दुनिया वालों सुनें किस्सा कुरान का |

|| दुनिया के लोग सुनें किस्सा कुरान का ||
कुरान के अनुसार दुनिया बनाया अल्लाह ने, और मात्र छ: लोगों को नहीं संभाल सके और एक भाई से दुसरे भाई को मरवा दिया | दुनिया वालों जानते हैं क्यों एक भाई ने दुसरे भाई को किस लिए मारा ?
तो सुनिए अल्लाह की कलाम कुरान का किस्सा, घटना है सबसे पहला मानव या पैगम्बर अल्लाह या गॉड ने बनाया जिसका नाम आदम रखा | उसकी पत्नी को उसी के शारीर की हड्डी से बनाया, पति पत्नी ने एकबेटा एक बेटी जोड़ा जोड़ा पैदा किया | दूसरी बार भी यही हुवा,दोनों बेटे का नाम काबिल, व हाबिल बताया इस आयत में | दोनों बेटी का नाम नहीं बताया गया | इन दोनों भाइयों में झगड़ा हुवा, किस बात पर ? दोनों बहनों में एक सुंदर थी दोनों भाई उससे शादी करने की इच्छा जाहिर की, बाप ने कहा नहीं अदला बदली करो दुसरे नंबर वाली पहले नंबर की बेटी से करें | और पहले नम्बर वाले बेटे से शादी करे पर पलाला बेटा काबिल नहीं माना|
इसपर फैसला अल्लाह का आया को दोनों भाई अल्लाह के नाम नजर {मिन्नत} करो जिसकी भेंट स्वीकार हो उसकी बात मानी जाएगी | अब छोटे वाली की मिन्नत अल्लाह को पसंद आया स्वीकार हुवा | बड़े वाले ने छोटे को मार दिया, उसे मिटटी में दफ़नाने के लिए अल्लाह ने कव्वा भेजा उस कव्वे ने मिटटी को खोदा यह देखकर आदम पुत्र ने भाई को दफनाया | एक तरफ अल्लाह ने मानव को सब से ज्ञान वांण बताया, और कव्वे से मानव को ज्ञान दे रहे हैं | किस्सा लम्बा है और रोचक भी है कभी बताएँगे पूरी घटना, यह किस्सा जिस किताब में है उसी को लोग कलामुल्लाह कह रहे हैं हाय रे मानव कहलाने वालों और तेरी अकलमंदी पर तरस खाता हूँ जो इसे क्लामुल्लाह मानते और कहते हैं |

وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ ابْنَيْ آدَمَ بِالْحَقِّ إِذْ قَرَّبَا قُرْبَانًا فَتُقُبِّلَ مِنْ أَحَدِهِمَا وَلَمْ يُتَقَبَّلْ مِنَ الْآخَرِ قَالَ لَأَقْتُلَنَّكَ ۖ قَالَ إِنَّمَا يَتَقَبَّلُ اللَّهُ مِنَ الْمُتَّقِينَ [٥:٢٧]
(ऐ रसूल) तुम इन लोगों से आदम के दो बेटों (हाबील, क़ाबील) का सच्चा क़स्द बयान कर दो कि जब उन दोनों ने ख़ुदा की दरगाह में नियाज़ें चढ़ाई तो (उनमें से) एक (हाबील) की (नज़र तो) क़ुबूल हुई और दूसरे (क़ाबील) की नज़र न क़ुबूल हुई तो (मारे हसद के) हाबील से कहने लगा मैं तो तुझे ज़रूर मार डालूंगा उसने जवाब दिया कि (भाई इसमें अपना क्या बस है) ख़ुदा तो सिर्फ परहेज़गारों की नज़र कुबूल करता है
لَئِن بَسَطتَ إِلَيَّ يَدَكَ لِتَقْتُلَنِي مَا أَنَا بِبَاسِطٍ يَدِيَ إِلَيْكَ لِأَقْتُلَكَ ۖ إِنِّي أَخَافُ اللَّهَ رَبَّ الْعَالَمِينَ [٥:٢٨]
अगर तुम मेरे क़त्ल के इरादे से मेरी तरफ़ अपना हाथ बढ़ाओगे (तो ख़ैर बढ़ाओ) (मगर) मैं तो तुम्हारे क़त्ल के ख्याल से अपना हाथ बढ़ाने वाला नहीं (क्योंकि) मैं तो उस ख़ुदा से जो सारे जहॉन का पालने वाला है ज़रूर डरता हूं
إِنِّي أُرِيدُ أَن تَبُوءَ بِإِثْمِي وَإِثْمِكَ فَتَكُونَ مِنْ أَصْحَابِ النَّارِ ۚ وَذَٰلِكَ جَزَاءُ الظَّالِمِينَ [٥:٢٩]
मैं तो ज़रूर ये चाहता हूं कि मेरे गुनाह और तेरे गुनाह दोनों तेरे सर हो जॉए तो तू (अच्छा ख़ासा) जहन्नुमी बन जाए और ज़ालिमों की तो यही सज़ा है | यह है सूरा मायदा 27,28,29, आगे भी है |

आगेभी है फिर कभी = महेन्द्र पाल आर्य =19/5/19 =