तर्क के सामने अल्लाह भी निरुत्तर

तर्क के सामने अल्लाह, भी निरुत्तर ?
इस्लामी धर्मग्रन्थ कुरान केअनुसार, अल्लाह ने उपदेश दिया की अगर कोई मुझे पाना चाहता है, तो उसे मेरे हबीब {दोस्त} हजरत मुहम्मद {स} को पाना पड़ेगा | वरना मेरा पाना उसके लिए सम्भव नहीं है | अर्थात कोई भी अगर अल्लाह को पाना चाहता है तो उसे पहले मुहम्मद को पाए बिना अल्लाह को नहीं पा सकता, कुरान में यही शर्त बताया गया है | देखें
قُلْ أَطِيعُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ ۖ فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْكَافِرِينَ [٣:٣٢]
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा और रसूल की फ़रमाबरदारी करो फिर अगर यह लोग उससे सरताबी करें तो (समझ लें कि) ख़ुदा काफ़िरों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता |सूरा 3 का 32
وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ [٣:١٣٢]
और ख़ुदा और रसूल की फ़रमाबरदारी करो ताकि तुम पर रहम किया जाए } सूरा 3 =132
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ وَأُولِي الْأَمْرِ مِنكُمْ ۖ فَإِن تَنَازَعْتُمْ فِي شَيْءٍ فَرُدُّوهُ إِلَى اللَّهِ وَالرَّسُولِ إِن كُنتُمْ تُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ وَأَحْسَنُ تَأْوِيلًا [٤:٥٩]
ऐ ईमानदारों ख़ुदा की इताअत करो और रसूल की और जो तुममें से साहेबाने हुकूमत हों उनकी इताअत करो और अगर तुम किसी बात में झगड़ा करो पस अगर तुम ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान रखते हो तो इस अम्र में ख़ुदा और रसूल की तरफ़ रूजू करो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है और अन्जाम की राह से बहुत अच्छा है | सूरा 4 =59
وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ تَعَالَوْا إِلَىٰ مَا أَنزَلَ اللَّهُ وَإِلَى الرَّسُولِ رَأَيْتَ الْمُنَافِقِينَ يَصُدُّونَ عَنكَ صُدُودًا [٤:٦١]
और जब उनसे कहा जाता है कि ख़ुदा ने जो किताब नाज़िल की है उसकी तरफ़ और रसूल की तरफ़ रूजू करो तो तुम मुनाफ़िक़ीन को देखते हो कि तुमसे किस तरह मुंह फेर लेते हैं | सूरा 4 =61
مَّن يُطِعِ الرَّسُولَ فَقَدْ أَطَاعَ اللَّهَ ۖ وَمَن تَوَلَّىٰ فَمَا أَرْسَلْنَاكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظًا [٤:٨٠]
जिसने रसूल की इताअत की तो उसने ख़ुदा की इताअत की और जिसने रूगरदानी की तो तुम कुछ ख्याल न करो (क्योंकि) हमने तुम को पासबान (मुक़र्रर) करके तो भेजा नहीं है | सूरा 4 =80

मात्र यहाँ तक ही नहीं अल्लाह ने अपने लिए जो अर्श बनवाया जो सातवां आसमान पर बयाता जाता है उस अर्श पर भी अल्लाह ने मुहम्मदुर रसूलुल्लाह { मुहम्मद अल्लाह का रसूल है } यह लिखवा या | अब कोई यह न पूछबैठे की किस से लिखवाया, किस चीज से लिखवाई गई आदि ?
यह वाक्य को लिखने के लिए अल्लाह अपने आप ही लिखा अथवा किसी और से लिखवाया गया इसका जवाब ना अल्लाह के पास है और ना अल्लाह के बन्दे किसी भी मुसलमान के पास | कारण लिखने के लिए तीन चीज होनी चाहिए, कागज,या तख्ती,कलम,और लिखने वाला | अर्थात =एक से लिखना, एक पर लिखना, एक से लिखवाना |
वैदिक मान्यतानुसार, इसे ईश्वर, प्रकृति, और जीव, बताया गया है इसके बिना किसी भी चीज का बनना सम्भव नहीं है | इसे इस्लाम जानता नहीं है और ना मानता है |
सबसे पहला पैगम्बर जिनका नाम हजरत आदम था, जब उन्हें फल के खाने से जन्नत से निकाल दिया अल्लाह ने | और बताया जाता है, की हजरत आदम ने अल्लाह से माफ़ी मांगी अपनी गलती का पश्चाताप 40 वर्ष तक रोते बिलखते रहे हजरत आदम पति, पत्नी |

अल्लाह ने उनकी दुवा कुबूल तब किया जब आदम ने देखा अल्लाह के अर्श पर यही शब्द लिखा था =मुहम्मदुर रसुलुलाल्लाह= अब आदम ने कहा ऐअल्लाह इस मुहम्मद के मान से मेरी गुनाह को बख्शदे | तब जा कर अल्लाह ने आदम की गुनाह को माफ़ किया |
यहाँ कई प्रशन खड़े हैं एक तो मैंने ऊपर दिया किसने लिखा यह शब्द ?

आदम ने अगर इस शब्द को पढ़ लिया, तो आदम को पढ़ना आया कहाँ से, और किसने सिखाई आदम को पढना ? लिखने के लिए उन अक्षरों को किसने बनाई, हुरूफ़ के बनाए बिना लिखना कैसे सम्भव हुवा ? अगर अक्षर बने तो कौनसी भाषा के अक्षर थे ?

अब हजरत मुहम्मद को अल्लाह ने उनके जन्मसे पहले नाम कैसे लिखवा दिया ? अगर मुहम्मद का नाम पहले लिखा गया तो अन्य पैगम्बरों के साथ अन्याय हुवा, इस पक्षपात का करने वाला अल्लाह ही ठहरे ? मुहम्मद को सबसे ज्यादा मर्यादा दिया अल्लाह ने,सबसे ज्यादा इल्म भी दिया बताया जाता है, पर जिब्राइल जब उनके पास आ कर कहा पढ़, जवाब मिला मैं पढ़ा नहीं यह सिलसिला 3 बार चली | जिब्रील ने मुहम्मद को कसकर दबाता, और उनसे पढ़वाया, क्या किसीके दबाने पर वह पढ़ना सिखता है, अथवा अक्षर ज्ञान करना करना पड़ता है ? या उसे पढ़ना सिखाने पर कोई पढता है ? फिर आदम के साथ यह दबोचने का तरीका के बिना आदम ने कैसा पढलिया ?

अब मुहम्मद को सबसे ज्यादा ज्ञान दिया बताया जाता है, जब वह गारे हिरा से घर लौटे, अपनी पत्नी खदीजा को सुनाया, तो खदीजा ने उन्हें ढेर सारा उपदेश सुनाई, और अपने चचेरे भाई वर्का के पास ले कर गई | अब यहाँ वर्का से मुहम्मद को फ़रिश्ता आने का कारण बताया उन्हें अल्लाह ने नबी, पैगम्बर, और रसूल बनाना चाहते हैं यह सभी बातें उन्हों ने बताई | तो यहाँ ज्ञान अल्लाह ने मोहम्मद को दिया या वर्का बिन नोफिल, बिन असद, बिन अब्दुल यज़ी, बिन कसा | को ज्यादा ज्ञान मिला था या हजरत मुहम्मद की ?
आज रात 9 बजे फेसबुक लाइफ में सुनिए यह सभी घटना को मेरे साथ जुड़कर,धन्यवाद के साथ =महेंद्र पाल आर्य = 28/11/18 =सुबह 8 =10 मिनट पर पोष्ट किया=