मानव मात्र का जीवन सत्य से जुडा होना चाहिए ||

मानव मात्र का जीवन सत्य से जुडा होना चाहिए ||
मानव हो कर सत्य को नहीं अपनाता वह मानव कहलाने के लायेक ही नहीं है सत्य सनातन वैदिक धर्म का आधार शिला है सत्य |
 
ऋषि दयानंद जी ने आर्य समाज के जो नियम बनाये हैं उन दस नियमों में 5 बार सत्य का उच्चारण किया है, अपनी अमर ग्रन्थ का नाम सत्यार्थ प्रकाश रखा, इससे स्पष्ट है की ऋषि कितने सत्य प्रिय थ
 
ऋषि पतंजली ने सबसे पहला शब्द अहिंसा लिखा है दूसरा शब्द सत्य लिखा है अर्थात अहिंसा और सत्य मानव जीवन का लक्ष्य होन चाहिए | जो मानव कहलाता है और इन दोनों बातों से अलग है तो वह कभी मानव कहलाने का हक़दार नहीं बन सकता |
 
कुछ लोग समझते हैं मैं किसी का विरोध कर रहा हूँ जो ऐसे सोचते हैं वह गलत फहमी के शिकार हैं | मैं किसी का विरोधी नहीं हूँ पर असत्य और अधर्म का विरोधी जरुर हूँ |
ऋषि दयानंद की मान्यता है की सत्य को बोलना और बुलवाना, तथा असत्य को छोड़ना और छुड़वाना मैं अपना कर्तव्य मानता हूँ | मेरा भी मकसद और उद्देश्य यही है जिस कारण मैं सत्य प्रचार के लिए काम कर रहा हूँ मेरा कोई मत भेद व्यक्तिगत किसी से नहीं है सिर्फ और सिर्फ असत्य और अधर्म से ही विरोध है यह बातें सब को याद रखनी चाहिए | महेन्द्र पाल आर्य -20 /7 /21