देखें तमाशा अल्लाह का =

|| देखें तमाशा अल्लाह का ||
مَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِي ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ [٧:١٧٨]
राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं | सूरा 7 का 178
कुरान का अल्लाह ही मानवों को सही रास्ता पर चलाता है = और पथ भ्रष्ट भी अल्लाह ही करता है |
 
यह काम एक अच्छे और नेक इंसान का भी नहीं हो सकता | कारण जो सत्य मार्ग पर चलाता है वह कभी किसी को गुमराह नहीं कर सकता | परन्तु अल्लाह का दोनों काम है |
 
जब अल्लाह ने मानवों को गुमराह करने के लिए शैतान को बना कर उसे वरदान भी दिया गुमराह करने के लिए = फिर उसी गुमराही वाला काम अल्लाह को किसलिए करना पड गया ?
 
अब यह भी देखना पड़ेगा की किसका गुमराही वाला काम मजबूत है, जोरदार है -अल्लाह का अथवा शैतान का ?
 
अल्लाह ने दुनिया बनाया ही नहीं इसका प्रमाण इसीसे मिलता है | कारण मानव कर्म करता है अपने मन से – किसी को अच्छा या बुरा करवाना नहीं पड़ता दुसरे को |
इसे अल्लाह जानता भी नहीं है की लोग अच्छे और बुरे काम कैसे करते हैं ? मानव अच्छा या बुरा कर्म करने के लिए मन में बात आती है |
 
इसे अंजाम देने का मालिक बुद्धि है,अगर उसकी बुद्धि शुद्ध है तो मनको रोक देगी बुरा काम करने से | यही बुद्धि की शुद्धि के लिए हम हर वैदिक धर्मी परमात्मा से प्रार्थना करते हैं |
 
बुद्धि के लिए जो मेधा – सुमेधा – प्रज्ञा – और ऋतंभरा = बुद्धि की मांग करते हैं हम लोग | जिससे की कार्य करने में अच्छे और बुरे का निर्णय कर सकें या निर्णय ले सकें |
 
यह कोरा वकवास है की कोई मानव से बुरा करवाए या अच्छा करवाए | किसी को करवाना नहीं पड़ता बल्कि मानव कहलाने वाले अपने बुद्धि से ही अच्छा और बुरा काम करता है |
 
जो कार्य बुद्धि के द्वारा होता है = अल्लाह इसे जानते तक नहीं है तो दुनिया बनाया जाना अल्लाह की बस की बात नहीं है | मानव कहलाने वालों को इसपर चिंतन और विचार करना चाहिए | और मानव कहला कर अपना जीवन को सफल बनाना चाहिए | वैदिक धर्म की सत्यता देखें =
इसका जवाब है किसी के पास तो सामने आये = प्रतीक्षा में =
महेन्द्रपाल आर्य = 22 /11 /19 =