मत्त्वा कर्मणि सिव्वते = मानव वही है जो विचार वाण हैं |

|| मत्त्वा कर्मणि सिव्वते ||
मानव किसे कहते हैं प्रत्येक मानव कहलाने वालों को यह जानना जरूरी है |
मानव वह हैं जो विचारवाण, सुझबुझ रखने वाला अक्लसे काम लेने वाला बुद्धि का प्रयोग करने वाला हर काम को विचार पूर्वक करने वाले का नाम मानव है|
 
इसके विपरीत जो भी कोई काम करता है या चलता है वह मानव कहलाने के अधिकारी नहीं होंगे | हर मनुष्यों को यह बातें ध्यान में रखना चाहिए की हमारा नाम मानव इसी लिए ही पढ़ा | की किसी भी काम को करने से पहले उसे धर्सानुसार सत्य और असत्य को विचार करके करना चाहिए |
 
इसी बात को जान कर प्रत्येक मानव कहलाने वाले को चलना चाहिए अब अगर कोई मानव कहलाने वाला सत्य को तिलांजली दे,धर्म को भी त्याग दे, जिस कारण हम मानव कहलाते हैं अगर उसे ही त्याग दें तो मानव कहलाने का अधिकारी नहीं बन सकते ?
 
इसी कसौटी से हम और आप धरती पर मानव कहलाने वाले जितने भी हैं सब को तौल सकते हैं अब इसमें कोई भी मानव कहलाने वाला नहीं बन सकता जब तक वह सत्य का ग्रहण न कर |
 
इसमें बहुत बड़े बड़े महात्मा कहलाने वाले भी मानव कहलाने की कोटि में नहीं आयेंगे | जैसा मैं पर्थम नाम लूँगा गौतम बुद्ध का जिन्हों ने देखा पशु काट कर यज्ञ में आहुति देते हुए लोगों की,उन्हों ने पूछा यह क्या कर रहे हो ?
 
ज़वाब मिला यज्ञ कर रहे हैं तो पशु काट कर किस लिए डाला जा रहा है तो जवाब मिला वेदों में आदेश है | गौतम बुद्ध को इसकी तहकीकात करनी चाहिए थी | परन्तु इसकी जांच पड़ताल किये बिना जान कारी लिए बिना सत्य और सत्य को जाने बिना ही कहा हम नहीं मानते ऐसे वेद को |
 
जो मानव का काम ही नहीं था उसी काम को गौतम बुद्ध ने किया, फिर बात आई की यह वेद क्या है ? जवाब मिला परमात्मा का मानव मात्र को दिया गया उपदेश है,गौतम बुद्ध ने कहा की ऐसे परमात्मा को नहीं मानता |
 
सभी बातों को जानने के बजाय बिना तहकी किये ही सत्य से मुह मोड़ लिया जो मानवता पर कुठाराघात है | आज मानव समाज में ऐसे लोगों को ही महात्मा की उपाधि दी गई | जो मानवता की हत्या है आज समाज में इन्ही मानवता की हत्यारे को महात्मा कहा जा रहा है |
 
इसी प्रकार जितने भी हैं कसौटी को सब जगह कसते जाएँ तो अपने आप ही पता लगता चला जायगा की मानव कहलाने के अधिकारी कौन है ?
एक छोटा सा ही प्रमाण प्रस्तुत किया है = महेन्द्र पाल आर्य = 10 /8/20 =