फजले इलाही को खुली चुनौती |

|| फजले इलाही को,खुली चुनौती ||

इस कुरानी आयत को कोई कलामुल्लाह सिद्ध कर दिखाए = खुली चुनौती ||

اقْرَأْ بِاسْمِ رَبِّكَ الَّذِي خَلَقَ [٩٦:١]

(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया

 

मेरे पर मोबाईल पर यह लिख कर भेजा फजले इलाही नामक व्यक्ति ने, उसके साथ लिख कर विचारों का जो आदान प्रदान हुवा वह आप लोगों के सामने प्रस्तुत है |

Mera Naam Fazle Ellahi hai from Orissa
Mujhe Aapki ISLAM ko samajhne ki pareshani pata chala …Mujhe khusi hogi ye sabit karne main Quran Kallamullah hai aur Baki Jitna allah ne mujhe ilm ki Daulat di hai…Insha Allah…Aapke kimti waqt se kuch samay iis adna insaan ke liye bhi de sake to aapka dhanyawad

बिल्कुल स्वागत है जनाब आप कुरान को कलामुल्लाह सिद्ध करें । पर यह तो सामने बैठ कर ही निर्णायक मण्डल ही सिद्ध करेंगे। जब सामने बैठ कर डिबेट करेंगे तभी बात बन सकती है। आप कुरान को कलामुल्लाह सिद्ध करेंगे तो मैं उसी वक़्त इस्लाम कुबूल कर लूंगा। और अगर आप कुरान को। कलामुल्लाह सिद्ध नहीं कर सके, तो आपको वैदिक धर्म स्वीकारना होगा। यह बातें सरकारी स्टैम्प पेपर में लिखा पढ़ी होगी। अगर आप समय देते हैं, तो दुनिया वालों को भी पता लगेगा सत्य क्या है और किनके पास है ? में आप के जवाब का इन्तेज़ार करूँगा। धन्यवद। पण्डित महेन्द्र पाल आर्य, 17 जुलाई 2018, समय 12,50,दिन

Mujhe sidh karne ki jarurat nahi Allah ne apne pehli aayat main aapke question ka answer de diya hai……Bas aap Sabse pehli aaya padh lijiye..agar aapko pata hai to ya main likh kar bhej doo ..aapke sare question ka jawab mil jayega

Kya aapko Pehli Aayat pata h

सामने बैठ कर ही बात होगी अंदाज़ा तीर मत चलाव भाई मैन साफ साफ लिखा है। बिना लाग लपेट के। एकरा बेइसमे रब्बिकल्लाजी खलक, से अगर आप सिद्ध कर सकते हो सामने आव मेरी दावा है।

Ekra hi…aapke sare question ka answer hai….matlab (Padho),yahi apka simple answer hai Allah ke kalam ko insaan ke padhne ke liye hi banaya…Bura nahi maniye lekin mujhe lagta hai aapko mamuli chiz bhi samajhne main pareshani hoti hai sayad aapki umar ho gayee hai…Ye to itna mamuli answer ke liye aap Debate karte rahte hai.

Allah ke pehle kalam yani EKRA se hi aapka sara theory khatam ho jata hai

धर्म प्रेमी सज्जनों यह किसप्रकार सामने आने से डरते हैं, और किस प्रकार भागने की कोशिशि की है देखें | इन्हों ने लिखा की आपका सारा सवालों का जवाब कुरान के प्रथम आयात में ही है | अब हमलोग देख लेते हैं की कुरान की वह प्रथम आयात क्या है ?

اقْرَأْ بِاسْمِ رَبِّكَ الَّذِي خَلَقَ [٩٦:١]

(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया |

पहली बात क्या है उसपर चिंतन करें= यह है कुरान की पहली आयत जो कलामुल्लाह कहा जाता है जिसे दुनिया के लोग, और विशेष कर इस्लाम वालों का यही कहना और मानना है की कुरान कलामुल्लाह है | कलामुल्लाह का मतलब यह है की अल्लाह ने कही,  यहाँ जिब्राइल ने आकर मुहम्मद से कहा =(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया|

 

स्पष्ट बात यहाँ लिखा है की जिब्राइल ने मुहम्मद को अल्लाह के नाम से पढ़ने के लिया कहा ? तो यह वाक्य जिब्राइल की हुई अथवा अल्लाह की ?

 

कोई भी साधारण दिमाग रखने वाला यही कहेगा, की अगर यह कलाम अल्लाह की होती, तो यह कहा जाता पढ़ो मेरे नाम से, की मैंने दुनिया की हर चीजों को पैदा किया ?

 

यहाँ कहने वाला फ़रिश्ता है, वह कह रहे हैं, अल्लाह के नाम लेकर पढ़ो ? यह अल्लाह की आयात है अथवा जिब्राइल नमी फ़रिश्ते की ?

 

दूसरी बात यह भी होगी की जिब्राइल को यह आयात मिली कहाँ से, क्या अल्लाह ने जिब्राइल से कहा, बताया, सुनाया ? यह प्रमाण पूरी कुरान में कहीं भी नहीं है |

मेरी खुली चुनौती है इस्लाम वालों से की यह पहली आयात कुरान की जिसे बता या जा रहा हैं इसे कोई अल्लाह की कलाम है यह सिद्ध कर दिखाए |

इस खुली चुनौती के साथ महेन्द्रपाल आर्य = 18/ 7 / 18 = 7 बजकर 22 मिनट सुबह |