इसलाम में औरत मर्द में समानता नहीं, एक मर्द के बराबर दो औरतें |

|| इस्लाम में एक पुरूष के बराबर दो औरतें ||

अल्लाह के नजदीक मर्द और औरतों में भेद, स्त्री पुरषों में बराबरी नहीं है अल्लाह के नजदीक, एक पुरूष के मुकाबले में दो स्त्री {महिला} है देखें कुरान सूरा निसा आयत 11  जब अल्लाह के पास बराबरी नहीं है तो मुस्लमान स्त्री और पुरूष को बराबर कैसे कह सकते हैं ?

पिता की संपत्ति में बेटी मात्र 4 आना के हकदार है, और पति की संपत्ति में 2 आना के हकदार है | इसके बाद भी कोई कहे असदुद्दीन ओवैसी सरीखे लोग की इस्लाम में औरत और मर्दों में बराबरी है, तो यह सरासर झूठ है | बात है की अल्लाह के नजदीक भी औरत और मर्द में बराबरी नहीं है जन्नत में जो कुछ भी हुर, व गिलमान आदि, जो कुछ भी मिलना है उसमें औरतों को क्या मिलना है कितना मिलना है कोई उल्लेख नहीं पूरी कुरान में, इसके बाद भी अगर कोई कहे की स्त्री और पुरुष दोनों में बराबरी है. तो यह सत्य से कोसो दूर है |

يُوصِيكُمُ اللَّهُ فِي أَوْلَادِكُمْ ۖ لِلذَّكَرِ مِثْلُ حَظِّ الْأُنثَيَيْنِ ۚ فَإِن كُنَّ نِسَاءً فَوْقَ اثْنَتَيْنِ فَلَهُنَّ ثُلُثَا مَا تَرَكَ ۖ وَإِن كَانَتْ وَاحِدَةً فَلَهَا النِّصْفُ ۚ وَلِأَبَوَيْهِ لِكُلِّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا السُّدُسُ مِمَّا تَرَكَ إِن كَانَ لَهُ وَلَدٌ ۚ فَإِن لَّمْ يَكُن لَّهُ وَلَدٌ وَوَرِثَهُ أَبَوَاهُ فَلِأُمِّهِ الثُّلُثُ ۚ فَإِن كَانَ لَهُ إِخْوَةٌ فَلِأُمِّهِ السُّدُسُ ۚ مِن بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوصِي بِهَا أَوْ دَيْنٍ ۗ آبَاؤُكُمْ وَأَبْنَاؤُكُمْ لَا تَدْرُونَ أَيُّهُمْ أَقْرَبُ لَكُمْ نَفْعًا ۚ فَرِيضَةً مِّنَ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا [٤:١١]

(मुसलमानों) ख़ुदा तुम्हारी औलाद के हक़ में तुमसे वसीयत करता है कि लड़के का हिस्सा दो लड़कियों के बराबर है और अगर (मय्यत की) औलाद में सिर्फ लड़कियॉ ही हों (दो) या (दो) से ज्यादा तो उनका (मक़र्रर हिस्सा) कुल तर्के का दो तिहाई है और अगर एक लड़की हो तो उसका आधा है और मय्यत के बाप मॉ हर एक का अगर मय्यत की कोई औलाद मौजूद न हो तो माल मुस्तरद का में से मुअय्यन (ख़ास चीज़ों में) छटा हिस्सा है और अगर मय्यत के कोई औलाद न हो और उसके सिर्फ मॉ बाप ही वारिस हों तो मॉ का मुअय्यन (ख़ास चीज़ों में) एक तिहाई हिस्सा तय है और बाक़ी बाप का लेकिन अगर मय्यत के (हक़ीक़ी और सौतेले) भाई भी मौजूद हों तो (अगरचे उन्हें कुछ न मिले) उस वक्त मॉ का हिस्सा छठा ही होगा (और वह भी) मय्यत नें जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तालीम और (अदाए) क़र्ज़ के बाद तुम्हारे बाप हों या बेटे तुम तो यह नहीं जानते हों कि उसमें कौन तुम्हारी नाफ़रमानी में ज्यादा क़रीब है (फिर तुम क्या दख़ल दे सकते हो) हिस्सा तो सिर्फ ख़ुदा की तरफ़ से मुअय्यन होता है क्योंकि ख़ुदा तो ज़रूर हर चीज़ को जानता और तदबीर वाला है |                                  गौर से देखें =महेन्द्रपाल आर्य =4 =2 =18 =