परमात्मा का उपदेश है मानव बनो ||

|| परमात्मा का उपदेश है मानव बनो ||
हमारा नाम मानव किस लिये पड़ा ? यह नाम परमात्मा का दिया हुआ है हम परमात्मा के दिए गये नाम को ग्रहण क्यों नहीं करते | कोई हिन्दू =कोई मुस्लिम =कोई ईसाई किसलिए =कोई सिख =और बौद्ध =जैनी क्यों ?
मानव के नाते पहला कर्तव्य है धर्म पर आचरण करना जो मानव मात्रका एक है, दूसरा है राष्ट्र सेवा,तीसरा है प्राणी मात्र का कल्याण करना,यही मानवता।
धरती पर प्रत्येक वस्तु को किसी ना किसी नाम से पुकारा जाता है, अर्थात हर वस्तु का नाम है, चाहे वह मिटटी ही क्यों न हो ?

जिस प्रकार मिट्टी का नाम हुवा उसके गुणों के कारण, मिटटी में बहुत सा गुण हैं उसके गुणों को लिख कर समाप्त करना मेरे जीवन भर का प्रयास कम पड़सकता है, मिटटी का गुणों को लिखना |

ठीक इसी प्रकार हर वस्तु का नाम उसके गुणों के कारण ही उसका नाम पड़ा है जब हमारा नाम मानव पड़ा तो क्या बिना गुण के ही हमारा नाम पड़ा है, अथवा पड़ना संभव हुवा ?
सृष्टि कर्ता ने हमारा जो नाम धारण का उपदेश दिया है > मनुर्भव: {मानव बनों} और उस उपदेशानुसार हम मानव नही बन पाए फिर दुनिया बनाने वाले का उपदेश का क्या हुवा ? हमारा नाम भी हमारे गुणों के कारण ही है, अगर हम अपने गुणों को छोड़देंगे तो हमारा नाम मानव का रहन, होना संभव नही होगा |
यह बातें सिर्फ हमारे लिये ही नही है, किन्तु हर एक वस्तू के साथ जुड़ा है जैसे | नियम किस प्रकार बदलता है देखें, बीज +अंकुर +पौधे + लता +बृक्ष +आदि नाम हो गया, किस चीज से, बीज से |
अब बृक्ष को काटने पर लकड़ी +तख्ता +तख्ती +खाट +पलंग +टेबुल +कुर्सी +से जलावन+ आग +चूल्हा के पास+ इंधन भी उसीका नाम है +जब यज्ञ करेंगे उसी का ही नाम समीधा + उससे धुंवां + कोयला + राख आदि नामों से पुकारेंगे |

ठीक यही प्रमाण है हम नामव कहलाने वालों का भी, हम अगर अपना गुणों को छोड़ देंगे तो हमारा भी नाम बदलेगा | धर्म पर आचरण सिर्फ मानव ही कर सकता है अन्य,किसी के लिये धर्म है ही नही | धर्म सिर्फ मानवों के लिये है मानव उस धर्म से अलग हो ही नही सकता | अगर मानव धर्म से अलग हो गया फिर उसका नाम भी बदलेगा यह ध्यान रहे |
धर्मेनहिन्:पशुर्भी समानः { धर्म हीन् मानव पशु के समान है } धर्म को छोड़ने से उसे पशु के समान बन जायगा कहा जायगा | मानव होकर अगर उसके गुणों को त्याग दिया उसका नाम बदल गया | यही मानव अपने गुणों को छोड़ने पर दानव कहलाता है | दिमागी सन्तुलन खो दे पागल कहलाता है, क्रूरता को अपना ले, उसी मानव को कसाई कहा जाता है,राक्षस भी कहते हैं आदि |

सिर्फ गुण को छोड़ने से हमारा नाम भी बदल जाता है, यही कारण बना परमात्मा का उपदेश है मानवबनों | किन्तु दुर्भाग्य से आज मानव मानव बनकर, कहला कर सन्तुष्ट नही | कोई मुस्लमान बन रहे, या बना रहे हैं एक दुसरे को | फिर कहीं कोई ईसाई बन रहे, और बना रहे एक दुसरे को |

कहीं कोई बौधिष्ट बन रहे बनवा रहे एक दुसरे को, फिर कहीं कोई जैनी बन और बनवा रहे हैं एक दुसरे को | कोई सिख बन रहे बनवा रहे हैं, कहीं कोई बहाई बन रहे और बनवा रहे हैं एक दुसरे को |

जो गुणों को धारण करने की बात थी उसे छोड़, जिसे मानव बनना था उस से अलग होकर धर्म को त्याग दिया राष्ट्रीयता को त्याग दिया, और मानवता को भी |
फिर विचार करें जो मुस्लमान बना अथवा जिसे बनाया गया मुस्लमान,उसको सिखाया बताया गया पूरी दुनिया वालों को मुस्लमान बनाव, राष्ट्र इस्लामी बने राष्ट्र का इस्लामी करण करो आदि | इस्लामी शिक्षा यही है हर गैर इस्लामी को इस्लाम का दावत दो मुस्लमान बनाव, जो भारत में इस्लाम को फैलाया गया |

मुस्लमान कोई आसमान से गिरे नही और ना तो जमीन के अन्दर से निकले, सम्पूर्ण दुनिया में इस्लाम को फैलाया गया,विस्तारित किया गया इतिहास साक्षी है | भारत किसी का क्या बिगाड़ा जो, हाफिज सईद, सैयद सलाहउद्दीन,मौलाना मसूद अज़हर से लेकर जितने भी अस्लामी संगठन है वह क्या चाहते भारत को इस्लाम में परिवर्तित करना | अभी मियां मुशर्रफ ने भी कहा हम हाफिज सईद को आतंकवादी नही मानते वह समाज सेवी है | वह हमारा हीरो है जी |

अभी दूरदर्शन में दिखाया जा रहा था, बुरहानवाणी कश्मीरी आतंकवादी जिसे हमारे सैनिकों ने मारा है वह हाफिज सईद से हथियार, और पैसा मांग रहा था भारत में गैर मुस्लिमों को मारने के लिये | यही इस्लामी तयलीम है,इस्लाम जन्म लिया है इसी काम के लिये, अनेक प्रमाण मैं दे चूका हूँ अबतक जरूरत पड़ने पर आगे भी दूंगा | यह सभी प्रमाण मैं कुरान से दिया हूँ और हदीसों का भी प्रमाण है | यहाँ राष्ट्रीयता से हाथ धोया, यही तो कारण है भारत माता की जय नही बोलने का | असदुद्दीन ओवैसी हो दारुल उलूम हो इस्लामी मान्यता यही है | रही जीव में दया वह भी इस्लाम में नही है, अल्लाह के नाम से पशुओं को काटा जाता है | फिर मानवता का पाठ एक मात्र वेद को छोड़ दुनिया की किस भी किताब में नहीं है, किन लोगों के पास है मानवता क्या पशुओं के गले में छुरी चलाना मानवता ? मानव का नाता सत्य से है सत्य को छोड़ दिया तो वह मानव कहलाने के हक़ दार नहीं है | आयें हम सत्य को जानें और सत्य को जीवन में उतारें सत्य से ही मानव मात्र का नाता है |
महेन्द्रपाल आर्य = 30 /7 /19