कुरान की बातें सच क्यों और कैसे ?

कुरान की बातें सच क्यों और कैसे ?
नोट :- यह बात तो समझ में सब की आगई की अल्लाह रोजी देने वाला मलिक है –लेकिन यह बातें सही कैसे की वही खेती करता है ?अगर रोज़ी देने वाला भी है कोई इनसान हाथ पर हाथ धरे बैठ जाये तो उसकी रोजी अल्लाह कैसे दे देंगे ? मानव नाम की सार्थकता तो यही है के वह पुरुषार्थी बने, पुरुषार्थी बनने के लिए उसे कर्मशील बनना पड़ेगा उसके बगैर मानव जीवन सफल क्यों और कैसे हो सकता है |
अगर मानव के कर्म सब अल्लाह पर छोड़ें के अल्लाह ही खेती उगायेंगे तो यह क्योंकर संभव है, यह काम बंटा हुआ है कुछ काम मानव के जिम्मे में है, कुछ काम प्रकृति के जिम्मे में है, और कुछ काम ईश्वराधीन है | जैसे- फसल को बोने के लिए ज़मीन को तैयार करना यह काम मनावों के जिम्मे में है, इस काम को अगर अल्लाह अपने जिम्मे में ले तो यह सरासर अज्ञानता की बात है |
 
जो काम प्रकृति के जिम्मे में है उसे न मानव अंजाम दे सकता है न परमात्मा, जैसा अति वृष्टि, अनावृष्टि, दैवीय प्रकोप, ये सब प्रकृति द्वारा हुआ करता है | परमात्मा के जिम्मे में है सब पर नियंत्रण, इस प्रकार तीनों की जिम्मेदारी अलग अलग है | मानव अपनी जिम्मेदारी को न निभाए और प्रकृति पर या परमात्मा पर दोष दे ये बातें भी सही नहीं है |
ज़मीन में फसल उत्पन्न करने के लिए उसमें खाद पानी की व्यवस्था समय से उसकी देखभाल ये सब मानवों के जिम्में में है | मानव उसे अगर पूरा करने में कोताही करे फिर फसल का सही उत्पन्न होना संभव न हो सकेगा इस प्रकार काम बंटा हुआ है, लेकिन कुरान की इन आयातों में सभी कामों की ज़िम्मेदारी अल्लाह ने ले रखी है जो यह असंभव बातें हैं, भले ही अल्लाह ने कहने के लिए कहा होगा लेकिन मानव बुद्धिपरख होने के कारण अपने दिमाग से चिंतन और विचार कर सकता है | महेन्द्र पाल आर्य 29/7/21