क्या बाइबिल का ईश्वरीय ज्ञान होना सम्भव है ?

दुनिया के लोग ईसाईयों को बुद्धिमान मानते हैं कैसे ?
धरती पर आज सब से ज्यादा अकलमंद मानते हैं, ईसाईयों को, और जो ईसाई मानते हैं बाईबिल को, जिसे यह अपना धर्मग्रन्थ मानते हैं ईश्वरीय ज्ञान मानते हैं ईसाई |
 
आइये हम और आप भी थोडा देखें और समझें की सही में जिस बाईबिल को ईसाई लोग धर्मग्रन्थ मानते हैं, और अपने को अकलमंद मानते, समझते हैं, क्या उस बाईबिल में कुछ अकलमन्दी वाली बातें हैं ?
 
अर्थात हमें यह देखना और समझना है की सही में बाईबिल में कुछ बुद्धिपरख बातें है, क्या तर्क के कसौटी पर यह बाईबिल का खरा उतरना संभव है ?
 
अथवा बुद्धि विरुद्ध बातें भी है बाईबिल में, इसी को उजागर करना और दुनिया में मानव कहलाने वालों तक पहुंचाना है, की सही में यह धर्मग्रन्थ है या फिर कोई बुद्धिपूर्ण बातें भी हैं जिससे मानव समाज का कल्याण या उद्धार हो सके |
 
यह तो दुनिया के लोग जानते हैं, की धरती पर जितने भी मत पंथ हैं, उन्होंने अपने अपने हिसाब से सबने अपना धर्म ग्रन्थ माना हैं |
 
और सबकेधर्म ग्रन्थ अलग अलग ही हैं, और सबने इन ग्रंथों को ईश्वरीय माना है | यानि सबने अपने ग्रंथों को ईश्वर प्रदत्य माना हैं, और आश्चर्य की बात यह है की सबने ईश्वर को तो एक ही माना, परन्तु ईश्वरीय ग्रन्थ अनेक माना है |
 
जैसे,इस्लाम के मानने वाले कुरान को धर्मग्रन्थ मानते हैं, ईसाई लोग बाईबिल को अपना धर्मग्रन्थ मानते हैं,और भी जितने मत पंथ वाले हैं सब ने अपना-अपना धर्मग्रन्थ,अलग अलग, माना है, पुराणों को भी धर्म ग्रन्थ मानते हैं |
 
त्रिपिटक,जिन्दाबिस्ता,गुरुग्रंथ,बिज्जक आदि नाम से मानव समाज में प्रचारित और प्रसारित है | अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है की जब सबने ईश्वर को एक माना है, तो उस ईश्वर का दिया ग्रन्थ या उपदेश मानव मात्र का एक होना चाहिए, अथवा अलग अलग ?
 
अर्थात सब ने मिलकर ईश्वर को ही सवालों के घेरे में डाल दिया | किसीने यह समझने का प्रयास नही किया की जब परमात्मा एक है उसका उपदेश भी एक ही होना चाहिए, मानव मात्र के लिए |
 
परमात्मा का उपदेश अलग-अलग, अथवा बदल बदल कर नही होना चाहिए, कारण मानव समाज में ईश्वरीय ज्ञान को लेकर किसी भी प्रकार मतभेद पैदा न हो, मानव समाज में, विवाद न हो इसका ध्यान किसीने भी नही रखा, यह जितने भी मत और पंथ कहलाने वाले है |
 
यही कारण है की इनके जितने भी ग्रन्थ हैं एक दुसरे के साथ मेल नही खाते | यहाँ तक के ईसाईयों में दो ग्रन्थ है पुराना नियम, और नया नियम के नाम से |
 
तथा कैथलिक, और प्रोटेसटन के नाम से, इन दोनों में मत भेद है, मैंने उसी का उजागर करना वर्तमान समय में युक्ति युक्त समझा, और दुनिया वालों के सामने रख कर इसपर निर्णय लेना और तर्क के कसौटी पर खरा उतर रहा है अथवा नही, उसीका पड़ताल करना और सत्य क्या है, व असत्य क्या है उसे जानना औरों को जानकारी देना ही अपना कर्तव्य समझ कर लिख रहा हूँ |
 
की यह बाईबिल में कुछ अक्ल व {बुद्धिंअनुसार} बातें हैं अथवा नही उसपर दुनिया के लोग भी सोचने और समझने का प्रयास करें |
 
मै बाईबिल के पुराना नियम से लिख रहा हूँ जो उत्पत्ति के नाम से है | इसमें सृष्टि का आरम्भ क्या लिखा वो देखें |
 
(1)आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की |
(2) पृथ्वी बेडौल और वीरान थी,और अथाह जल की सतह पर अँधियारा था, और परमेश्वर का आत्मा जल की सतह पर मंडराता था |
(3) तब परमेश्वर ने कहा उजियाला हो और उजियाला हो गया |
(4) परमेश्वर ने देखा की उजियाला अच्छा है, और परमेश्वर ने उजियाले को अँधेरे से अलग किया |
(5) और परमेश्वर ने उजियाले को दिन तथा अंधियारे को रात कहा | तब संध्या हुई, फिर सवेरा हुआ | इस प्रकार पहला दिन हो गया |
 
जबकि इस पर मै कई बार अपना विचार लोगों को दे चूका हूँ और अपनी पुस्तक में भी लिखा हूँ | अब इस बाईबिल के जानने और मानने वालो से मेरा प्रश्न है विशेषकर, अपने को इसाई कहलाने वाले और मुझे इसाई बनने का दावत देने वाले, और यीशु के शरण में मानव समाज को लेजाने का निमंत्रण देने वालों से मेरा सीधा प्रशन है |
 
जो लोग मुझे भी पचास हज़ार अमेरिकन डॉलर देने का प्रस्ताव रखा है, जिसकी रेकॉर्डिं youtube में भी आप लोग सुन चुकते है |
 
मै आज विशेषकर उन्ही लोगों से जानकारी लेना चाहूँगा की बाईबिल की उत्पत्ति विषय को जिसका एक ही दिन कैसे बना उसे लिखा हूँ | दुनिया वालों के सामने भी इसे उजागर करना चाहता हूँ की इस बाईबिल रूपी धर्मग्रन्थ में यहोवा के एक दिन बनाने में ही अकल का दिवाला ही निकाल दिया, अथवा बुद्धि पर ताला डलवा दिया, अथवा यूँ कहिऐ की मानव कहलाने वालों से अकल ही छीन लिया हो |
 
कारण हम मानव कहलाते है बुद्धिमान होने के कारण अथवा, बुद्धि परख होने के कारण, किन्तु इस बाईबिल के अथवा जिन्हें लोगों ने परमेश्वर कहा है उनके उपदेशों में कोई बुद्धि परख बातें है क्या ?
 
जैसा की आप लोगों ने ऊपर देखा कि बाईबिल के परमेश्वर ने एक दिन को किस प्रकार बनाया | जो बाईबिल में लिखा परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की, अब प्रशन होगा जब आकाश और पृथ्वी की सृष्टि नही हुई थी,तो बाइबिल के परमेश्वर कहाँ थे ?
 
जब पृथ्वी बेडौल और वीरान थी और अथाह जल की सतह पर अँधियारा था, और परमेश्वर का आत्मा जल के सतह पर मंडरा रहा था उस मंडराती हुई आत्मा के लिए आकाश और पृथ्वी तथा सृष्टि का बनाना क्यों और कैसे संभव हुआ पहली बात |
 
दुसरी बात मेरी यह होगी की यह बातें जिस बाईबिल में लिखी गई, पर उसने यह नही लिखा की इन् सब दृश्य का देखने वाला कौन था ? और बिना देखे बाईबिल में लिखना यह कौन से बुद्धि परख मानव का काम है ?
 
बाइबल के इस एक दिन के बनाने में ही बाईबिल रूपी परमेश्वर ने बुद्धि का ही दम तोड़ दिया |
 
कारण बाईबिल में दर्शाये गये इन बातों को बुद्धि या तर्क के कसौटी पर खरा उतरना संभव हो रहा है ?
मै मानव समाज से इन्ही बातों को पूछना चाहता हूँ, जिस बाईबिल के मानने वालों को लोग बुद्धिमान कह रहें है या मानते है, क्या सही अर्थों में इसमें कोई बुद्धि पूर्ण बातें है ?
 
मैंने इस लेख में बाईबिल में दर्शाय गये एक दिन बनाने की चर्चा की है | इसमें कौनसी बुद्धिमानी तथा अकलमन्दी की बातें है | हमारे पाठकगण इस पर चिन्तन और विचार करें तथा इन बाईबिल के मानने वालों से पूछें जिस बाईबिल के परमेश्वर ने अँधेरे को उजाले से दूर किया |
 
क्या यह सत्य है, या उजाले से अँधेरे को दूर करना पड़ता होगा कभी, कारण उजाला होने पर अन्धेरा अपने आप ही दूर होजाता है |
 
इतनी सी बातों की जानकारी जब बाईबिल के परमेश्वर को नही, फिर उस बाईबिल के मानने वाले अपने को बुद्धिमान क्यों और कैसे मानते है ?
 
बाईबिल के मानने वालों से विशेषकर सौरव श्रेष्ठ और अन्य सभी मसीही कहलाने वालों से प्रशन है बाईबिल में दर्शाये गये एक दिन को बनाने में जो सवाल मैंने उठाया है | अगर हो सके तो उसका समाधान दें वर्ना वेद में वर्णित सृष्टि विज्ञान को स्वीकारें | youtube.com/channel/ mahenderpalarya को खोलकर the creation of science (सृष्टि विज्ञान ) परमेरे दिए गये विचार को सुनलें और सत्य को स्वीकार करें कारण यही मानवता है | पहले मानव बनें बाद में इसाई बन जाना |
महेन्द्र पाल आर्य 29/12/15 को लिखा था, आज 25 /7 /20 को याद दिलाया |