धर्म का दूसरा सिद्धान्त पक्ष क्या है देखें |

|| धर्म का दूसरा सिद्धान्त पक्ष क्या है देखें ||

धर्म का दूसरा पक्ष इसका व्यावहारिक पक्ष, जिसका सम्पर्क सीधा मानव के आचरण से है, साधना से है | मूल सिद्धान्त को विस्तृत किये बिना, जो भी क्रिया जीवन में की जाती है वही धर्म का स्वरुप है, तथा इसके विपरीत जो भी किया जाता है वह सब अधर्म है |

 

धर्म की उपयोगिता तभी तक है, जब तक की मानव इन शाश्वत सिद्धांतों का पालन करे, और मानव अपने लक्ष्य को और अग्रसर करे यही लक्ष्य को भुला कर विभिन्न मत, पंथों एवं सम्प्रोदाय का जन्म हुवा, जो मानव समाज में मतभेद पैदा किया और यहाँ तक की मानवों को मानव से ही लड़ा दिया | एक दुसरे के साथ प्रेम या मैत्रीय भाव के बजाय एक दुसरे के जानी दुश्मन बन गये या फिर बना दिए गये | जब की वैदिक मान्यता में मानव समाज को अपना कुटुम्ब {परिवार} बताया | अब मानव एक परिवार वाले होकर भी अपने परिवार से लड़े यही धर्म विरुद्ध कार्य है | यहाँ धरती भर यह देखने को मिल रहा है की,धर्म विरुद्ध कार्य कर भी उसे धर्म कहा जा रहा है | मानव को मानव से लड़ने का उपदेश जिस किताब या पुस्तक अथवा ग्रन्थ में दी गई उसे ही धर्मग्रन्थ कहा जा रहा है माना जा रहा है बताया जा रहा है | देखें जिस कुरान को मानव समाज में ईश्वरीय ग्रन्थ माना जाता है उसी ग्रन्थ में क्या लिखा है, और आश्चर्य की बात है की इसी ग्रन्थ को ईश्वरीय ग्रन्थ माना जा रहा है, बताया जा राह है |

يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ جَاهِدِ الْكُفَّارَ وَالْمُنَافِقِينَ وَاغْلُظْ عَلَيْهِمْ ۚ وَمَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ [٦٦:٩]

ऐ रसूल काफ़िरों और मुनाफ़िकों से जेहाद करो और उन पर सख्ती करो और उनका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या बुरा ठिकाना है | सूरा 66 तःरिम =आयत 9

فَإِذَا انسَلَخَ الْأَشْهُرُ الْحُرُمُ فَاقْتُلُوا الْمُشْرِكِينَ حَيْثُ وَجَدتُّمُوهُمْ وَخُذُوهُمْ وَاحْصُرُوهُمْ وَاقْعُدُوا لَهُمْ كُلَّ مَرْصَدٍ ۚ فَإِن تَابُوا وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوُا الزَّكَاةَ فَخَلُّوا سَبِيلَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ

फिर जब हुरमत के चार महीने गुज़र जाएँ तो मुशरिकों को जहाँ पाओ (बे ताम्मुल) कत्ल करो और उनको गिरफ्तार कर लो और उनको कैद करो और हर घात की जगह में उनकी ताक में बैठो फिर अगर वह लोग (अब भी शिर्क से) बाज़ आऎं और नमाज़ पढ़ने लगें और ज़कात दे तो उनकी राह छोड़ दो (उनसे ताअरूज़ न करो) बेशक ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है |  सूरा तौबा 5 =    और भी बहुत जगह है

 

يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى الْقِتَالِ ۚ إِن يَكُن مِّنكُمْ عِشْرُونَ صَابِرُونَ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ يَغْلِبُوا أَلْفًا مِّنَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ [٨:٦٥]

ऐ रसूल तुम मोमिनीन को जिहाद के वास्ते आमादा करो (वह घबराए नहीं ख़ुदा उनसे वायदा करता है कि) अगर तुम लोगों में के साबित क़दम रहने वाले बीस भी होगें तो वह दो सौ (काफिरों) पर ग़ालिब आ जायेगे और अगर तुम लोगों में से साबित कदम रहने वालों सौ होगें तो हज़ार (काफिरों) पर ग़ालिब आ जाएँगें इस सबब से कि ये लोग ना समझ हैं | सूरा 8 अनफल =आयत 65

 

नोट :- जिस किताब को कलामुल्लाह कहा जाता है उसी किताब में आल्लह का फरमान है, अल्लाह अपने रसूल से कहे की तुम मोमिनों को जिहाद के वास्ते आमादा करो, काफिरों के खिलाफ | तुम 20 मुसलमान हो तो 200 काफिरों पर भारी पड़ोगे | इसे ही तो चरितार्थ कर रहे हैं कश्मीरी मुसलमान पत्थर बाज | सभी कश्मीरी मुसलमान उन इस्लामी आतंकवादियों को शरण दिया है, यहाँ तक की महबूबा मुफ़्ती जो प्रान्त के मुख्य मन्त्री रही है वह भी उन्ही आतंकवादियों की हिमायती है जिसे सहन से बाहर होकर बीजेपी ने साथ छोड़ा है |

 

यह तो आँखों देखा हाल है, क्या इसे कोई झुठला सकता है, यह मात्र महुबूबा, और पत्थर बाजों की ही बात नहीं है | अपितु गुलामनबी आज़ाद और सैफुद्दीन शोज भी यही आतंकवादियों के पक्ष में बोल रहे हैं इसी का ही नाम इस्लाम है | जिसे लोग धर्म कह रहे हैं | धर्म में मानवों को मानवों से मिलने मिलाने की बात कही गई, यहाँ इस्लाम जो अपने को धर्म बता कर मानवों से मानवों को लड़ा कर भी धर्म कहा जा रहा है इसी इस्लाम को ?

 

इस्लाम ने धर्म को बिलकुल थोथी बकवास मान लिया है, इसी लिए तो मैं प्रथम से बताता आया हूँ की धर्म, और पन्थ, मत, अथवा रिलिजन यह सब अलग है मत पंथों में एक दुसरे का मतभेद एक दुसरे से अपने को बड़ा बताना एक मत दुसरे मत वालों से अपना दुरी बनाना एक दुसरे से जुदा करना यही सिखाया है | क्या हमें देख कर भी इसे समझना नहीं चाहिए, या धर्म और मत पन्थों, के भेद को समझना नहीं चाहिए ?

यही तो मानवता है और यह सभी मानव मात्र के लिए हैं किसी जाती वर्ग, सम्प्रोदाय विशेष के लिए नहीं समस्त मानव कहलाने वालों के लिए है | हम मानव कहलाने वाले जब तक धर्म और मत पन्थों के भेद को नहीं समझेंगे तो मानवता की रक्षा नहीं हो सकती | हमें धर्म, और मानवता की रक्षा के लिए एक जुट होना पड़ेगा, इन मानवता विरोधियों के खिलाफ तभी हम धर्म व मानवता की रक्षा कर पाएंगे | आप सभी से प्रार्थना है की अगर हम मानव कहलाते हैं अपने को, तो हमें इसी मानवता की रक्षा करने के लिए एक जुट होना ही पड़ेगा | कारण मानव धर्म ही एक मात्र धर्म है, जो मानव मात्र के लिए है, इसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी हमारी और आप की है | प्रतिज्ञा करें आज ही और इस अभियान में मुझे ज्यादा से ज्यादा सहयोग करें, इस कार्य को गति देने के लिए | धन्यवाद केसाथ आप.सबका

महेन्द्रपाल आर्य =2 जुलाई =18