इसलाम में भाईचारे की बातें झूठी

|| इस्लामी भाईचारा की बातें झूठी ||
प्रायः सुनने में आता है की इसलाम में जी भाईचारा की बातें है, वह किसी अन्य मानव समाज में नहीं है, और इस्लाम का अर्थ लोग शांति बताते हैं |
पर जो लोग कुरान को पढ़े नहीं है वही लोग इस्लाम को शान्ति, अथवा इस्लाम का अर्थ शांति बताते हैं | आयें हम लोग जरा कुरान से ही पता करते हैं, क्या कुरान में इन बैटन से शांति फैलेगी दुनिया में अता अशान्ति होगी ? जो लोग इस्लाम में भाचारा बताते हैं उन्हें कुरान की इन आयातों पर विचार करना चाहिए की सही में अल्लाह इस्लाम वालों को बहचारा का उपदेश दिया है, अथवा मानव समाज में एक दुसरे से नफरत करना सिखाया है ? निचे दिए कुरान की आयातों पर विचार कर ही आप खुद निर्णय ले सकते हैं की अल्लाह का उपदेश क्या है |
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الْيَهُودَ وَالنَّصَارَىٰ أَوْلِيَاءَ ۘ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۚ وَمَن يَتَوَلَّهُم مِّنكُمْ فَإِنَّهُ مِنْهُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ [٥:٥١]
ऐ ईमानदारों यहूदियों और नसरानियों को अपना सरपरस्त न बनाओ (क्योंकि) ये लोग (तुम्हारे मुख़ालिफ़ हैं मगर) बाहम एक दूसरे के दोस्त हैं और (याद रहे कि) तुममें से जिसने उनको अपना सरपरस्त बनाया पस फिर वह भी उन्हीं लोगों में से हो गया बेशक ख़ुदा ज़ालिम लोगों को राहे रास्त पर नहीं लाता | सूरा मायदा 51
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا مَن يَرْتَدَّ مِنكُمْ عَن دِينِهِ فَسَوْفَ يَأْتِي اللَّهُ بِقَوْمٍ يُحِبُّهُمْ وَيُحِبُّونَهُ أَذِلَّةٍ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ أَعِزَّةٍ عَلَى الْكَافِرِينَ يُجَاهِدُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَلَا يَخَافُونَ لَوْمَةَ لَائِمٍ ۚ ذَٰلِكَ فَضْلُ اللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ [٥:٥٤]
ऐ ईमानदारों तुममें से जो कोई अपने दीन से फिर जाएगा तो (कुछ परवाह नहीं फिर जाए) अनक़रीब ही ख़ुदा ऐसे लोगों को ज़ाहिर कर देगा जिन्हें ख़ुदा दोस्त रखता होगा और वह उसको दोस्त रखते होंगे ईमानदारों के साथ नर्म और मुन्किर (और) काफ़िरों के साथ सख्त ख़ुदा की राह में जेहाद करेंगे और किसी मलामत करने वाले की मलामत की कुछ परवाह न करेंगे ये ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) है वह जिसे चाहता हे देता है और ख़ुदा तो बड़ी गुन्जाइश वाला वाक़िफ़कार है | सूरा मायदा 58

कुरान के इन आयातों से पता लगता है अल्लाह ने मुसलमानों से कहा तुम गैर मुस्लिमों से यहूदी और जो दुसरे लोग है उनसे मित्रता भी नहीं रखने को कहा है मुसलमानों को और वह जिसे चाहता है बख्श देता है जिसे चाहता है सजा देता है |
जहाँ तक बात बख्शने की है तो अल्लाह काफिरों को कभी भी नहीं बख्शेंगे | और ना फकीरों को अल्लाह कभी जन्नत में भेजेंगे | काफ़िर तो हमेशा हमेशा के लिए दोजख {नरक} में रहेंगे | यह है अल्लाह और अल्लाह की कलाम |
मेरे विचारों को सुनने के लिए आप दिल्ली के रहने वाले 3 दिसम्बर रविवार को दिल्ली के खारीबावली नयाँबांस आर्य समाज में अवश्य पधारें |
और उत्तर प्रदेश वाले 6 दिसम्बर को बाराबंकी शहर में जरुर पहुँचें | और हरियाणा वाले 17 दिसम्बर को दिनमें रोहतक के मोडलटाउन आर्य समाज में पधारें | धन्यवाद के साथ=
महेन्द्रपाल आर्य =वेदिक प्रवक्ता =दिल्ली =24 =11 =17 =