देखें कुरान और बाइबिल की किस्से जो जिसे ईश्वरीय ज्ञान बताते हैं |

देखें कुरान और बाइबिल की किस्से को |
अल्लाह ने नुह के बेटे को भी डूबोदिया,न जाने यह किस्से वाली किताब ईश्वरीय ज्ञान कैसी ? यह प्रमाण इबने कसीर पेज 604,605 पारा 12 सूरा 11 आयात, 45,46,47, का सन्दर्भ = नुह अपने बेटे के लिए निजात की दुआ की, और अल्लाह का ज़वाब = याद रहे की यह दुआ हजरत नुह अलैहिस्सलाम की महज़ उस गरज से थी के आप को सही तौर पर अपने डूबे हुए लड़के का हाल मालूम हो जाये – कहते हैं के परवरदिगार यह भी जाहिर है के मेरा लड़का मेरे अहल में से था, और मेरा अहल को बचने का तेरा वादा था और यह भी नमूमकिन, के तेरा वादा गलत हो फिर यह मेरा बच्चा कुफ्फार के साथ कैसा गरक कर दिया गया, डुबो दिया गया ?
जवाब मिला के तेरे जिस अहल को निजात देने का मेरा वादा था उनमें तेरा बच्चा दाखिल न था मेरा यह वादा ईमानदारों को निजात के लिए था , मैं कह चूका था के, तेरे अहल को भी तो कश्ती में चढ़ा ले मगर जिसपर मेरी बात बढ़ चुकी है यह बे वजह अपने कुफर के उन्हीं में से था जो मेरे साबिक इल्म में कुफर करने वाले और डूबने वाले मुकरर हो चुके थे – यह भी याद रहे के जिन लोगों ने कहा है के यह आपके बीवी के अगले घर का लड़का था – यह दोनों कौल गलत हैं बहुत से बुजुर्गों ने साफ़ लफ़्ज़ों में इसे गलत कहा है, बल्कि इब्ने अब्बास और बहुत से सलफ़ से मनकुल है के किसी नबी की बीवी ने कभी जिनाकारी नहीं की | {किसी नबी की पत्नी व्यभिचारी नहीं थी}
पस यहाँ तेरे फारमान है के वह तेरी अहल में से नहीं यही मतलब है के निजात का मेरा वादा है यह उनमें से नहीं – यही बात सच है और यही कौल असली है – इसके सिवा और तरफ जाना महज़ गलती है और जाहिर खता है – अल्लाह ताला की गैरत उस बात को कुबुल नहीं कर सकती – के अपने किसी नबी के घर में जानिया औरत दे – ख्याल फरमाए के हजरत आयशा की निस्बत जिन्हों ने बुह्तान बाजी की थी उन पर अल्लाह ताला किस कदर अजाब दिया हुवा है ? इस लड़के के अहल में से निकल जाने की वजह खुद कुरान में बयांन फरमाया गया है के उसके अमल नेक न थे – अकर्मा फरमाते हैं के एक किरात हदीस में है के हजरत अस्मा बिन्तु याजिद फरमाती हैं मैंने रसूल अल्लाह सल्लल्ला हु अलैहे वसल्लम को पढ़ते सुना है – हजरत इब्ने अब्बास से सवाल हुवा के क्या मतलब हुवा ?
आप फरमाते हैं के इससे जीना नहीं बल्कि हसरत नुह की बीवी की खयान्त तो यह थी के लोगों से कहती थी यह मजनूंन है –और हजरत लुत की बीवी की खयानत यह थी महमान आप के यहाँ आते अपनी कौम की खबर करदेती – फिर आपने आयत पढ़ी हजरत सईद बिन खबिर से जब हजरत नुह के लड़के के बारे में सवाल हुवा तो आप ने फरमाया अल्लाह सच्चा है उसने उसे हजरत नुह का लड़का फर्मा दिया है – पस यक़ीनन वह हजरत नुक का लड़का ही था – देखो अल्लाह फरमाता है और यह भी याद रहे के दुसरे उलामा का कहना है की किसी नबी की बीवी ने कभी जिनाकारी नहीं की – ऐसा ही हजरत मुजाहिद से मर्वी है –और यही इबने ज़ुरैर का पसंदीदा बात है – और फिल वाकिया ठीक और सही बात भी यही है |
नोट :- हम मानव कहलाने वालों को यह देखने और पढने को मिला की आखिर कुरान क्या है जिसे दुनिया के लोग ईशग्रन्थ मानते और कहते हैं ? ईश ग्रन्थ का मतलब है ईश्वरीय किताब | सवाल तो पहले यही खड़ा होता है की क्या ईश्वर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में रहने वाले बसने वाले प्राणी मात्र का है अथवा किसी एक वर्ग विशेष के लिए है क्या यह ज्ञान ईश्वर का हो सकता है ?
ईश्वर पूरी दुनिया को लेकर है अथवा किसी एक नाव में बैठे लोगों को लेकर है ? यह किस्सा जिस किताब में लिखी गई. बताई गई हो क्या वह किताब ईश्वरीय किताब होना संभव है ? जब ईश्वर को सृष्टि कर्ता बताया जाता है तो क्या उसे यह मालूम ही नहीं की दुनिया कितनी बड़ी है ? अथवा दुनिया किसे कहा गया दुनिया की लम्बाई चौडाई के बारे में उस ईश्वर को पता ही न हो क्या यह संभव हो सकता है ?
यह नुह वाली किस्सा बाइबिल और कुरान दोनों ने इसे ईश्वरीय ज्ञान बताया है | और यह दोनों पुस्तकें मिलती जुलती बातें हजरत नुह के लिए लिखकर दुनिया के मानव कहलाने वालों को दिया है | और यह दोनों ही इसे सच्ची घटना बतला रहे हैं | थोडा थोडा शब्दों के हेर फेर है जैसा बाईबिल मे, नोहा और नोहा की नाव की घटना है यही तूफ़ान की बात बताई गई है नाव में सब को चढाने की बातें है आदि आदि |
अब सवाल यह पैदा होता है की क्या परमात्मा की दुनिया ही इतनी बड़ी है ? जो एक नाव में ही आ जाएँ ? जिस नाव में गिने चुने लोग हों और वह नाव में बैठने वाले लोगों को ही दुनिया कहा गया है ? इधर हजरत नुह के बेटे के लिए सब सहाबियों ने अपना अपना अटकल की बाज़ार गरम करने लगे | और किसी ने कुछ लिखा और किसी ने कुछ बताया |
नुह ने अल्लाह से कहा था के ऐ अल्लाह हमारे वंशजों को बचाना और हमारे बीवी बच्चे की बचाना | अल्लाह ने दुआ तो कुबूल कर ली और बाकि सब लोगों को हलाक कर दिया | उसमें हजरत नुह का एक बेटा भी हलाक हो गया | इसे लेकर हजरत नुह ने अल्लाह से शिकायत की, मेरे बेटे को क्यों डुबोया ? अल्लाह ने कहा वह तेरे ऊपर ईमान नहीं लाया था वह तो काफिरों में से ही था, और मैंने कहा था की सभी काफीरों को हलाक कर दूंगा | जब तेरा बेटा तेरी बात को नहीं माना फिर तू उसके लिए क्यों कहरह है ?
अब भाष्यकार ने लिखा की सहाबियों में नुह के बेटे को लेकर सब ने कई तरह, के विचार देना चालू करदिया नुह के जो बेटा कश्ती पर नहीं आया था उसके लिए बोला गया की वह नुह का बेटा नहीं था, किसी ने बोला की नुह की पत्नी उस बेटे को लेकर नुह से शादी करी थी –और तो किसी किसी ने यहाँ तक कहा की पैगम्बर की बीवी दुश्चरित्र नहीं होती |
मतलब यह है की नुह की पत्नी के चरित्र पर भी किसी किसी ने संदेह किया | अब अल्लाह ने भी नुह के उस बेटे को अपने दीन में नहीं मिला सका और अल्लाह ने नुह से कहा यह तेरा बेटा नहीं है, इस तफसीर में लेखक ने भी विचार नहीं किया की वह सही लिख रहे हैं अथवा इस लेख पर कोइ सवाल उठा सकता है ? यह सवाल अल्लाह की कलाम पर उठ रहा है,अल्लाह पर भी सवाल खड़ा है | मानव कहलाने वालों को यह जानना जरूरी है की ईश्वरीय ज्ञान की कसौटी क्या है ? महेन्द्रपाल आर्य 18 / 5 / 20 =
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