मनुष्य कहलाने के लिए अहिंसा जरूरी है ||

मनुष्य कहलाने के लिए अहिंसा जरूरी ||
यह शब्द अहिंसा परमात्मा के सानिध्य को पाने के लिए पहला सोपान है अर्थात मानवमात्र का सम्पर्क परमात्मा पालनहार से है, सृष्टि कर्ता से है, जो प्राणी मात्र का कल्याण करने वाला है | जिसके पास न कोई हिन्दू है, न कोई मुसलमान, उसके नज़र में न कोई ईसाई है, और न कोई बौद्ध या जैन, |
 
अगर किसी का भी नाम लेते परमात्मा तो, उनपर पक्षपात का दोष लगता, यही कारण है की परमात्मा के पास सब मानव बराबर है, एक समान हैं | किसी एक के लिए परमात्मा का कोई भी उपदेश नहीं है | मानव मात्र के कल्याण के लिए ही परमात्मा का उपदेश है – उसके पास कोई अपना पराया नहीं है |
 
परमात्मा ने मानवों को ज्ञान दिया है आदेश और निषेध के रूप में यह करना है यह नहीं करना है | जहाँ तक अपने पराये की बात है, वह मानवों के कर्म पर ही निर्भर है अच्छा कर्म अर्थात परमात्मा के बताये रास्ते पर चलेगा उसके गुणों को अपने जीवन में धारण करेगा तो परमात्मा का सानिध्य लाभ करेगा |
 
परमात्मा के संतान होने के कारण पिता के गुणों का धारण मानव मात्र का कर्तव्य बनता है | इस लिए परमात्मा के सानिध्य को पाने के लिए अहिंसा जरूरी है | सर्वदा,सर्वथा, सभी प्राणियों के प्रति वैरभाव को छोड़कर प्रीतिपूर्वक व्यवहार करना अहिंसा है |
 
अहिंसामय जीवन जीने के लिए मुख्य रूप से तीन साधन हैं मन, वाणी, और शारीर | इन्हीं तीन साधनों के द्वारा व्यक्ति हिंसा करता है, अथवा अहिंसामय जीवन यापन करता है | मुख्य रूपसे अहिंसा योगका साधन है, और हिंसा योग का वाधक है | जो मनुष्य या व्यक्ति योगी बनना चाहता है, और योग के द्वारा ईश्वर का साक्षातकार करना चाहता है, वह हिंसा को छोड़कर सदा अहिंसा का पालन करें |
यहाँ शब्द आया योग, जिसे मुख्य रूपसे जोड़ कहा जाता है,आत्मा, को परमात्मा से जोड़ना – अब सवाल आता है की किसको किसके साथ जोड़ना है उसे जानना जरूरी है,और जोड़ने का सामान,उसके साथ जोड़ने का तरीका |
 
यहाँ तीन बातें मौजूद है -1 किसके साथ जोड़ना = 2 जोड़ने वाला =3 जोड़ने का साधन | इसके बिना जोड़ना सम्भव नहीं है, इसका प्रथम सीढ़ी बताया गया है,अहिंसा , हिंसावादी कभी भी उसके साथ अपने को जोड़ नहींसकता.कारण, अगर आप को जोड़ने का तरीका नहीं मालूम तो कैसे जोड़ पाएंगे ?
 
यह है वैदिक मान्यता, अब इस्लाम की मान्यता है क़ुरबानी पशु काटने पर अल्लाह से प्राप्ति होती है | अल्लाह पशु काटने वाले पर खुश और संतुष्ट होते हैं | जिस पशु को काटा जायेगा उसके शारीर में जितने बाल होंगे उतना ही पुण्य उस पशु के काटने वाले को अल्लाह देंगे | अभी आने वाली ईद बकरीद पशु काटने वाली ईद सामने है |
 
इसी एक बात से मानव कहलाने वाले अंदाजा लगा सकते हैं धर्म और अधर्म क्या है और किसे धर्म कहते हैं और किसे अधर्म ? आज धरती पर अधर्म करके भी लोग अपने को धार्मिक मानते हैं बतलाते हैं | इसपर जरुर विचार करें – धन्यवाद के साथ – महेन्द्रपाल आर्य = 17 /6 /20