरा कसस =29 ==
فَلَمَّآ اَتٰىهَا نُوْدِيَ مِنْ شَا۸ الْوَادِ الْاَيْمَنِ فِي الْبُقْعَةِ الْمُبٰرَكَةِ مِنَ الشَّجَرَةِ اَنْ يّٰمُـوْسٰٓي اِنِّىْٓ اَنَا اللّٰهُ رَبُّ الْعٰلَمِيْنَ 30؀پس جب وہاں پہنچے تو بابرکت زمین کے میدان کے دائیں کنارے کے درخت میں سے آواز دئیے گئے کہ اے موسٰی! یقیناً میں ہی اللہ ہوں سارے جہانوں کا پروردگار
अर्थ :- पस जब वहां पहुंचे तो बा.बरकत जमीन के मैदान के दायें किनारे के दरख्त में से आवाज दिए गये, के ऐ मूसा यक़ीनन मै ही अल्लाह हूँ सारे जहानों का परवर दिगार | 30
नोट :-दुनिया के मानव कहलाने वालों जरा गौर से कुरानी अल्लाह की आवाज सुनें किसी दरख़्त से अल्लाह की आवाज आती है | अगर यह कहा गया होता की किसी दरख़्त के आढ़ से किसी की आवाज आई तो यह संभव है, पर किसी दरख़्त से आवाज आई मूसा का नाम लेकर कि ऐ मूसा यक़ीनन मै ही अल्लाह हूँ सारे जहानों का परवर दिगार | यहाँ भी अल्लाह को शारीर धारी नही. तो और क्या कहेंगे दुनिया के लोगों ? फिर कोई दरख्त किसी आदमी का नाम लेकर पुकारे यह विज्ञान विरुद्ध, और सृष्टि नियम विरुद्ध भी है |

وَاَنْ اَلْقِ عَصَاكَ ۭ فَلَمَّا رَاٰهَا تَهْتَزُّ كَاَنَّهَا جَاۗنٌّ وَّلّٰى مُدْبِرًا وَّلَمْ يُعَقِّبْ ۭ يٰمُوْسٰٓي اَقْبِلْ وَلَا تَخَفْ ۣ اِنَّكَ مِنَ الْاٰمِنِيْنَ اور یہ بھی آواز آئی کہ اپنی لاٹھی ڈال دے۔ پھر جب اس نے دیکھا کہ وہ سانپ کی طرح پھن پھلا رہی ہے تو پیٹھ پھیر کر واپس ہوگئے اور مڑ کر رخ بھی نہ کیا، ہم نے کہا اے موسٰی! آگے آ ڈر مت، یقیناً تو ہر طرح امن والا ہے
अर्थ :-और यह भी आवाज आई के अपनी लाठी डाल दे, फिर जब उसने देखा के वह सांप कि तरह फन फैला रही है, तो पीठ फेर कर वापस हो गये और मूढ़ कर रुख भी न किया, हमने कहा ऐ मूसा आगे बढ़ मत यकीनन तू हर तरह अमन वाला है | कसस =31 ==यहाँ भीअल्लाह शारीर धारी ही है | इस प्रकार कि मनघढ़न्त बातों के लिए वेद में कोई जगह नही है, जो विज्ञान विरुद्ध और सृष्टि नियम विरुद्ध हो | महेन्द्रपालआर्य,वैदिकप्रवक्ता=दिल्ली =10 /2 /018