खुदा अपने लिए देवदासी भी स्वीकारता है |

|| खुदा अपने लिए देवदासी भी स्वीकारता है ||
हिन्दुओं में एक गलत प्रथा चली थी देवदासी प्रथा के नाम से, इस पर बहुत लोगों ने आन्दोलन भी क्या, यह प्रथा दक्षिण की एक मन्दिर का है | सुनने में आता है की लोग अपने बेटी को अथवा किसी महिला को मंदिर के नाम कर देते थे और वह वहां जीवन व्यतीत करते थे, मन्दिर के पुजारी अथवा मंदिर का कोई और उसे अपने दासी बनाकर रखते थे यह प्रथा काफी समय तक चलती रही, अब समाप्त हो गया होगा | जब की यह प्रथा हिन्दुओं का नहीं है | यह बाइबिल और कुरान का है, इसे पढ़ें प्रमाण इसी लेख में है |
शबाना आज़मी, इसपर वाटर फिल्म बनाना चाहती थीं, जो जावेद अख्तर की पत्नी है फिल्म तारीका हैं | जिस फिल्म को बाज़ार में चलने नहीं दिया गया था | इस फिल्म को बनाने के लिए शबाना आज़मी ने अपना बाल मुडवा लिया था | जो की इस्लाम में हराम है यह लोग इस्लाम के खिलाफ काम कर भी इस्लाम के दावेदार हैं |
कुरान में अल्लाह ने इस दासी प्रथा को स्वीकार किया है या करते हैं, देखें कुरान में अल्लाह ने क्या कहा है | कुरान में एक सूरा है अल इमरान के नाम से इसी सूरा में अल्लाह ने क्या किस्सा सुनाया है देखें | जब की अल्लाह का इन उपदेश से दुनिया वालों का कोई मतलब भी नहीं और ना कोई लेना देना ना कोई लाभ, क्या कहा है अल्लाह ने देखें नीचे |
إِذْ قَالَتِ امْرَأَتُ عِمْرَانَ رَبِّ إِنِّي نَذَرْتُ لَكَ مَا فِي بَطْنِي مُحَرَّرًا فَتَقَبَّلْ مِنِّي ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ [٣:٣٥]
ऐ रसूल वह वक्त याद करो जब इमरान की बीवी ने (ख़ुदा से) अर्ज़ की कि ऐ मेरे पालने वाले मेरे पेट में जो बच्चा है (उसको मैं दुनिया के काम से) आज़ाद करके तेरी नज़्र करती हूं तू मेरी तरफ़ से (ये नज़्र कुबूल फ़रमा तू बेशक बड़ा सुनने वाला और जानने वाला है |
فَلَمَّا وَضَعَتْهَا قَالَتْ رَبِّ إِنِّي وَضَعْتُهَا أُنثَىٰ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا وَضَعَتْ وَلَيْسَ الذَّكَرُ كَالْأُنثَىٰ ۖ وَإِنِّي سَمَّيْتُهَا مَرْيَمَ وَإِنِّي أُعِيذُهَا بِكَ وَذُرِّيَّتَهَا مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ [٣:٣٦]
फिर जब वह बेटी जन चुकी तो कहने लगी ऐ मेरे परवरदिगार मैं तो ये लड़की जनी हूँ और लड़का लड़की के ऐसा नहीं होता हालॉकि उसे कहने की ज़रूरत क्या थी जो वे जनी थी ख़ुदा उस से खूब वाक़िफ़ था और मैंने उसका नाम मरियम रखा है और मैं उसको और उसकी औलाद को शैतान मरदूद (के फ़रेब) से तेरी पनाह में देती हूं |
فَتَقَبَّلَهَا رَبُّهَا بِقَبُولٍ حَسَنٍ وَأَنبَتَهَا نَبَاتًا حَسَنًا وَكَفَّلَهَا زَكَرِيَّا ۖ كُلَّمَا دَخَلَ عَلَيْهَا زَكَرِيَّا الْمِحْرَابَ وَجَدَ عِندَهَا رِزْقًا ۖ قَالَ يَا مَرْيَمُ أَنَّىٰ لَكِ هَٰذَا ۖ قَالَتْ هُوَ مِنْ عِندِ اللَّهِ ۖ إِنَّ اللَّهَ يَرْزُقُ مَن يَشَاءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ [٣:٣٧]
तो उसके परवरदिगार ने मरियम को ख़ुशी से कुबूल फ़रमाया और उसकी नशो व नुमा अच्छी तरह की और ज़करिया को उनका कफ़ील बनाया जब किसी वक्त ज़क़रिया उनके पास इबादत के हुजरे में जाते तो मरियम के पास कुछ न कुछ खाने को मौजूद पाते तो पूंछते कि ऐ मरियम ये (खाना) तुम्हारे पास कहॉ से आया है तो मरियम ये कह देती थी कि यह खुदा के यहॉ से (आया) है बेशक ख़ुदा जिसको चाहता है बेहिसाब रोज़ी देता है |
هُنَالِكَ دَعَا زَكَرِيَّا رَبَّهُ ۖ قَالَ رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ [٣:٣٨]
(ये माजरा देखते ही) उसी वक्त ज़करिया ने अपने परवरदिगार से दुआ कि और अर्ज क़ी ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (भी) अपनी बारगाह से पाकीज़ा औलाद अता फ़रमा बेशक तू ही दुआ का सुनने वाला है
فَنَادَتْهُ الْمَلَائِكَةُ وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي فِي الْمِحْرَابِ أَنَّ اللَّهَ يُبَشِّرُكَ بِيَحْيَىٰ مُصَدِّقًا بِكَلِمَةٍ مِّنَ اللَّهِ وَسَيِّدًا وَحَصُورًا وَنَبِيًّا مِّنَ الصَّالِحِينَ [٣:٣٩]
अभी ज़करिया हुजरे में खड़े (ये) दुआ कर ही रहे थे कि फ़रिश्तों ने उनको आवाज़ दी कि ख़ुदा तुमको यहया (के पैदा होने) की खुशख़बरी देता है जो जो कलेमतुल्लाह (ईसा) की तस्दीक़ करेगा और (लोगों का) सरदार होगा और औरतों की तरफ़ रग़बत न करेगा और नेको कार नबी होगा
قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَامٌ وَقَدْ بَلَغَنِيَ الْكِبَرُ وَامْرَأَتِي عَاقِرٌ ۖ قَالَ كَذَٰلِكَ اللَّهُ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ [٣:٤٠]
ज़करिया ने अर्ज़ की परवरदिगार मुझे लड़का क्योंकर हो सकता है हालॉकि मेरा बुढ़ापा आ पहुंचा और (उसपर) मेरी बीवी बॉझ है (ख़ुदा ने) फ़रमाया इसी तरह ख़ुदा जो चाहता है करता है |

कुरान में किस प्रकार किस्सा सुनाया गया है, लिखा भी गया है,जरा आप लोग भी पढ़ें,कल ही जिसे मैंने विडिओ बनाकर दिया रात, यह किस्सा सूरा 3 का आयत 33 से 36 तक लिखा गया यहाँ, और विडिओ में भी सुनाया गया | इसके आगे और भी किस्सा है किस प्रकार की किस्सा सुनकर लोग आश्चर्य चकित होंगे, की अल्लाह की यह भी पता नहीं की बाँझ किसे कहा जाता है ? पहले भी मैंने लिखा था अब आगे भी देखेंगे की क्या क्या गुल खिलाया गया है ईश्वरीय ज्ञान कह कर ईश्वरीय ज्ञान मानना कैसा उचित हो रहा है इसी पर ही विचार करना है |
ईश्वरीय ज्ञान की कसौटी क्या है इसे भी नहीं जाना लोगों ने, और ना जानने का प्रयास किया | मानव समाज को अंधकार से निकालने के बजाय, और अन्धकार में धकेला है, जिसे ईश्वरीय ज्ञान कहते हैं | बाइबिल हो या कुरान, साथ में है पुराण यह सब किस्सा कहानी का खान जिसे किस्सा पढना और सुनना हो तो इन किताबों में पढ़ लें |
धन्यवाद के साथ महेन्द्रपाल आर्य =13 /2 /19