क्या कुरान की आयतें सत्य पर खरा उतरती हैं ?

कुरान की आयातें सत्य पर खरा उतरती है ?
 
काया किसी पत्थर पर डंडा मारने से स्रोत निकलजाना सम्भव है ? और वह भी 12 फौवारा एक साथ | क्या यह मानने योग्य बातें हैं, आज के इस विज्ञान के युगमें ? देखें कुरान में अल्लाह ने क्या फ़रमाया |
وَإِذِ اسْتَسْقَىٰ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ فَقُلْنَا اضْرِب بِّعَصَاكَ الْحَجَرَ ۖ فَانفَجَرَتْ مِنْهُ اثْنَتَا عَشْرَةَ عَيْنًا ۖ قَدْ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٍ مَّشْرَبَهُمْ ۖ كُلُوا وَاشْرَبُوا مِن رِّزْقِ اللَّهِ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ [٢:٦٠]
और (वह वक्त भी याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम के लिए पानी माँगा तो हमने कहा (ऐ मूसा) अपनी लाठी पत्थर पर मारो (लाठी मारते ही) उसमें से बारह चश्में फूट निकले और सब लोगों ने अपना-अपना घाट बखूबी जान लिया और हमने आम इजाज़त दे दी कि खुदा की दी हुईरोज़ी से खाओ पियो और मुल्क में फसाद न करते फिरो | सूरा बकर 2 /60
 
नोट:- जिस कुरान को लोग कला मुल्ला कहते हैं, उसी कुअरण का उपदेश क्या है अथवा उसमें बयान क्या है उस पर मानव कहलाने वालों को चिंतन और मनन करनी चाहिए | कारण हम मानव जो ठहरे, मानव उसी का ही नाम है जो दिमाग से सोचे और विचार पूर्वक उसे निरक्षण करे | यहाँ अल्लाह ने फ़रमाया, वह दिन भी यद् करो जब मूसा {एक पैगम्बर} ने अपने कौम के लिए पानी माँगा,{अल्लाह से पानी माँगा} तो हम ने अर्थात अल्लाह ने क्या कहा मूसा से, की अपनी लाठी पत्थर पर मारो, और लाठी मरते ही उसमें से बार {12} चश्मा {फौवारा} {स्रोत}निकले और सब लोगों ने खूब पानी पिया | और अल्लाह ने फ़रमाया हमने यह इजाजत दे दी की खुदा की दी हुई रोजी से खाव पियो, और मुल्क में फसाद{झगड़ालड़ाई} न करते फिरो |
विचारणीय बात यह है की, क्या जहाँ पानी न हो और,कोई इन्सान न दिखाई दे तो पानी किससे मांगे ? अगर यह मान लिया जाए की अल्लाह से फरयाद {प्रार्थना }की तो क्या यह कहना अल्लाह का की पत्थर पर लाठी मारो, और लाठी में मरने से एक दो नहीं अपितु 12 स्रोत निकल गये ? आज इस विज्ञानं के युगमें यह बातें सत्य मानने लायेक है ? क्या यह बातें सत्य है जो कुरान में कही गई | जब कुरान अल्लाह का दिया ज्ञान मानव मात्र के लिए हैं तो यहाँ एक व्यक्ति और उसके कुछ साथी संगियों की बाते हो रही हों तो मानव मात्र के लिए यह ज्ञान क्यों और किस लिए ? दूसरी बात है की अल्लाह की दी हुई इस उपदेश से मानव समाज को क्या लाभ मिल रहा हैं ? अथवा मानव समाज का क्या कल्याण हो रहा है इस पर मानव कहलाने वाले विचार तो करही सकते हैं ?
महेन्द्रपाल आर्य =27 /9 /18 =