आर्य समाज के अधिकारीयों का यह दायित्व नहीं बनता ?

|| आर्यसमाज केअधिकारियों का यह दायित्व नहीं बनता ||

ऋषि दयानन्द लिखते हैं, वेद का पढ़ना,पढ़ाना, और सुनना,सुनाना,सबआर्यों का परम,धर्म है |

अगर इस काम को सत्य सिद्ध नही कर पाते तो विशेष आर्य समाजी कहलाने वालों को-आर्य समाज के कार्यकर्ता और सभी आर्यसमाजी नेता कहलाने वालों को तथा दयानन्द के नाम और आर्य नाम धारियों को चाहिए आर्य समाज का तीसरा नियम को हटा देना |

जहाँ लिखा है { वेद सब सत्य विद्याओं कि पुस्तक हैअगर यह बात सत्य है तो इसे सिद्ध कर दिखाना चाहिए | वरना दुनिया वाले कैसे जानेंगे ऋषि के यह वाक्य सत्य है ? ऋषि संस्था की आमदनी को मत खाव बल्कि ऋषि वाक्य को सत्य प्रमाणित करके दुनियावालों को दिखा दो आर्यसमाज केअधिकारीयों |

विशेष कर मैं आज सत्यसनातन वैदिक धर्म=अथवा मानव धर्म के मानने वालों से एक विनती कर रहा हूँ | कि हमलोगों को एक बहुत सुंदर अबसर मिला है इस डॉo जाकिरनाईक प्रकरण को लेकर |

दिल्ली के जन्तर-मन्तर= में एक प्रेसवार्ता रखी जाय, जिसमें सभी न्यूज़ चेनल वालों को निमन्त्रण दिया जाय | साथ ही साथ, इन ईसाइयों और मुसलमानों को भी निमन्त्रण दिया जाय | जाकिर नाईक के पक्ष और उनके विपक्ष वालों को भी निमंत्रण देकर सबके सामने यह उजागर किया जाय की धर्म सिर्फ सत्यसनातन वैदिम धर्म ही मानव मात्र का धर्म है  |
धर्म ग्रन्थ ईश्वर प्रदत्य कौन सा है ? वेद है= कुरान है=अथवा बाइबल ? यह अवसर बार बार मिलना नही है हमें इस काम को करते हुए सम्पूर्ण जगत में हम वैदिक धर्म की डंका बजा सकते हैं |

विशेष कर आर्य समाजियों से मेरी प्रार्थना है की आप लोग सिर्फ सुनाते हैं वेदों का डंका आलम में बजवा दिया ऋषि दयानन्द ने | आर्य कहलाने वालों अब यह सिर्फ कहने का नही किन्तु दिखाने का है |

आ जाव मैदान में और इन मत पन्थ वालों को खुली चुनौती दे कर इसे सिद्ध कर दिखाव सही में आर्य समाजी हो तो, ऋषि के सच्चे सपूत हो तो इस काम को कर दिखाव |

वरना इन आर्य समाज कि सम्पत्ति से अपना कब्जा छोड़ो फिर दुसरे लोगों को बताने दो वह  बताएँगे धर्म मनुष्य मात्र का एक ही है अथवा अनेक?

क्या इस्लाम धर्म है अथवा इसाइयत धर्म है ? वेद ईश्वरीय ग्रन्थ है, अथवा कुरान, या फिर बाईबिल ? आज इसे पूरी दुनिया वालों के सामने सिद्ध करना है |

जो लोग काम करना चाहते हैं उसे आप आने नहीं देते और आप लोग इस काम को करना नहीं चाहते  फिर ऋषि दयानन्द के इन विचारों को चरितार्थ कैसे किया जायगा ?   इन बातों को सम्पूर्ण आर्य जगत में  बैठे अधिकारीयों को पहुंचा देना चाहिए  |   महेन्द्र पाल आर्य = 29/ 12 /20