देखें अल्लाह की कलाम को

देखें आल्लाह की कलाम को ?
दुनिया के लोग कुरान को कलामुल्लाह कहते हैं यानि अल्लाह की कही वाणी जिसे अल्लाह ने अपने प्यारे नबी हम्ज्रत मुहम्मद पर नाजिल की, या उतारी | यद्यपि ईश्वरीय ज्ञान में किसी भी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं होना चाहिए | किसी की वंशावली, किसी व्यक्ति विशेष की जीवनी या जीचन की घटनाएँ नहीं होनी चाहिए | व्यक्ति विशेष की नाम की चर्चा नहीं होनी चाहिए, किस्सा कहानी नहीं होनी चाहिए स्थान विशेष की चर्चा नहीं होनी चाहिए | किसी भी व्यक्ति के नाम का उल्लेख नहीं होनी चाहिए | सृष्टि नियम विरुद्ध कोई बात नहीं होनी चाहिए, विज्ञान विरुद्ध जिस में कोई बातें ना हो | यही सब ईश्वरीय ज्ञान की कसौटी है, ईश्वरीय ज्ञान मानव मात्र के लिए उपदेश होना चाहिए, सृष्टि के प्रारम्भ से होना चाहिए | ज्ञान बदल बदल कर देने से ईश्वर के ज्ञान पर दोष लगेगा, किसी को मिले किसी को ना मिले ईश्वर पर पक्ष पात का दोष लगेगा आदि |

यहाँ अल्लाह का दिया ज्ञान को देखें कोई महिला बदचलन है अथवा नहीं अल्लाह गवाही दे रहे हैं, की मरियम ईसा मसीह की मां एक सच्ची बन्दी थीं | जो कुँवारी में ही संतान ईसा को जन्म दिया था | مَّا الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ إِلَّا رَسُولٌ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ الرُّسُلُ وَأُمُّهُ صِدِّيقَةٌ ۖ كَانَا يَأْكُلَانِ الطَّعَامَ ۗ انظُرْ كَيْفَ نُبَيِّنُ لَهُمُ الْآيَاتِ ثُمَّ انظُرْ أَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ [٥:٧٥]
मरियम के बेटे मसीह तो बस एक रसूल हैं और उनके क़ब्ल (और भी) बहुतेरे रसूल गुज़र चुके हैं और उनकी मॉ भी (ख़ुदा की) एक सच्ची बन्दी थी (और आदमियों की तरह) ये दोनों (के दोनों भी) खाना खाते थे (ऐ रसूल) ग़ौर तो करो हम अपने एहकाम इनसे कैसा साफ़ साफ़ बयान करते हैं | सूरा 5 मायदा =आयत 75 इस प्रकार की आयतें कुरान में और भी कई है |
إِذْ قَالَتِ الْمَلَائِكَةُ يَا مَرْيَمُ إِنَّ اللَّهَ يُبَشِّرُكِ بِكَلِمَةٍ مِّنْهُ اسْمُهُ الْمَسِيحُ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ وَجِيهًا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَمِنَ الْمُقَرَّبِينَ [٣:٤٥]
(वह वाक़िया भी याद करो) जब फ़रिश्तों ने (मरियम) से कहा ऐ मरियम ख़ुदा तुमको सिर्फ़ अपने हुक्म से एक लड़के के पैदा होने की खुशख़बरी देता है जिसका नाम ईसा मसीह इब्ने मरियम होगा (और) दुनिया और आखेरत (दोनों) में बाइज्ज़त (आबरू) और ख़ुदा के मुक़र्रब बन्दों में होगा | सूरा 3 इमरान =आयत 45

यहाँ भी अल्लाह ने फरिश्तों के माध्यम से मरियम को खुश खबरी दी की तुम्हारा एक बच्चा होने की खबर अल्लाह ने भेजी है | ईसा मसीह इबने मरियम, बेटे का नाम पिता से जूडा होता है किन्तु अल्लाह ने मसीह इब्ने मरियम कहा | जिस का जन्म देने वाला कोई पिता है ही नहीं |
आलह इस पर मुहर लगा रहे हैं | जब की ईश्वर का ज्ञान एक महिला और उनके संतान के पवित्रता का क्यों और कैसे होना चाहिए ? ईश्वर पूरी दुनिया को लेकर है ना की किसी एक महिला और उनके बेटे को लेकर ? परमात्मा पर पक्षपात का दोष लगेगा | किन्तु कुरान भरा पड़ा है ईश्वरीय ज्ञान समग्र मानव मात्र के होने के बजाय एक महिला का सती होने का अथवा चरित्र वांण होने का उपदेश अल्लाह का है | दुनिया के लोग इसे सोच समाज कर निर्णय लें की ईश्वरीय ज्ञान में यह होना संभव है अथवा नहीं ? यह उचित है अथवा नहीं ?
महेन्द्रपाल आर्य =वैदिक प्रवक्ता =दिल्ली =21 =11 =17