कुरान की बात विज्ञान विरुद्ध ही नहीं सृष्टि नियम विरुद्ध भी है |

यह है अल्लाह की कलाम जो विज्ञान विरुद्ध है ||

यह सूरा 11 हूद आयात 6,7, का अर्थ :-जमीन पर चलने फिरने वाले जितने भी जानदार हैं सब की रोजियाँ अल्लाह ताला पर है –वही इनकी रहने सहने की जगह को जानता है और उनकी सोपें जाने की जगह को भी सब कुछ वाजेह {इस}किताब में मौजूद है – अल्लाह वही हैं जो छ: दिनमें आसमान व जमीं को पैदा किया और उसका अर्श पानी पर था के वह तुम्हें आजमायें के तुममें से अच्छे अमल वाला कौन है ? अगर तू उनसे कहे के तुम लोग मरने के बाद उठा खड़े किये जाव गे तो काफ़िर लोग जवाब देंगे के यह तो बिलकुल साफ़ साफ़ जादू है | इस्की तफसीर |

यह प्रमाण इबनेकसीर पेज 586,587,पारा12,सूरा 11 हुद आयात 6,7, का सन्दर्भ =हर मखलूक का हर प्राणी का रोजी देने वाला अल्लाह है –हर एक छोटी बड़ी खुश्की तरी की मखलूक का रोजी देने वाला एक अल्लाह ही है – वही इनके चलने फिरने वाले आने जाने और रहने सहने मरने जीने और माँ बाप की पेट की जगह को जानता है – इमाम इब्ने अबी हातिम ने इस आयात की तफसीर में मुफ़स्सेरीन कि बहुत सी बयान का जिक्र किये है – यह तमाम बातें अल्लाह के पास की वाजिह किताब में लिखी हुई हैं – जिसे अल्लाह ने कुरान में फरमाया है > वमामिन दबबातीं फिल अर्जे वला तयेरिय यतीरू बे जना हेइ हे इल्ला अमामन अमसा अमसा लकुम >- यानि जमीन पर चलने वाले जानवर और अपने परवर दिगार की तरफ तुम जमा किये जावगे और फरमान है > व इन्दाहू मफातेहुल गैबे < यानि जब गैब की कुंजियाँ उसी अल्लाह के पास है – उन्हें इस के सिवा कोई नहीं जानता -खुश्की और तरी की तमाम चीजों का उसे इल्म है – कोई दाना जमीन के अंधेरों में और कोई तर खुश चीज ऐसी नहीं जो इस किताब में न हो |

सम्पूर्ण विश्व की चर्चा = अल्लाह ताला बयाँन फरमाता है के उसे हर चीज पर कुदरत है ताकत है आसमान व जमीन को उसने छ: दिन में पैदा किया – उससे पहले उसका अर्श पानी के उपर था मसनद अहमद में है रसूल अल्लाह ने फरमाया ऐ बनू तमीम तुम खुश खबरी कुबूल करो – उन्हों ने कहा खुश खबरियां तो आपने सुनादीं – आप कुछ दिलवाईये- आपने फरमाया ऐ अहले यमन तुम कुबूल करो – उन्हों ने काहा हाँ हमें कुबूल है – मखलूक की इब्तिदा तो हमें सुनाएँ की किस तरह हुई ? आपने फरमाया सबसे पहले अल्लाह था –उसका अर्श पानी के ऊपर था उसने लौहे महफूज़ में हर चीज का तजकिरा लिखा –

रावि हदीस इमरान कहते हैं हुजुर ने इतना ही फरमाया था जो किसी ने आ कर खबर दी की तेरी ऊँटनी खुलवाकर भाग गई मैं उसे ढूंढने चला गया फिर मुझे नहीं मालूम की क्या बात हुई ? यह हदीस बुखारी मुस्लिम में भी है – एक रवायत में है के अल्लाह था और उसके पहले कुछ न था – एक रवायत में हैं उसके साथ कुछ न था –

उसका अर्श पानी पर था – उसने हर चीज का तजकिरा लिखा फिर आसमान व जमींन को पैदा किया –मुस्लिम की हदीस में है जमींन व आसमान की पैदाइश से पचास हज़ार साल पहले अल्लाह ताला ने मख्लुकात की तक़दीर लिखी – उसका अर्श पानी पर था – सहीह बुखारी में इस आयात की तफसीर के मौके पर एक कुदसी हदीस है के ऐ इंसान तू मेरी राह म्क्जें खर्च कर मैं तुझे दूंगा –

और फरमाया अल्लाहका हाथ भरा हुवा है – दिन रात का खर्च उसमें कोई कमी नहीं लाता – ख़याल तो करो के आसमान व जमीन की पैदाइश से अब तक कितना कुछ खर्च किया होगा लेकिन ताहम उसके दाहिने हाथ में जो था वह कम नहीं होता – उसका अर्श पानी पर था – उसके हाथ में मिजान पल्ला है – झुकता है और ऊँचा करता है – मसनद में है अबू जरींन लाकयत बिन यूमर बिन मुत्फिक अकिली ने हुजुर से सवाल किया के मखलूक की पैदा करने से पहले हमारा परवर दिगार कहाँ था ? आप ने फरमाया इमामे नीचे भी हवा और ऊपर में भी हवा- फिर अर्श को उसके बाद पैदा किया यह रवायत तिरमिजी किताब किताबुत्त्ताफसिर में भी है –सुनन इबने माजा में भी है |

इमाम तिरमिजी इसे हसन कहते हैं –मुजाहिद का कौल है के किसी चीज को पैदा करने से पहले अर्शे इलाही पानी पर था – कितादा कहते हैं अल्लाह ताला बताता है के आसमान व जमींन की पैदाइश से पहले इब्तिदा मखलूक किस तरह हुई –राबिय बिन अनस कहते हैं उसका अर्श पानी पर था जब आसमान व जमीन को पैदा किया तो उस पानी के दो हिस्से कर दिए आधा अर्श के नीचे यही बहार मस्जूद है – इब्ने अब्बास फरमाते हैं बे वजह बुलंदी के अर्श को अर्श कहा जाता है – सयद फरमाते हैं के अर्श सुर्ख याकुत का है – इशाक फरमाते हैं अल्लाह इसी तरह था –जिस तरह अपने नफस करीम का वस्फ़ किया – इस लिए की कुछ न तह पानी था उसपर अर्श था – अल्लाह जो चाहे कर गुजरने वाला है – इब्ने अब्बास से इस आयत के बारे में सवाल हुवा के पानीं किस चीज पर था ? आप ने फरमाया की हवा की पीठ पर |

नोट :- दुनिया वालों इस आयत में अल्लाह की दुनिया बनाने को जरुर देख लिया और पढ़ लिया होगा – किस प्रकार बिन सर पैर की बातें इस दुनिया के बनाने में किया है इस आयत की तफसीर में कोई भी बात बुद्धि परख नही है – मात्र इतना है की अल्लाह वे हैं, जो अपने मनमें चाहे सब कुछ कर सकता है – अब वे बातें किसी के दिमाग में सच मालूम पड़े या फिर झूठ कोई इसपर कुछ न कहे इस में जो लिखा गया है उसे मान लेना चाहिए | इतना बताया गया है की अल्लाह वह है जो हर एक छोटी बड़ी सुखी गीली सब के वह मालिक हैं जो चाहे सो करें |

दुनिया बनाने के सन्दर्भ में बताया गया है की अल्लाह ताला ने छ: दिन में दुनिया को पैदा किया | अब सवाल यह उठता है की अल्लाह ने छ: दिन की गिनती किस प्रकार से किया ? क्या यह आसमान और जमीन बनाने में अल्लाह को छ:दिन लगे, अल्लाह ने इसी कुरान में अनेक बार कहा ता है होजा, और एक बार होजा कह देने पर ही हो जाता है | तो क्या अल्लाह को छ:दिन लगे तो कितने बार कहा होजा ? एक बार या फिर एक ही बार कुन शब्द को कहने में छ: दिन लगे ? यह भी लिखा गया की धरती पर जितने भी प्राणी है उन सब के खाने पीने सोने जागने की जगह भी बना दिए – अल्लाह का आर्श पानी पर था – अब सवाल तो यह है की जमीन और आसमान को बनाया और अल्लाह का अर्श पानी पर था, तो वह पानी किसपर था ? फिर अल्लाह ने कहा वह तुम्हें आजमाना चाहते हैं की तुम में से अच्छा अमल कौन करता है ?

कहा गया की तुम्हारे मर जाने के बाद उठाकर खड़े किये जावगे, इसे तो काफ़िर जादू मानते हैं | अब मरने के बाद खड़े किये जावगे कहाँ यह नहीं बताया गया, की कहाँ खड़े किये जायेंगे कबर में या कबर से बाहर ? अगर खड़े किये जायेंगे तो वहां मुर्दों को खड़े करने के लिए कई लोग चाहिए ? वे एकेले एकेले कैसे खड़े हो जायेंगे ? और कबर में एक साथ कई लोगों का होना क्यों और कैसे संभव होगा ? और अगर मान लिया जाय कि कबर से बाहर निकाल कर खड़े किये जायेंगे तो भी कई लोगों की जरूरत पड़ेगी मुर्दा एकेले कबर से बाहर नहीं निकल सकते ? उन्हें निकालने के लिए भी कई लोगों की जरूरत होगी ? अल्लाह की यह कलाम जिसे लोग कुरान बता रहे हैं ईश्वरीय कलाम बताया जा रहा है, या अल्लाह की कलाम कहते हैं | इस किताब को कोई एक स्वस्थ दिमाग रखने वाला इसे पढ़कर बता सकता है –या मान सकता है की हैं, इसमें कुछ ज्ञान की बातें हैं जिस से मानव को कुछ ज्ञान मिले |

महेन्द्रपाल आर्य -9 11 20=