कुरानी किस्से के सामने मनोहर क्घनी भी फेल ||

|| कुरानी किस्से के सामने,मनोहर कहानी भी फेल ||
यह प्रमाण है इबने कसीर पेज 261 व 262, पारा 8 सूरा 7 आयराफ आयात 22,23, का – अब इस आयात का उतरने का सन्दर्भ को देखें क्या बताया गया है = लगजिश के बाद क्या हुवा {पिसलावट के बाद क्या हुवा} ? अबी बिन कयाब राजिअल्लाहू यन्हा फरमाते है हजरत आदम का कद एक खजूर के दरख़्त के समान था और सर पर बहुत लम्बे लम्बे बाल थे दरख़्त खाने से पहले उन्हें उन्हें अपना शर्म गाह का पता भी ना था नजर ही न पड़ी थी लेकिन इस खता के होते ही वह जाहिर हो गयी भागने लगे तो बाल एक दरखत में उजझ गये कहने लगे ऐ दरखत मुझे छोड़दे दरख से जवाब मिला ना मुमकिन {असंभव} है उसी वक्त अल्लाह ताला की तरफ से आवाज आई क्व ऐ आदम मुझसे भाग रहा है ? कहने लगे या अल्लाह शर्मिंदगी है शरमसार हूँ – यह रवायत मरफुय भी मरवी है –
लेकिन ज्यादा सहीह मौकूफ होना ही है {ज्यादातर लेखकों की राय यही है जो सहीह है}-इबने अब्बास फरमाते हैं – दरख़्त का फल खा लिया और छुपाने की चीज जाहिर हो गई, जन्नत के पत्तों से छुपाने लगे, एक को एक कोने पर चिपकाने लगे हजरत आदम शर्म के मरे इधर उधर भागने लगे – लेकिन एक दरख़्त के साथ उलझ कर रहगे आल्लाह ताला ने आवाज दी आदम मुझसे भागता है ? आपने फरमाया नहीं या अल्लाह मैं शर्म के मारा भाग रहा हूँ – जनाब बारी ने फ़रमाया आदम जो कुछ मैंने तुझे दे रखा था क्या वह तुझे काफी ना था ? आपने जवाब दिया बेशक काफी था लेकिन या अल्लाह मुझे यह इल्म ना था के कोई तेरा नाम लेकर तेरी कसम खाकर झूठ कहेगा – अल्लाह ताला ने फ़रमाया अब तू मेरी नाफ़रमानी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा औत तकलीफ उठाना भी पड़ेगा –

चुनान्चे जन्नत से दोनों को उतार दिया गया – अब इस खुशादगी के बाद यह तंगी उनपर बहुत हि दुखदायी हुयी खाने पीने को तरस गये – फिट उन्हें लोहे की सियत कोहारका काम सिखाया गया – खेती का काम भी बताया गया – आपने जमीन साफ़ की दाने बोये वह उगे बड़े पीला बाले निकली दाने पके फिर तोड़े गये फिर पिसे गये आँटा बना फिर रोटी तैयार हुई फिर खाए –जब जा कर भूख की तकलीफ से निजाम पाई – तीन के पत्तों से अपना आगा पीछा छुपाते फिरते थे- जो बार बार कपडे की थे वह नुरानी परदे जिनसे एक दुसरे से मुलिन्द्रिय छुपाये हुए थे नफ़र मानी होते हि वह हट गये और वह नज़र आने लगे – हजरत आदम उसी वक्त अल्लाह की तरफ रुग्बत करने लगे –तौबा इस्तिगफार कीतरफ झुक पड़े बा खिलाफ इब्लीस के उसने सजा का नाम सुनते ही अपना हथियार यानि हमेशा की जिन्दगी वगैरा की तलब की, अल्लाह ने दोनों की दुआ सुनी और दोनों को तलब कर वह चीज इनायत फरमाई – हदीस में है के हजरत अदामने जब दरख से खा लिया – उसी वक्त अल्लाहताला ने फरमाया – उस दरख़्त से मैंने तुम्हें रोक दिया था फिर तुमने उसे क्यों खाया ? खाने लगे हवा ने {पत्नी} ने मुझे रुगबत दिलाई अल्लाह ने फरमाया उनकी सजा यह है हमाल के हालात में भी तकलीफ में रहेंगी – बच्चा होते वक्त भी तकलीफ उठाएंगी – यह सुनते ही हवा ने रोना शुरू किया – हुक्म हुवा की यहीं तुझपर और तेरा औलाद पर लिख दिया गया – हजरत अदम ने जनाब बारी में यर्ज़ की , और अल्लाह ने उन्हें दुआ सिखाई उन्हों ने दुआ की जो कौल हुई और कुसूर माफ़ फरमा दिया = फलह्म्दु लिल्लाह =

नोट :- हजरत आदम कितने लम्बे थे यह नहीं बताया,मात्र इतना बताया उनके कद लम्बाई खजूर के पेड़ के समान था – और सर पर बहुत लम्बे लम्बे बाल थे – यहाँ फल खाने की बात नहीं है, दरख़्त खाना लिखा है | अब सवाल यह बनता है की अल्लाह ने फल खाने को मना किया था अथवा दरख़्त ? और दरख़्त खाना क्यों और कैसे संभव है ? वह कौन सा दरख़्त है जिसे खाया जाता है ? और जिसका नाम भी नहीं बताया गया ना तो फल किसका था यह बताया और ना पेड़ या दरखत का नाम का उल्लेख है कहीं
आगे बताया की दरख्त खाने से पहले शर्मगाह का भी इल्म ना था – अर्थात आदम को अबतक यह पता नहीं था जब तलक वह फल या दरख्त को नहीं खाए थे अब तलक उन्हें पता ही नहीं चला की वह नंगे है |

वह दरख़्त, या फल ही क्या था की जिसे खाने से उन्हें यह मालूम पड़ा की वह नंगे है – और यहाँ पर हजरत आदम की बात कही जा रही है – आदम पत्नी की नहीं- जबकि इब्लीस ने फल या दरख्त खिलाया था आदम पत्नी को आदम को नहीं आदम ने खाया अपने पत्नी के कहने पर या खिलाने पर | जब आदम को पता लगा की वह निर्वस्त्र हैं तो भागने लगा, और उनकी बाल एक पेड़ में उलझ गया लिखा है, हजरत आदम ने पेड़ से कहा ऐ दरख़्त मुझे छोड़ दे – दरख़्त ने ज़वाब दिया असम्भव नामुमकिन है – क्या किसी दरख़्त का आदम जैसे मानव से बात करना सम्भव है ? उसी वक्त अल्लाह ताला की तरफ से आवाज़ आई के ऐ आदम मुझसे भाग रहा है ? आदम ने कहा ऐ अल्लाह शर्मिंदगी है शर्मसार हूँ | इबने अब्बास जो कुरान का प्रथम भाष्यकार है उन्हों ने फरमाया दरख़्त का फल खा लिया और छुपाने की चीज जाहिर हो गई तो जन्नत में लगे पड़ के पत्ते से छुपाने एक एक को एक एक कोने में चिपकाने लगे –
हज़रत आदम मारे गैरत {शर्म व लज्जा} के मारे इधर उधर भागने लगे – उसी समय एक पेड़ से उनके सरके बाल उलझ गया – अब अल्लाह को मालूम पड़ गया और अल्लाह नेआवाज दी, ऐ आदम मुझसे भागता है ? हजरत आदम ने काहा नहीं ऐ अल्लाह मगर शर्माता हूँ – जनाब बारीत्यला ने फरमाया ऐ आदम जो कुछ मैंने तुझे दिया था क्या वह पर्याप्त नहीं था – हज़रत आदम ने काहा ऐ अल्लाह आप ने जो दिया था वह तो काफी था – लेकिन मुझे यह इल्म नहीं था के कोई तेरा नाम लेकर तेरी कसम खाकर झूठ कहेगा – अल्लाह ने फरमाया अब तो मेरी नाफ़रमानी का खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा और तकलीफें उठानी होगी – चुनान्चे जन्नत से दोनों को उतार दिया, आदम पति पत्नी को – सवाल तो यह भी होना चाहिए की

आदम को नंगेपण का एहसास हुवा और शर्म के मारा भागने लगा – किन्तु यहाँ आदम पत्नी के बारे में कुछ भी नहीं लिखा और ना कहा या बताया इन भाष्य कारों ने – अब इस कुशादगी {आभाव} के बाद यह तंगी आभाव बहुत गिरां {भारी,और महंगा} गुजरी, खाने पीने को तरस गये, फिर उन्हें लोहे की सनयत {कारीगरी}सिखाई गई खेती का काम बताया गया –आप ने जमीन साफ़ की दाने बोये वह उगे बढे बालें निकलीं दाने पके फिर तोड़ी गये फिर पिसे गये, आँटा गुंधा फिर रोटी तैयार हुयी फिर खाए – कैसे कैसे सवालों के घेरे में है यहाँ यह देखें की जितने सहज भाव से लिखा है क्या यह सत्य होना सम्भव है ?
यह सब कुछ आदम के लिए बताया गया आदम पत्नी की चर्चा यहाँ कहीं भी नहीं है फल या दरख़्त के खाने से लेकर अब तक जितना जो कुछ भी बताया गया लिखागया आदम पत्नी की बात ही नहीं की गई- वह कहाँ थीं जब आदम भाग रहे थे वह भी उनके साथ भाग रही थीं या नहीं ? जब आदम का बाल उलझ गया तब वह कहाँ थीं इसको लिखना भुल गये लगता है लेखक | चलें आगे अल्लाह को फल या दरख़्त खाने का पता कब लगा, जब आदम को एहसास हुवा की वह नंगे हैं और भागने लगे तब – यहाँ अल्लाह ने आवाज लगाई और पूछा की मैंने जो दिया था उसमें कुछ कमी थी क्या जो कुछ, और खाने की जरूतर पड़ी ? अब सवाल यह पैदा होता है की अल्लाह हर जगह नहीं हैं, कारण आदम के फल या दरख़्त के खाते समय अल्लाह कहाँ थे ? पहली बात, और दूसरी बात यह भी की अल्लाह को पहले से पता था क्या की आदम को मना करने पर भी उसी फल या दरख़्त को खायेगा जिसे मैं मना कर रहा हूँ ? और यह शैतान ही उसे खिलायेगा ?
अब आदम को अल्लाह ने दोषी ठहरा दिया और कहा जाव जन्नत से निकलो और मुसीबत उठाव – कष्ट झेलो आदि – आदम फल खाने के लिए दोषी जरुर है की अल्लाह ने मना किया उसके बाद भी उसने खाया – और शैतान के बहकाने या वरगलाने पर खाया -किन्तु प्रशन तो यह भी है की शैतान किसी को बहका सके, वरगला सके इस के लिए उसे वरदान किसने दी ? तो क्या अल्लाह का कोई दोष नहीं है ? आदम को अल्लाह ने कहा शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है –उसके बहकावे में मत आना – और इधर शैतान को बहकाने के लिए भी वरदान अल्लाह का ही दिया हुवा है – तो अल्लाह की दया किसपर हुई आदम पर अथवा शैतान पर ?

अब आदम पति पत्नी को दोनों को निकाल दिया जन्नत से और आदम को जब निकाल दिया तो आदम पति पत्नी खाने पीने के लिए भूक से परेशांन हो गये – या खाने पीने को तरस गये यही लिहा है | किन्तु यही घटना कससुल अम्बिया {नबियों का किस्से में} दोनों को अलग अलग जहग गिरत्य गया लिखा है – यहाँ अल्लाह ने हजरत आदम को लोहे का काम सिखाया लिखा है – सवाल है की अभी दुनिया बनी हि नहीं थी तो लोहा अल्लाह को कहाँ से मिल गया लोहा बनी कहाँ थी ? फिर अल्लाह पहले से ही लोहार है लगता है, और अपने चेले को लोहा का काम सिखाया तो अल्लाह शारीर धारी है अथवा नहीं ? इबने कसीर पेज न० 262 में यही लिखा है –

आगे बताया अल्लाह ने आदम को खेती करना सिखाया खेती करने के लिए क्या क्या उपकरण चाहिए वह सब कहाँ से आया ? किसने बनाई उनसभी सामानों को – आगे लिखा है जमींन साफ़ की दाना डाले, दाना कहाँ से आया, वह उगे और बड़ा हुवा उसमें बालें निकलीं और दाने पके, और तोड़े गये फिर पिसे गये किस चीज से पिसे चक्की कहाँ से आया – लिखने वाले ने लिखा और इसी किस्से को सच मानने वालों नें आज तक यह नहीं पूछा की उस दाने को बोने और उसके उगने में कितने दिन लगे ? जब वह पक गया उसे निकालें और गेहूं पिसा गया – अल्लाह को अथवा अल्लाह के बन्दे आज तक यह नहीं पूछा किसी ने, की गेहूं किस में पिसे गये चक्की कहाँ मिली थी आदम को गेंहूँ पिसने के लिए ? फिर आँटा बनी उसे गुंधे अब रोटी बनाने के लिए आग चाहिए बर्तन चाहिए नून चाहिए तवा चाहिए पानी चाहिए चूल्हा चाहिए यह सभी उपकरण आदम को कहाँ से मिलगया ? यह कुरानी किस्सा किस प्रकार अवैज्ञानिक हैं देखते जाएँ पढ़े लिए लोग | इनके पास एक भी सवालों का जवाब इन कुरान वालों के पास नहीं है और ना यह सवालों का जवाब दे सकते हैं दुनिया के ख़तम होने तक |

खेती की गेहूं उगाया उसे पिसा गया उसकी आँटा बनी तब रोटी पकी फिर खाया गया इनसब में समय कितना लगा इसकी भी कोई चर्चा कहीं नहीं – क्या आदम पति पत्नी इतने दिन तह भूखे रहें कुरान के भाष्य कार ने अपनी दिमाग कहाँ और कैसी लगाई है ? एक एक सवालों के घेरे में हैं यह कलामुल्लाह और इसी कुरान को कलामुल्लाह कहने वाले लोग अल्लाह भी अपने सवालों में उलझ गये एक सवाल का जवाब अल्लाह के पास नहीं है और ना अल्लह के बन्दों के पास है तर्क के कसौटी पर कुरान और बाइबिल कोई भी खरा उतरने वाला नहीं है | इस विज्ञान के युग में यह बिन अकल वाली बातों को कैसे सत्य माना जाय ?

और देखें = जन्नत की जो कपडे थे आदम के नाफ़रमानी करने पर वह कपडे उतर गये- या उतार लिए गये – तीन पत्तों से उन्हों ने अपना आगा पीछा छुपाते फिरते थे रहे- उसी वक्त अल्लाहताला ने कहा इस दरख़्त से मैंने तुम्हें खाने के लिए मना नही किया था फिर तुमने इसे क्यों खाया ? हजरत आदम ने कहा यह हववा ने मुझे प्रेरित किया,अल्लाह ने कहा इनकी सजा यह है के हमल के हालात में भी यह तकलीफ में रहे गी बच्चा होने के वक्त भी तकलीफ उठाये गी, यह सुनते ही हजरत हववा ने रोना शुरू किया
अब हुकुम हुवा के यहीं तुझपर और तेरे औलाद पर लिख दिया गया –

पहले बताया गया की अल्लाह ने सबसे पहले कलम बनाई जब आदम को भी बनाया नहीं गया था और कलम से बोला लोगों के किस्मत लिखो | अब यहाँ आदम और हववा को कहा जा रहा है तुम्हारे औलाद पर भी यही तकलीफ उठाना लिख दिया गया | यह दोनों बातें कैसा संभव हो रहा है ? हजरत आदम ने जनाब बारीत्यला से यरज़ की और अल्लाह ने उन्हें दुआ सिखाई उन्हों ने दुआ की जो कुबूल हो गई और गलती माफ़ कर दी गई | अल्लाह ने हव्वा की गलती की सजा यह बताया की हमल में और बच्चा जनने में तकलीफ या कष्ट भुगतना पड़ेगा – पर आदम की कोई भुगतने की बात नहीं कही और ना आदम को भुगतना पड़ेगा कुछ भी नहीं कहा – फिर यहाँ तफसीर कार ने यह तो लिखा की आदम को जब एहसास हुवा की वह नंगे हैं तो उन्हों ने जन्नती पेड़ के पत्ते से अपना शर्मगाक को छुपाया – पर लेखक ने यह नहीं लिखा की आदम पत्नी ने क्या किया उन्हें अपना शर्म गाह दिखा या नहीं अगर उन्हें भी यही एहसास हुवा नंगेपन का, तो अदमने तो पत्ते ढके थे, पर हववा ने किया किया यह नहीं लिखा |
महेन्द्र पाल आर्य =26/9/19=