आर्य मित्रों को नमस्ते के साथ सुचना ||

आर्य मित्रों को नमस्ते के साथ सुचना ||
आज 25 जुलाई 21 को रात्रि 8 बजे मेरा कार्यक्रम है लाइव स्ट्रीम में आप सभी
सादर आमंत्रित है |
सम्पूर्ण धारती पर लोग अधिकांश मानव कहलाने वाले नास्तिक बनते जा रहे हैं, यह कौन है नास्तिक और नास्तिक किसे कहा जाता है उसे ही नहीं जानते ?
 
लोग समझते हैं की ईश्वर को ना मानने वाला ही नास्तिक होते हैं यह बातें भी सत्य नहीं है, अपितु मनु महाराज लिखते हैं नास्तिको वेद निन्दकः = अर्थात जो वेद को नहीं मानते हैं जो वेद निंदक हैं वही नास्तिक है |
 
जो लोग ईश्वर को नहीं मानते हैं उनकी मान्यता हट और दुराग्रह ही है अगर उनका तर्क है की ईश्वर होता ही नहीं है और न ईश्वर की जरूरत | और जिसे हम देखते नहीं है उन्हें हम क्यों मानें ?
 
इसका समाधान यह है की इसी धरती पर ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो हम देखते ही नहीं है उसे मानना ही पड़ता है, दिमाग मिला है इसी काम के लिए, जो आँख का विषय नहीं है उसे कोई देखना चाहें देखा जाना संभव है क्या ?
 
एक बात जरुर ध्यान में रखना होगा की कई बार हम अपने आप ही कहते हैं, सुनकर देखो – खाकर देखो = चिख कर देखो =गा कर देखो = गवा कर देखो = बोल कर देखो आदि आदि यह जितने भी इस प्रकार के वाक्य हैं क्या वह सब आंखसे देखने की बात हुई ? नहीं लेकिन इसे भी सच ही मानना पड़ता है |
 
बिन देखे ही मानना पड़ता है क्या यह सब देखने की वस्तु हैं ? विषय आँख से जुडा है = जैसा सूंघ कर देखो = क्या सूघने से दिखाई पड़ता है ? हरगिज नहीं तथापि उसके घ्राण से हमें पता लगता है यह वासी है ख़राब है सुगंध है या दुर्गन्ध आदि आदि |
आज हमारा विषय वेद और परमात्मा ही रहेगा परमात्मा क्या है कौन है कैसा है यह सभी बातें वेद से ही पाया जाना संभव है इसी पर ही चर्चा होगी आप लोग सादर आमंत्रित है जरुर जुड़ें | धन्यवाद के साथ महेन्द्र पाल आर्य = 25 /7 /21 आज ही रत 8 बजे आप सभी जरुर मिलें ||