भारत के नेता और उनकी मानसिकता |

|| भारत के नेता और उनकी मानसिकता ||

हमारा यह देश आर्यावर्त कहलाया, सृष्टि की रचना इसी देश में हुई, मात्र मानव ही नहीं सभी जीव, पशु पक्षी से लेकर मानव, दानव, लता, वृक्ष, कीट, पतंग आदि सृष्टि में जो कुछ भी है सभी की उत्पत्ति इसी देश से हुई |

इसी सृष्टि में मानव ही अपने किये कर्मों के अनुसार मानव योनी को प्राप्त किया, बाकि जितने भी प्राणी चर, अचर, सब अपने किये कर्मानुसार ही अपनी अपनी योनी को प्राप्त किया है | इसमें मानव ही श्रेष्ठ प्राणी कहलाता है, कारण मानव ही अच्छे बुरे की पहचान करता है या करने की क्षमता अपने किये कर्मों के अनुसार पाता है अथवा इन्हें मिला है |

इसी देश में अनेकों, ऋषि मुनियों से लेकर, शास्त्र, और शस्त्रज्ञों, से लेकर नीतिज्ञों का भी आगमन हुवा | मर्यादा पुरुषोत्तम जैसे मर्यादित आज्ञाकारी से लेकर,योगेश्वर श्रीकृष्ण जैसे राष्ट्र के कुशल नितिज्ञ भी राष्ट्र के संचालक इसी देश में आये | अनेकों राजा महाराजा से ले कर अर्थशास्त्र और समाज शास्त्र के ज्ञानी भी जन्म लिये |

अनेकों नाम लिखे जा सकते हैं एक से बढ़ कर एक हमारे देश में जन्म लिए हैं, इतिहास साक्षी है हमारा | सब कुछ होते हुए भी यह देश गुलाम बना इसलाम का, और ईसाइयत का भी,इसका मूल कारण है, एक शब्दों में आपसी फुट का शिकार ही रहा है | इतने बड़े बड़े पराक्रमी शूरवीर साधक, त्यागी, तपस्वी, सब रहते हुए भी देशका गुलाम बनना यह महत्त्व पूर्ण बात है और खोज तथा चिन्ता की भी बात है |

सब कुछ होने पर भी यह देश विदेशियों के हाथ से मुक्त हो गया बताया जाता है, पर सही पूछिए तो हम मुक्त हुए उनकी राज्य व्यवस्था से, यानि उस समय शासक अंग्रेज थे गोरे | मुक्त होकर हम फँसे काले अंग्रेजों में, मानसिकता हमारी वही है, वही अंग्रेजों वाली नीति फुटडालो राज करो की आज भी लागु है | मानसिकता आज भी वही है, वह व्यवस्थापक हमारे देश को लूटकर ले जा रहे थे अपने देश में | और आज देश के नेता देश लूटकर अपने घर ले जा रहे हैं, फर्क बस इतना ही है | कुछ भारत का लुटा रुपया विदेश भेज रहे और ज्यादा भाग अपने घर परिवार में लगाये जा रहे हैं |

आज समाजवाद नहीं किन्तु परिवार वाद का ही भरमार हो गया प्राय: राजनेताओं ने भाई बाद, और भतीजावाद ही चला रखा हैं | जिनके पास भाई नहीं वह अपने भतिजे को लगा दिया | पहले नेता पढ़े लिखे लोगों को ही चुनते थे या बनाया जाता था, आज हमारे देश के नेता वह है जिनको अपना नाम भी लिखना नहीं आता |

अनेक हैं हमारे नेता कहलाने वाले जिन्हें लिखने पढ़ने से कोई मतलब ही नहीं, मैं किसी का नाम लेना नहीं चाहता | अगर लेने लगूं तो लम्बी लिस्ट बन जाएगी, जिन्हें सचिवालय, और शौचालय का भी पता नहीं, ऐसों को हमारे देशवासियों ने प्रान्त के मुख्यमन्त्री भी बनादिया,  कोई रोकने वाला बोलने वाला भी नहीं | इससे हमारे देश के नेताओं की मानसिकता का भी पता लगता है,की जिस देश में राज व्यवस्था चलाने वाले विद्वान होते थे, और आज उसी देश की मुख्यमन्त्री को लिखना पढ़ना नहीं आता, यह है अचम्भे की बात | सही पूछिए तो हमें इसी बात की ही आज़ादी मिली है | पिछले दिनों में यह भी देखने को मिला की शपत पत्र भी पढना नहीं आया दो बार राज्यपाल जी को बोलना पड़ा यह सब आँखों देखा हाल है |

उनदिनों विदेशी राजा हमारे देश को लूटकर अपने देश में ले जा रहे थे अब यह लोग अपने देश को लुट कर अपना घर ले जा रहे हैं | अगाध सम्पत्ति बटोर कर कोई जेल में बंद हैं कोई जेल से निकल रहे हैं | और कोई कोई जमानत में छुटे हैं, जब से हमें आज़ादी मिली तबसे लेकर अब तक यह नेता गण मात्र अपने घर भरो आन्दोलन ही चला रहे हैं | इसी आरोप में हमारे कई नेतापर प्रतिबन्ध लगा है वह चुनाव नहीं लड़ सकते |

जो राष्ट्र हित में कार्य करे उसी का विरोध करना यही, लक्ष्य रह गया है, इन राजनितिक सामाजिक, और धार्मिक नेताओं का | यही तो कारण बना कहीं विरोध पादरी द्वारा हो रहा है कहीं, मौलवी द्वारा हो रहा है, और राजनेता भी गोलबन्द हो रहे हैं |

जिनके पास रोने के लिए बच्चे नहीं भरण पोषण की जिम्मेदारी नहीं मात्र चिंता है तो सिर्फ राष्ट्र को किस प्रकार समृद्धशाली, बनाने की ही चिन्ता जिन्हें हो इस भारत को पुन: सोने की चिड़िया बनाने की सोच जिन्हें है | जो अपने उपर राष्ट्र का दो पैसा भी खर्च नहीं करता या अपने खर्चे का बोझ जो राष्ट्र पर नहीं डालते, राष्ट्रिय कार्य में सब से ज्यादा समय देने वाले उन एक के खिलाफ आज समस्त भारतीय राजनेता एक जुट हो रहे हैं |

अचम्भे की बात एक और भी है, की एक जुट हो कौन रहे हैं उसपर भी विचार करना बहुत ज़रूरी है, देखें भारत में 1885 में अंग्रेजों ने जन्म दिया एक राजनीती पार्टी जिसका नाम कांग्रेस है | 1947 से जो पार्टी  इसदेश का संचालन भार सम्भालती रही उस पार्टी की दकियानूसी के कारण उनसे जुड़े लोग अलग होते गये और सबने अपनी अपनी राजनीती पार्टी बनाली |

अलग होने का कारण सिर्फ विचारों में मेल न होना, विचार भिन्नता ही मुख्य कारण,दूसरी बात अपने आप को सर्वेसर्वा बनाना यह खुद चौधुरी बनना आदि | जिस कांग्रेस के खिलाफ आंबेडकर,जिस कांग्रेस के खिलाफ, समाजवाद, लोहोयावाद,वामपंथवाद, बहुजनवाद,जनतादल,अन्नावाद,राष्ट्रिय कांग्रेस शरदपवार, और तृणमूल कांग्रेस आदि | यह सब लोग जिनके दामन छोड़े आज उन्ही को गले लगाने को एक जुट होना चाहते हैं | जिस कांग्रेस की खुद की हालात ही खस्ता है, जो कर्नाटक के मुख्यमन्त्री को दो जगह से लड़कर बड़ी मुश्किल से एक पर सामान्य वोटों से ही जीते |  यह सब लोग एक जुट हो रहे हैं सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी के खिलाफ, मात्र एक व्यक्ति से यह लोग डर गये | आखिर कारण क्या हैं आप भारत वासी भली भांति जानते ही हैं, जो बड़ी पुरानी कहावत है की निर्धन डरते हैं धनवान से, निर्वल डरते हैं बलवान से, और चरित्रहिन डरते हैं चरित्रवान से |

अब सम्पूर्ण भारत वासियों को विचार करना है की उन्हें चरित्रवान चाहिए अथवा चरित्रहीन ? उन्हें राष्ट्रवादी चाहिए अथवा परिवार वादी ? जिनके बालबच्चे नहीं उन्हें चाहिए या फिर भाई भतीजावाद चाहिए ? अब आने वाले समय में भारत के मूल निवासियों को चाहिए एक जुटता दिखाना |

भारत से स्वार्थवादी राजनीती करने वालों को अच्छे तरीके से सबक सिखाना, जिससे की आगे आनेवाला समय में कोई राष्ट्र विरोधी विचार वाले आप लोगों से वोट मांगने के काबिल ही न रहे यही आप भारत वासियों की अग्नि परीक्षा है 2019 ही नहीं अपितु जितने दिनतक आप भारतीय ने कांग्रेस को राज करने दिया, उतने दिनों तक माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जो को बनाये रखिये फिर यही भारत फिरसे सोने की चिड़िया कहलाने लगे विश्वमें |

महेन्द्रपाल आर्य =26 = 5 =18 =