ईश्वर चन्द्र विद्या सागर जी को अपना आदर्श बताने वाले का यही चरित्र ?

ईश्वरचन्द्र विद्या सागर जी को अपना आदर्श बताने वाले का यही चारित्र ?
मैंने तो कल बताया की यही तो सरकार की कमजोरी है की हमारी वोट को वोट नहीं मानती | हमारी मर्यादा को नहीं समझती सरकार एक एक कर अपनी मजबूती दिखाए तो अच्छे अच्छे ठीक हो जाते हैं और यह साधारण मानव ही क्या है ?
पर सरकार के पास जो ताकत है उसे प्रयोग करने का होता है रखने का नहीं | बंगाल की मुख्य मंत्री द्वारा सरकार को ललकारा जा रहा है | क्या यह सरकार की निकम्मी पण नहीं है ? प्रान्त में मुख्यमंत्री कहे जो हमसे टकराएगा, चूर चूर हो जायेगे ? यह कौन सी मर्यादा की भाषा है ? देश के प्रधान मंत्री को नहीं मानती ? जिस देश में रह रही है उसी देश का मुख्यमंत्री यह शब्द बोले, प्रधानमंत्री को थप्पड़ मारने की बात कहे, इससे तो अंदाजा लगाया जा सकता है की हमारे देश का अधियानक सरकार लाचार है | आज बंगाल में आये दिन हत्याएं हो रही है साधारण लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है | और प्रान्त के मुख्यमंत्री मुसलमानों के पक्ष में बयाँन बाजी कर रही हैं उनकी लात तक खाने को तैयार हैं =
आप 27 % की बात कर रहे हैं, मुख्यमंत्री अगर उनके साथ खड़े हैं तो उन्हें 73 % का डर किसलिए हो ? एक तरफ तो माननीया मुख्यमंत्री ईश्वर चन्द्र विद्या सागर जी की मर्यादा की बात करती हैं, और सारा काम विद्या सागर जी के चरित्र के विपरीत हैं |
ईश्वर चन्द्र विद्या सागर जी के जीवन की एक घटना है | एक बार वह ट्रेन से उतरे उसी प्लेटफार्म पर एक आदमी कुली कुली पुकार रहा था , विद्यासागर जी उनके पास पहुँचे, उनके पास एक सूटकेस था विद्यासागर जी सूटकेस उठाया और उनको उन्ही के घर छोड़ा | यह चरित्र जिन महा पुरुष के हों और उन्ही का नाम लेकर उन्हें आदर्श मानने वाली बताकर मुसलमानों को दूध देने वाली गोरु कहे- क्या यही ईश्वर चन्द्र विद्या सागर जी की मर्यादा थी ?
जिन मुख्य मंत्री का काम है जनसेवा और उनसे जनता दुखी हो क्या इसे जनसेवा कहा जायगा ? बांगाल के राज्य पाल को चाहिए पूरी घटना को गृह मंत्रालय को भेजना बंगाल में नरसंहार हो रहा है | एक पटरी के लोग दूसरी पार्टी के लोगों को मार रहे हैं बंगाल पुलिस की संरक्षण में क्या हो रहा है यह ? देश की जनता मुख्य मंत्री जी से जानना चाहती है |