परमात्मा को न जाने वह मानव ही नहीं है ||

परमात्मा को न जाने वह मानव ही नहीं है ||
जो अपने को मानव कहलाता है और परमात्मा को जानता नहीं वह मानव कहलाने का अधिकारी ही नहीं है |
कारण मानव का नाता ही परमात्मा से है, पर जो मानव परमात्मा को ही नहीं जानता हो या जानने का प्रयास न करता हो वह मानव नहीं कहला सकता |
कारण मानव कहलाने से पहले मानव किसे कहा जाता है उसे जानना पड़ेगा उसे जाने बगैर अपने को कोई मानव क्यों और कैसे कहला सकता हैं भाल ?
सृष्टि रचाने वाले ने ही हमारा नाम मानव रखा और मानव बनने का उपदेश भी दिया मनुर्भव: कहा मानव बनो | अर्थात इसी धरती पर आकर ही हमें मानव बनना पड़ता है जन्म से कोई मानव नहीं बना मानव कोई बनता है अपना दायित्व का निर्वाहण करके |
अर्थात धरती पर जो वस्तु जैसा है उसे ठीक ठीक वैसा कहना जानना मानना बताना इसका नाम ही मानव है | यानि माँ को माँ कहना मानना जानना यही काम मानवों का है, इसके विपरीत जानने मानने वाले का नाम दाँनव है पशु है जानवर है आदि |
ठीक इसी प्रकार गोबर को हलवा मानना मानवता विरोधी है, ठीक इसी प्रकार हलवा को भी गोबर न मानना न कहना इसी का ही नाम मानवता है |
जब हम यह जान गये की जो वस्तु जैसा हैं उसे ठीक ठीक जानना मानना कहना ही मानवों का काम है इसके विपरीत कहने वाले को इसी दुनिया में ही पागल कहते हैं लोग |
यही प्रमाण है की किसी देवी और देवता को कोई परमात्मा कहे माने वह भी सर्वथा अमानवीय कार्य होगा | देवी अथवा देवता कौन है किसे हम देवी या देवता कहेंगे वह भी जानने का विषय है | बिना जाने किसी को भी देवता या देवी कहने का नाम ही अमानवीयता है |
देवी या देवता को कोई परमात्मा खे वह भी निषेध है कर्ण जिनका नाम देवी या देवता पड़ गया वह परमात्मा क्यों औत कैसे हो सकते हैं ? परमात्मा तो परमात्मा ही रहेंगे और देवी या देवता तो देवी या देवता ही रहेंगे | कल रत 8 से 9 बजे तह इन्ही पर चर्चा होगी लाइव स्ट्रीम में याद रहे कल 25 जुलाई 21 को आप सभी सदर आमंत्रित हैं |
महेन्द्र पाल आर्य | 24 ,7 ,21