दारुल कज़ा क्या है इसे ध्यान से पढ़ें |

|| दारुल कज़ा क्या है ध्यान से पढ़े ||

मुसलमानों का व्यक्तिगत कानून भारत में किस लिए ?

मैंने अभी एक विडिओ इसपर बनाकर डाला है आप लोगों को सुनाया है |

पिछले दिन भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक, पर प्रतिवन्ध लगाने पर मुस्लिम संगठन वालों ने एक षडयंत्र रचा है | भारत सरकार के खिलाफ, जिसमें कुछ राजनितिक पार्टी भी हवा देने में आमादा हैं, सिर्फ बीजेपी, अथवा माननीय प्रधान मन्त्री मोदी जी का विरोध ही जिनका उद्देश्य है |

दारुल कज़ा जो इस्लामिक कानून को कहा जाता है, कानून का प्रयोग कहाँ होता है ? कोर्ट में, फिर मुस्लिम पर्सोनल ला बोर्ड किस लिए कहरहे हैं की यह कोर्ट नहीं है ? मुसलमानों का व्यक्तिगत कानून भारत में किस लिए ? अगर इन्हें मुसलमानी या इस्लामी कानून लागु करनी हो तो उसमें जितने भी नियम है सब को लागु कारना चाहिए | शरीयती कानून चाहिए तो सिर्फ निकाह और तलाक तक ही सीमित हैं शरीयती कानून ? की और भी कुछ नियम है, देखें कुरान में क्या कहा है ?

وَالسَّارِقُ وَالسَّارِقَةُ فَاقْطَعُوا أَيْدِيَهُمَا جَزَاءً بِمَا كَسَبَا نَكَالًا مِّنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ [٥:٣٨]

और चोर ख्वाह मर्द हो या औरत तुम उनके करतूत की सज़ा में उनका (दाहिना) हाथ काट डालो ये (उनकी सज़ा) ख़ुदा की तरफ़ से है और ख़ुदा (तो) बड़ा ज़बरदस्त हिकमत वाला है |

 

अल्लाह ने यहाँ फ़रमाया चोरी करे तो दाहिना हाथ काट डालो, सवाल यह है की यह आदेश कुरान में अल्लाह ने किसे दिया मुसलमानों को, अथवा गैर मुस्लिमों को ? जब कुरान मुसलमानों का है तो कुरान का आदेश किन के लिए है मुसलमानों के लिए अथवा गैर मुस्लिमों के लिए ?

 

फिर व्यभिचारियों के लिए अल्लाह ने क्या कहा देखें |

الزَّانِيَةُ وَالزَّانِي فَاجْلِدُوا كُلَّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا مِائَةَ جَلْدَةٍ ۖ وَلَا تَأْخُذْكُم بِهِمَا رَأْفَةٌ فِي دِينِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ تُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ ۖ وَلْيَشْهَدْ عَذَابَهُمَا طَائِفَةٌ مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ [٢٤:٢]

़ज़िना करने वाली औरत और ज़िना करने वाले मर्द इन दोनों में से हर एक को सौ (सौ) कोडे मारो और अगर तुम ख़ुदा और रोजे आख़िरत पर ईमान रखते हो तो हुक्मे खुदा के नाफिज़ करने में तुमको उनके बारे में किसी तरह की तरस का लिहाज़ न होने पाए और उन दोनों की सज़ा के वक्त मोमिन की एक जमाअत को मौजूद रहना चाहिए

الزَّانِي لَا يَنكِحُ إِلَّا زَانِيَةً أَوْ مُشْرِكَةً وَالزَّانِيَةُ لَا يَنكِحُهَا إِلَّا زَانٍ أَوْ مُشْرِكٌ ۚ وَحُرِّمَ ذَٰلِكَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ [٢٤:٣]

ज़िना करने वाला मर्द तो ज़िना करने वाली औरत या मुशरिका से निकाह करेगा और ज़िना करने वाली औरत भी बस ज़िना करने वाले ही मर्द या मुशरिक से निकाह करेगी और सच्चे ईमानदारों पर तो इस क़िस्म के ताल्लुक़ात हराम हैं |

नोट:- यहाँ अल्लाह ने जिना व्यभिचारियों के लिए कहा औरत हो या मर्द दोनों को 100 {सौ} कोड़ा {चाबुक, या छड़ी} मारो | अगर अल्लाह पर विश्वास रखते हो तो उनको यह सजा दिया जाना चाहिए, तो यह आदेश किन के लिए है मुसलमानों के लिए अथवा गैर मुस्लिमों के लिए ?

फिर मुस्लमान इसे मानना क्यों नहीं चाहते, सिर्फ निकाह और तलाक ही इस्लामी कानून है ?  अगर इस्लामी शरीयती कानून मानना हो तो जो जो कानून के दायरे में है उन सब को मानना चाहिए ? पहले इस्लाम वालों को इन नाचने गाने वलों पर प्रतिबन्ध लगाना पड़ेगा जो इस्लाम में बिलकुल हराम है | और जितने भी इस्लाम विरोधी कार्य है उनसब पर प्रतिबन्ध लगाना पड़ेगा ? क्या इस्लाम वाले राजी हैं ? भारत सरकार को चाहिए इसपर सख्ती से अमल करने का आदेश दें |

What is ‘Darul Qaza’ in Islamic law? Does it have constitutional sanctity in India?

Best Answer:  India is a secular state with a constitutional system where family laws are also protected. That way, the Islamic family laws are protected by the constitution though in its Directive priciples it expects the Union government to introduce a common civil code.

‘Darul Qaza’ in Islamic law is referred to the Islamic Courts. But ‘Darul Qaza’ has no authority or force to get their decisions implemented through any enforcing agency. Hence, ‘Darul Qaza’ can not be termed as either in conflict with or parallel to the Indian judicial system |

 

यह है दारुल कज़ा जो इस्लामी कानून है भारत सरकार हर मुसलमानों के लिए शरीयती सभी नियमों को मानने को मजबूर करें इन्हें, वरना यह मात्र अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए निकाह और तलाक को ही किस लिए मानना चाहते हैं ? मानना ही है तो सबको माने | भारत के सभी हिन्दू कहलाने वालों को इसपर चिंतन और विचार करना चाहिए | महेन्द्रपाल आर्य | 10 /7 /18 =

|| दारुल कज़ा क्या है ध्यान से पढ़े ||

मुसलमानों का व्यक्तिगत कानून भारत में किस लिए ?

मैंने अभी एक विडिओ इसपर बनाकर डाला है आप लोगों को सुनाया है |

पिछले दिन भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक, पर प्रतिवन्ध लगाने पर मुस्लिम संगठन वालों ने एक षडयंत्र रचा है | भारत सरकार के खिलाफ, जिसमें कुछ राजनितिक पार्टी भी हवा देने में आमादा हैं, सिर्फ बीजेपी, अथवा माननीय प्रधान मन्त्री मोदी जी का विरोध ही जिनका उद्देश्य है |

दारुल कज़ा जो इस्लामिक कानून को कहा जाता है, कानून का प्रयोग कहाँ होता है ? कोर्ट में, फिर मुस्लिम पर्सोनल ला बोर्ड किस लिए कहरहे हैं की यह कोर्ट नहीं है ? मुसलमानों का व्यक्तिगत कानून भारत में किस लिए ? अगर इन्हें मुसलमानी या इस्लामी कानून लागु करनी हो तो उसमें जितने भी नियम है सब को लागु कारना चाहिए | शरीयती कानून चाहिए तो सिर्फ निकाह और तलाक तक ही सीमित हैं शरीयती कानून ? की और भी कुछ नियम है, देखें कुरान में क्या कहा है ?

وَالسَّارِقُ وَالسَّارِقَةُ فَاقْطَعُوا أَيْدِيَهُمَا جَزَاءً بِمَا كَسَبَا نَكَالًا مِّنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ [٥:٣٨]

और चोर ख्वाह मर्द हो या औरत तुम उनके करतूत की सज़ा में उनका (दाहिना) हाथ काट डालो ये (उनकी सज़ा) ख़ुदा की तरफ़ से है और ख़ुदा (तो) बड़ा ज़बरदस्त हिकमत वाला है |

 

अल्लाह ने यहाँ फ़रमाया चोरी करे तो दाहिना हाथ काट डालो, सवाल यह है की यह आदेश कुरान में अल्लाह ने किसे दिया मुसलमानों को, अथवा गैर मुस्लिमों को ? जब कुरान मुसलमानों का है तो कुरान का आदेश किन के लिए है मुसलमानों के लिए अथवा गैर मुस्लिमों के लिए ?

 

फिर व्यभिचारियों के लिए अल्लाह ने क्या कहा देखें |

الزَّانِيَةُ وَالزَّانِي فَاجْلِدُوا كُلَّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا مِائَةَ جَلْدَةٍ ۖ وَلَا تَأْخُذْكُم بِهِمَا رَأْفَةٌ فِي دِينِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ تُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ ۖ وَلْيَشْهَدْ عَذَابَهُمَا طَائِفَةٌ مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ [٢٤:٢]

़ज़िना करने वाली औरत और ज़िना करने वाले मर्द इन दोनों में से हर एक को सौ (सौ) कोडे मारो और अगर तुम ख़ुदा और रोजे आख़िरत पर ईमान रखते हो तो हुक्मे खुदा के नाफिज़ करने में तुमको उनके बारे में किसी तरह की तरस का लिहाज़ न होने पाए और उन दोनों की सज़ा के वक्त मोमिन की एक जमाअत को मौजूद रहना चाहिए

الزَّانِي لَا يَنكِحُ إِلَّا زَانِيَةً أَوْ مُشْرِكَةً وَالزَّانِيَةُ لَا يَنكِحُهَا إِلَّا زَانٍ أَوْ مُشْرِكٌ ۚ وَحُرِّمَ ذَٰلِكَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ [٢٤:٣]

ज़िना करने वाला मर्द तो ज़िना करने वाली औरत या मुशरिका से निकाह करेगा और ज़िना करने वाली औरत भी बस ज़िना करने वाले ही मर्द या मुशरिक से निकाह करेगी और सच्चे ईमानदारों पर तो इस क़िस्म के ताल्लुक़ात हराम हैं |

नोट:- यहाँ अल्लाह ने जिना व्यभिचारियों के लिए कहा औरत हो या मर्द दोनों को 100 {सौ} कोड़ा {चाबुक, या छड़ी} मारो | अगर अल्लाह पर विश्वास रखते हो तो उनको यह सजा दिया जाना चाहिए, तो यह आदेश किन के लिए है मुसलमानों के लिए अथवा गैर मुस्लिमों के लिए ?

फिर मुस्लमान इसे मानना क्यों नहीं चाहते, सिर्फ निकाह और तलाक ही इस्लामी कानून है ?  अगर इस्लामी शरीयती कानून मानना हो तो जो जो कानून के दायरे में है उन सब को मानना चाहिए ? पहले इस्लाम वालों को इन नाचने गाने वलों पर प्रतिबन्ध लगाना पड़ेगा जो इस्लाम में बिलकुल हराम है | और जितने भी इस्लाम विरोधी कार्य है उनसब पर प्रतिबन्ध लगाना पड़ेगा ? क्या इस्लाम वाले राजी हैं ? भारत सरकार को चाहिए इसपर सख्ती से अमल करने का आदेश दें |

What is ‘Darul Qaza’ in Islamic law? Does it have constitutional sanctity in India?

Best Answer:  India is a secular state with a constitutional system where family laws are also protected. That way, the Islamic family laws are protected by the constitution though in its Directive priciples it expects the Union government to introduce a common civil code.

‘Darul Qaza’ in Islamic law is referred to the Islamic Courts. But ‘Darul Qaza’ has no authority or force to get their decisions implemented through any enforcing agency. Hence, ‘Darul Qaza’ can not be termed as either in conflict with or parallel to the Indian judicial system |

 

यह है दारुल कज़ा जो इस्लामी कानून है भारत सरकार हर मुसलमानों के लिए शरीयती सभी नियमों को मानने को मजबूर करें इन्हें, वरना यह मात्र अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए निकाह और तलाक को ही किस लिए मानना चाहते हैं ? मानना ही है तो सबको माने | भारत के सभी हिन्दू कहलाने वालों को इसपर चिंतन और विचार करना चाहिए | महेन्द्रपाल आर्य | 10 /7 /18 =