कुरान में पृथ्वी घुमती नहीं एक जगह थिर है ||

                                                  कुरान में पृथ्वी घुमती नहीं एक जगह थिर है ||
यह प्रमाण इबने कसीर पेज 509,पारा20,सूरा 27,अन नमल आयात  61,का सन्दर्भ = कायनात मुजाहिर अल्लाह ताला की सदाकत =जमीन को अल्लाह ताला ने ठहरी हुई और साकींन बनाया ताके दुनिया बा आराम अपनी जिन्दगी बसर कर सके और उस फैले हुए फर्श पर राहत पा सके – जैसी और आयत में है >
अल्लाहुल्लाजी जयाला लकुमुल अरज़ा करारा <अल्लाह तालाने जमीन को तुम्हारे लिए ठहरी हुई और साकींन बनाया और आसमान को छत बनाया –
उसके जमींन पर पानी के दरिया बहा दिए जो इधर उधर बहते रहते हैं और मुल्क मुल्क पहुँच कर जमीन को सराबोर करते हैं ताके जमीन से खेत बाग़ वगैरा उगें – उसने जमींन की मजबूती के लिए पहाड़ों की मेखें गाढ़ दिए ताके वह तुम्हें मुतजल लजल न कर सके, तुम्हें लेकर इधर उधर न लुडक सके ठहरी रहे |
 
नोट :- जो लोग कुरान में विज्ञानं बताते हैं उन्हें जरा गौर से इन आयातों की तफसीर को पढना चाहिए कारण इसमें जो बताया गया है विज्ञान के साथ उसका कोई मेल ही नहीं है | विज्ञान का कहना है जमींन घुमती है यानि पृथ्वी घुमती है कुरान का कहना है जमीन स्थिर रहती है साकींन यानि साइलेंट है |
इससे पढ़े लिखे लोग ही विचार करें की बात किनकी सही है सच है कुरान की अथवा विज्ञान की | सबने माना है की धरती घुमती है और कुरान दूनियादारी से अलग बताता है की धरती एक जगह स्थिर है |
इस्लाम में कई वैज्ञानिक हुए हैं किसी ने भी इस विषय को छूकर नहीं देखा और किसीने कुरान की मान्यता को गलत कहने का साहस भी नहीं किया | सबने इस विषय पर मौन साध लिया |
आज इस विज्ञान के युगमें जहां लोग चाँद में सफ़र कर रहे हैं यहाँ तक की चाँद में जमींन खरीदी जा रही है, जिस चन्द्रमा में लोग आज बसने जा रहे हैं इस युगमें कुरान की बातें सच मानना क्यों और कैसे सम्भव है ? इसका समाधान तो कुरान कर्ता नहीं दे सकते, तो कमसे कम कुरान को कला मुल्लाह कहने और मानने वालों को तो देना ही पड़ेगा | महेन्द्र पाल आर्य =30/7/21