|| आतंकवाद का कारखाना है कुरानी शिक्षा ||

|| आतंकवाद का कारखाना है कुरानी शिक्षा ||

शायद यह बातें उन लोगों को सही ना लगे जो इन्हें नहीं जानते, दर असल बात है लोगों की अज्ञानता मेरी बातों को ध्यान पूर्वक पढ़ने के बाद इसकी तहकीकात करना, की यह बातें कुरान में है अथवा नहीं ? अगर सत्य हो तो स्वीकारना और अगर असत्य हो तो स्वीकार ना करना |

सभी दुनिया वालों नें आज कई दिन पहले यह देखा और सुना भी दूरदर्शन के माध्यम से उ०प्र०के मुज़फ्फर नगर जिले का एक हिन्दू परिवार का लड़का जिसे कश्मीर से पकड़ा गया जो पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों में शामिल आदिल नाम का है |

प्रश्न है की जब वह हिन्दू परिवार से हैं तो उसका नाम आदिल कैसे ? पता यह लगा की उसने इस्लाम कुबूल किया है | तो क्या वह हिन्दू रहकर उन आतंक वाद में शामिल नहीं हो सकता था ? आतंकवादी बनने के लिए उसे इस्लाम कुबुलना पड़ा ? मानव समाज में यह बहुत बड़ा प्रशन खड़ा है, मिडिया वाले इस पर चर्चा नहीं करते और ना चर्चा करवाते हैं |

जिस दिन उसे पकड़ा उसी दिन ही मात्र मिडिया में दिखाया सुनाया गया, उसे यह भी दिखाया गया था जो आदिल नामी आतंकवादी पकड़ा गया उसका बड़ा भाई या कोई स्वजन मिडिया वालों से यह कहते हुए दिखाया गया, जो कह रहा था उसे फाँसी लगादे गोली मारदे सरकार जो चाहे सो करे |

अब जो हिन्दू नाम धारी था उसका नाम बदला गया इस्लामी नाम रखा उससे इसलाम कुबूल करवाया गया उसे यही सिखाया और बताया गया की इसलाम कुबूल करो अल्लाह सब गुनाहों को माफ़ कर देंगे | अगर आप लोगों को विश्वास ना हो तो डॉ0 जाकिर नाईक के वीडियो सुनें youtube में | बांग्लादेश, केरला, हैयद्रावाद, और भारत के विभिन्न प्रान्तों से आतंकवाद में शामिल होने वालों को पकड़ा गया उन सभी आतंकवादियों ने यही कहा की हमें प्रेरणा देने वाले डॉ0जाकिर नाईक हैं उनका लेक्चर, उनकी किताब है |

अब जिन हिन्दू को मुसलमान बनाया गया उसे भी यही शिक्षा दी गई इसलाम कुबूल करों अल्लाह तुम्हें जन्नत नसीब करेंगे तुम्हारी सभी हुनाहों को माफ़ कर देंगे तुम्हारी जिन्दगी बन जाये गी | यह जी पाठ पढ़ाया गया या पढ़ाया जाता है वह जाकिर नाईक अपने मनमानी बातें नहीं सुनाई यही पाठ कुरान में अल्लाह का पढ़ाया, बताया हुवा है जिसे, सम्पूर्ण इसलाम के मानने वाले इसे जानते हैं और मानते भी हैं | जाकिर नाईक की इस पर कई पुस्तकें भी है सभी कुरानी हवाला और प्रमाण के साथ ही है | यद्यपि उनकी कई पुस्तकों का जवाब मैं दे चूका हूँ, फिर भी यह कहाँ तक सही है इसे देखना है |   देखें कुरान में अल्लाह ने क्या फ़रमाया है =सूरा 67 मुल्क =आयत 2 में

الَّذِي خَلَقَ الْمَوْتَ وَالْحَيَاةَ لِيَبْلُوَكُمْ أَيُّكُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْغَفُورُ [٦٧:٢]

जिसने मौत और ज़िन्दगी को पैदा किया ताकि तुम्हें आज़माए कि तुममें से काम में सबसे अच्छा कौन है और वह ग़ालिब (और) बड़ा बख्शने वाला है | जाकिर नाईक ने अपनी पुस्तक में भी दिया है

إِنَّ الَّذِينَ فَرَّقُوا دِينَهُمْ وَكَانُوا شِيَعًا لَّسْتَ مِنْهُمْ فِي شَيْءٍ ۚ إِنَّمَا أَمْرُهُمْ إِلَى اللَّهِ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا كَانُوا يَفْعَلُونَ [٦:١٥٩]

बेशक जिन लोगों ने आपने दीन में तफरक़ा डाला और कई फरीक़ बन गए थे उनसे कुछ सरोकार नहीं उनका मामला तो सिर्फ ख़ुदा के हवाले है फिर जो कुछ वह दुनिया में नेक या बद किया करते थे वह उन्हें बता देगा (उसकी रहमत तो देखो)  सूरा 6 =159

يُدَبِّرُ الْأَمْرَ مِنَ السَّمَاءِ إِلَى الْأَرْضِ ثُمَّ يَعْرُجُ إِلَيْهِ فِي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ أَلْفَ سَنَةٍ مِّمَّا تَعُدُّونَ [٣٢:٥]

आसमान से ज़मीन तक के हर अम्र का वही मुद्ब्बिर (व मुन्तज़िम) है फिर ये बन्दोबस्त उस दिन जिस की मिक़दार तुम्हारे शुमार से हज़ार बरस से होगी उसी की बारगाह में पेश होगा | सूरा 32=5

وَاللَّهُ يَدْعُو إِلَىٰ دَارِ السَّلَامِ وَيَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ [١٠:٢٥]

और ख़ुदा तो आराम के घर (बेहश्त) की तरफ बुलाता है और जिसको चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत करता है | सूरा 10 =आयत 25

وَيَقُولُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ آيَةٌ مِّن رَّبِّهِ ۗ قُلْ إِنَّ اللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَاءُ وَيَهْدِي إِلَيْهِ مَنْ أَنَابَ [١٣:٢٧]

और जिन लोगों ने कुफ्र एख़तियार किया वह कहते हैं कि उस (शख्स यानि तुम) पर हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़ कोई मौजिज़ा उसके परवरदिगार की तरफ से क्यों नहीं नाज़िल होता तुम उनसे कह दो कि इसमें शक़ नहीं कि ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है | सूरा 13 =27

 

इस्लाम कुबूल करने से अल्लाह जन्नत में क्या क्या दे रहे हैं ? कुरान भरा पड़ा है >

بِأَكْوَابٍ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٍ مِّن مَّعِينٍ [٥٦:١٨]

(शरबत वग़ैरह के) सागर और चमकदार टोंटीदार कंटर और शफ्फ़ाफ़ शराब के जाम लिए हुए उनके पास चक्कर लगाते होंगे | सूरा 56 =18 =وَحُورٌ عِينٌ [٥٦:٢٢]

और बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूरें | كَأَمْثَالِ اللُّؤْلُؤِ الْمَكْنُونِ [٥٦:٢٣]

जैसे एहतेयात से रखे हुए मोती | وَفُرُشٍ مَّرْفُوعَةٍ [٥٦:٣٤]

और ऊँचे ऊँचे (नरम गद्दो के) फ़र्शों में (मज़े करते) होंगे | यहाँ शब्द को ध्यान से पढ़ना मजे करते रहेंगे |

इस प्रकार अल्लाह ने इस्लाम वालों को जन्नत में सभी प्रकार की सुख सुबिधा देने की बात कही हैं | वह लड़का आदिल ने इसी लिए इस्लाम कुबूल किया है | विचारणीय बात यह है की यह सभी सामान इस्लाम कुबूल करने पर ही मिलेगा, हिन्दू रहने पर नहीं | और आतंकवादी बन कर किसी काफ़िर को मार कर मरा फिर तो साधारण मुस्लमान से ऊपर हो गया शहीद कहलायेगा | उसके लिए तो अल्लाह के पास सभी स्पेशल सामान देने की बातें हैं कुरान में | अब दुनिया के मानव कहलाने वालें विचार करें की आतंकवाद की फेक्ट्री कहाँ और किसके पास है |

 

महेन्द्रपाल आर्य =5 =2 =18