मानव कहलाने की बात है , या आचरण करने की ?

मानव कहलाने की बात हैं, या आचरण करने की ?
भारत सरकार ने जो बिल लाया है नागरिकता संशोधन का उसे लेकर भारत के कई राज्यों में हिंसा आग जनि हो रही है ट्रेनों में आग लगाई जा रही है और राष्ट्रीय संपत्ति को नुक्सान पहुंचाया जा रहा है |
यह समझ कर लोग इस काम को कर रहे हैं की यह संपत्ति प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की है संपत्ति है | इसमें हमारा बाप का क्या बिगड़ने वाला है ?
‘इसी मानसिकता को मानवता विरोधी कहा जाता है, कारण हम जिसे नुक्सान पहुंचा रहे हैं वह संपत्ति हमारी है अगर इस बात को जानते और समझते तो शायद इस प्रकार की मानवता विरोधी हरकतें ना करते |
विचारणीय बात यह है की जो लोग विरोध कर रहे हैं भारत सरकार का वह यही तो कह रहे हैं की बाहरी मुल्कसे लोगों के आने वालों को अगर इस देश में जगह दी जाएगी तो हमारी रोजगार में वाधा पहुंचेगी –कारण हम लोगों को ही सरकार रोज़गार नहीं दे पा रही है तो बाहर वालों के आने पर और आभाव ग्रस्त हो जायेंगे इसी सोचने नुक्सान पहुँचाने का बीड़ा उठाया |
यह बात अगर एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक बनकर कहते तो बात थी, पर यह जिम्मेदार नागरिक होने की भी पहचान खो रहे हैं लोग जगह जगह तोड़ फोड़ आगजनी करके | कारण यह तो हम अपने हाथों से अपना ही नुकसान कर रहे हैं, यही सोच मानव को मानव बनाती है, किन्तु कितना बड़ा दुर्भाग्य है की इस राष्ट्र को अगर हम अपना मानतो शायद अपने हाथों से यह अपना नुक्सान नहीं करते |
अगर हम मानवता पर अमल करते तो भी यह काम नहीं करते, अगर हमारे अंदर मानवता बोध होती तो भी यह घिनौनी कार्य करना संभव नहीं था | क्या हमने केवल मानव कहलाने तक ही अपने को सिमित रखें, अथवा मानवता पर अमल करते हुए या मानवता पर आचरण करते हुए मानव होने का परिचय देन नही चाहिए ? सम्पूर्ण भारत को अस्थिर करने के पीछे जो कुछ भी ताकतें काम कर रही है वह केवल राष्ट्र विरोधी ही नहीं किन्तु मानवता विरोधी भी है | भारत सरकार को चाहिए ऐसे लोगों को चिन्नित कर उनपर राष्ट्र विरोधी कानुन के अंतर्गत उन्हें दण्डित करें | जो जिस लायेक है उनके साथ वैसा ही व्यवहार करने को धर्म कहा जाता है | सरकार इसे गंभीरता से लें और इन देश द्रोहियों को सबक सिखाने में शीघ्रता करें | अभी 9 बजे लाइव आ रहा हूँ =
महेन्द्रपाल आर्य = 15/ 12 / 19 =