इसलाम वालों की मान्यता बिल कुल गलत है |

|| इसलाम वालों की मान्यता बिलकुल गलत है ||
इन इसलाम वालों का कहना है अल्लाह जो चाहता है, वही होता है या फिर अल्लाह जो चाहता है वही करता है | किस प्रकार गलत है इसे पढ़ें ||

अल्लाह ने कुरान में साफ़ फरमाया की जिस कुरान को जिस हिदायत को अल्लाह ने फरमा दिया- यानि अल्लाह की तरफ से आया है – और जिसे तेरी कौम कुरैश झुठला रही है – बिलकुल यह कुरान हक़ {सत्य} है इसके सेवा और हक़ है ही नहीं है –

अर्थात अल्लाह ने भेजी अपने नबी या रसूल पर जो किताब जिसका नाम कुरान है – और यह भेजी गई रसूल मुहम्मद {स} पर जो कुरैश वंश के थे –और इसी कुरैश वंश वाले इसी कुरान को झुठलाया था, जिसकी चर्चा कुरान में की गई है |
यहाँ एक साथ कई सवाल सामने आना स्वाभाविक है – की अल्लाह को पहले से पता था या नहीं ? की जिस कुरान को मैं भेज रहा हूँ जिन मुहम्मद पर उनके वंशज इसे स्वीकार करेंगे या नहीं ?
और मुहम्मद के अपने परिवार जनों से दुश्मनी मोलनी पड़ सकती है ? अगर अल्लाह को यह जान कारी थी तो अल्लाह जिसे चाहते हैं सीधा रास्ता दिखाते हैं | तो हज़रत मुहम्मद के कुरैश वंशजों को सीधा रास्ता क्यों नहीं दिखा सके ?

यहाँ तक के मुहम्मद साहब के चाचा जो 11 थे उन्हों ने हुजुर की बातों को नहीं माना और ना तो अल्लाह ही उन्हें मनावा सकें |

जिनमें एक चाचा का नाम अबुजहल जो उन दिनों बड़े ही प्रतिष्ठित व्यक्ति थे और वह मुहम्मद साहब के विरोधी बन गये इस कुरान की बातों को वह मानने से इंकार किया | और महम्मद के पैगम्बर होने का भी विरोध किया, जिसे अल्लाह राहे रास्त पर नहीं ला सके ?

कुरान में एक दो बार ही नहीं अनेक बार अल्लाह ने खुद काहा देखें कुरान सूरा 76 =का आयात =30 =सूरा 81 का 29 = सूरा 87 का 7=सुर 13 का 39= सूरा 3 का 129 कुरान भरा पड़ा है कहाँ कहाँ, लिखूं कौन कौन सा लिखूं ?

जो इसलाम वाले दम भरते हैं वह बिलकुल गलत है और असत्य भी जिसका प्रमाण कुरान से हि मैंने प्रमाणित किया है = दुनिया के लोग इसे देखें पढ़ें और विचार करें की सत्य क्या है कहाँ है ? कुरान की बातें सत्य क्यों कर हो सकती है ? धन्यवाद के साथ =महेन्द्रपाल आर्य = 29/7/19=