आज सुबह मैं एक पेज में देखा

 

आज सुबह इस पेज में देखा ||

कोई सुदक्षिना शास्त्री जी हैं जिन्हों ने यह लिखा है, कई चित्र भी है जिसमें डॉ0 सोमदेव जी मुम्बई वाले भी है मुख्य रूपसे, गुरुकुल गौतम नगर वाले आचार्य हरिदेव जी जो सन्यासी है, और उनके साथ बैठे हैं स्वामी अर्यावेश जी जिनके लिए यह बताया है डॉ0 मुमुक्षु आर्य नॉएडा वाले |

इस लेख में बताया गया की डॉ0 मुमुक्षु स्वामी आर्यवेश का अपमान किया, स्वामी जी का ही नहीं सार्वदेशिक सभा का समस्त आर्य सन्यासी का अपमान किया |

किस बात पर यह प्रसंग लिखा गया इसकी जान कारी मुझे नहीं है नीचे दो लोगों के कोमेंट्स भी है एक इनके पक्ष में दूसरा विरोध में है | इसमें लिखा है डॉ0 मुमुक्षु अग्निवेश के चेले हैं अत: स्वामी जी के बारे में अनुचित बात करना स्वाभाविक है, नीचे मैंने उसे पेष्ट किया है आप लोग पढ़ें |

इसपर मैं अपना विचार बताना चाहता हूँ मैं 1983 से इन लोगों को जानता हूँ जब गुरुकुल इन्द्रप्रस्थ में स्वामी शक्तिवेश जी के पास रहता था जिन्हों ने मुझे वैदिक विचारों से जोड़ा |

कुल मिलाकर इसके लिए मैं दोषी मानता हूँ स्वामी इन्द्रवेश जी को जो सन्यासी थे विद्वान थे गुरुकुलीय जीवन था बहुत विनम्र थे सब कुछ ठीक था, लेकिन वह कुल मिलाकर अच्छे व्यक्ति या सन्यासी नहीं थे |  कारण एक शब्द में जमाझने का प्रयास करें, अगर वह व्यक्ति आर्य समाज के हितैषी होते तो, अग्निवेश से अपना किनारे करते | मेरे पास बहुत प्रमाण है |

मेरी बात को गंभीरता से समझने का प्रयास करें, फिर इसमें किसी को कुछ कहना हो मेरे साथ इस पर डिबेट में बैठ सकते हैं चाहे कोई भी हो |

अग्नि वेश प्रथम से ही वैदिक विचारों के नहीं है एक दो नहीं मेरे पास अनेक प्रमाण है, मैं ऋषि सिधान्तरक्षक पत्रिका में,अपने सम्पादकीय लेख के द्वारा निरंतर लिखता रहा | एक दो नहीं सभी प्रमाणों के साथ लिखता रहा | एक प्रमाण दे रहा हूँ, जिस समय नाथ द्वारा मन्दिर में हरिजनों को जाने नहीं दे रहे थे उन्हें रोका था, यही स्वामी अग्निवेश शबाना आजमी फिल्म बनाने वाली को अपने साथ लेकर जुलुस निकाले थे, नाथ द्वारा ले जारहे थे |  आर्य समाज में विरोध भी हुवा था उनदिनों स्वामी आनन्दबोध जी सार्वदेशिक सभा के प्रधान थे |

इनके बिरोध में मैंने लिखा था, तो सार्वदेशी सभा पर कब्ज़ा करने के बाद से मेरे इनके लेख  इनपर मैं लिखता रहा | एक बार स्वामी अग्निवेश जी ने पंजाब केसरी के सोमवार्ता के धर्म कर्म वाला पेज में इन्हों ने अपना वकतव्य दिया था =मेरा पूरा जीवन दयानन्द के लिए समर्पित है |

मैंने इसका जवाब देते हुए लेखनी के माध्यम से पूछा महाराज आप का जीवन अगर दयानन्द के लिए समर्पित है | तो हरिजनों को साथ लेकर नाथ द्वारा मन्दिर जाने का काम दयानन्द का था या उन्हें आर्य समाज में लाकर उपनयन पहनाते हुए पण्डित बनाने का काम था ?

आर्य कहलाने वालों आज तक इस सवाल का जवाब यह व्यक्ति नक्शिलिष्ट नहीं दे पाए और नहीं ला सकते हैं इसका जवाब |

अब आते हैं आर्यवेश पर यह भी प्रथम से एडवोकेट जगवीर रहते अग्निवेश इन्द्रवेश के साथ जन्म मरण के गाँठ बांध कर रह रहे हैं | इनसे पूछिये जब यह आर्य युवा परिषद् के अधक्ष बताकर अग्निवेश के साथ ही रहते रहे, तो जब अग्निवेश समलेंगिकता का समर्थन किया, तो आर्यवेश ने विरोध किया था क्या ? मात्र इतना ही नहीं – ऋषि दयानन्द जी की मान्यता धर्म एक है = अथवा सर्व धर्म की मान्यता ऋषि की है ? अग्निवेश सर्व धर्म चेतना के नाम रैली निकाली थे तो क्या आर्यवेश ने इसका विरोध किया ? अगर किया है तो कहाँ, अगर नहीं किया तो किसलिए नहीं किया ?

मेरे पास एक दो नहीं हजारों प्रमाण है अग्निवेश,आर्यवेश, एक सिक्के के दो पहलु हैं दोनों ही वैदिक विचारों का विरोधी है | आर्य वेश से कोई यह पूछे की अप अग्निवेश के साथ प्रथम से  हैं, अग्निवेश के साथी हैं तभी आप सार्वदेशिक सभाके प्रधान बताये जाते हैं, जिनके साथ आप का जीवन मरण का संपर्क जुडा है | वेद विरुद्ध विचार अग्निवेश का प्रथम से है, ईसाई और मुसलमानों के पक्ष में हमेश बोलते रहे | कश्मीरी अलगाववादियों के समर्थन में बोलते रहें फोटो खिंचवाते रहे | आपने एक बार भी विरोध किया है ? क्या आपने ऋषि दयानन्द के सत्यार्थ प्रकाश नहीं पढ़े ? स्वामी जी ने कुरान का समर्थन किया है क्या? अथवा कुरान की ईश्वरीय ज्ञान नहीं हो सकता यह लिखा ?

Sudakshina Shastri

17 hrs ·  डॉ मुमुक्षुआर्य द्वारा स्वामी आर्यवेश जी का घोर अपमान

डॉ सोमदेव शास्त्री, मुम्बई

स्वामी आर्यवेश जी दबाव में आ गए-ऐसा लिखकर डॉ मुमुक्षु आर्य ने स्वामी आर्यवेश जी का घोर अपमान किया है। स्वामी जी का ही नहीं अपितु सार्वदेशिक सभा का और समस्त आर्य संन्यासियों काभी अपमान किया है।

स्वामी आर्यवेश जी जैसा व्यक्तित्व जो कभी भी हरियाणा सरकार के दबाव में नहीं आया। जीवन भर संघर्ष किया, जेल भी गए किन्तु सत्य से पीछे नहीं हटे।स्वामी इन्द्रवेशजी के साथ तथा इस समय भी हरियाणा का एक संघर्षशील जुझारु संन्यासी, जिसने एडवोकेट की उपाधि प्राप्त करके,समस्त सुख वैभव को त्यागकर अपना पूर यौवन और जीवन आर्य समाज के लिए समर्पित कर दिया। उनके लिए दबाव शब्द का प्रयोग कर डॉ मुमुक्षु आर्य ने अक्षम्य अपराध किया है,जो निन्दनीय है।

Yagya Dev Arya

डॉक्टर मुमुक्षा आर्य जी पाखंडी अग्निवेश के चेले हैं अतः स्वामी जी के बारे में अनुचित बात करना स्वाभाविक है आर्य समाज के लोग मुमुक्षु आर्य जी को गंभीरता से न लें

Sudakshina Shastri

एकदम सही बात। साथ ही स्वयं को न जाने क्या समझते हैं |

= मेरे विचार को गंभीरता से सभी आर्य कहलाने वालों को पढ़ना चाहिए मेरी प्रार्थना है सबसे = महेन्द्र पाल आर्य = 19 /5 /20