मानव जीवन की श्रेष्ठ कला है धर्म भाग 8 =

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बंधुओं परमात्मा =वेद= धर्म= और राष्ट्र =यह एक दुसरे के पूरक हैं | एक दुसरे से अलग नहीं हो सकता | यही कारण है की यह मानव मात्र के लिए है इससे मानव अलग नहीं हो सकता |

कारण यह सभी ईश्वर प्रदत्व होने से मानव मात्र के लिए बराबर है, जैसा सूरज प्रकाश सबको दे रहा है और गर्मी भी | वायु भी सब को बराबर, प्रकृति के सभी वस्तुएं सब को समान मिल रहा है |

ईश्वर प्रदत्व जितना जो कुछ भी बना है उसका भोग प्राणी मात्र बिना भेद के परमात्मा ने भोगने को दिया है | आश्चर्य की यह भी है जबसे यह बनी इसमें कोई भी परिवर्तन नहीं आया | और ईश्वरीय ज्ञान में भी कोई परिवर्तन नहीं आया, और ना आना संभव, ना किसी के लिए लाना संभव |

किन्तु अल्लाह को ज्ञान बदल बदल कर देना पड़ा कभी तौरात, कभी जबूर, कभी इंजील, फिर कभी कुरान | यह ज्ञान ही अधूरी गई तभी तो बदलना पड़ गया | और यह ज्ञान ईश्वरीय ना होने का प्रमाण इनकी किताब ही है |

जैसा पहला प्रमाण {1} इबने कसीर कुरान भाष्य {2} कन्जुल ईमान कुरान भाष्य {3} जलालाइन कुरान भाष्य {4} तह्फिमुल कुरान भाष्य {5} नुरानी कुरान कुरान भाष्य {6 } तफसीरे मायरेफुल कुरान कुरान भाष्य {7} अह्सानुल बयाँन कुरान भाष्य {8 } तफसीरे जकारिया कुरान भाष्य {9 } तफसीरे हक्कानी कुरान भाष्य {10} तफसीरे फी” जलालील कुरान भाष्य { 11} तफसीरे तबारी कुरान भाष्य {12} तफसीरे उस्मानी कुरान भाष्य = यह 12 किताबों को सामने रखकर मैं सिद्ध कर दिखाऊंगा यह कुरान कलामुल्लाह नहीं है |

जब की हदीसों को मैंने अभी बताया नहीं | कौन आ रहा है आ जाव मैदान में दुनिया वालों को भी सत्य और असत्य का ज्ञान करदो | विडिओ विडिओ खेल बन्द करो और सामने बैठ कर डिबेट करके कुरान को कलामुल्लाह सिद्ध कर दिखाव | महेन्द्रपाल आर्य =11 /11 / 0 18, सुबह 11 बजे ही आ व कौन आता है सामने आ व |