मानव समाज में झगड़ा का कारण बना धर्म

आज मानव समाज में झगड़ा का कारण बना धर्म
आज विशेष कर भारत वर्ष में,कई वर्षोंसे, कुछ आतंकवादी संगठनों द्वारा यत्र तत्र,हमला हो रहा उसका मुख्य कारण ही धर्म है | इसबात को कोई मानें या न मानें इसे उजागर किया है कुछ आतंकवादी संगठनों के सरगनाओं ने | जो रोजाना हम सभी लोग दूरदर्शन द्वारा देख और सुनरहे हैं, मौलाना मसूद अजहर इस बात को बखूबी सुना रहे थे, की अल्लाह तायला हमें पाल रहे हैं और पालते रहेंगे आदि | यहाँ तक की सभी सरगना इस्लाम का हवाला दे रहे हैं, कुराने करीम का हवाला दे रहे हैं, रसूलेअकरम हज़रत मुहम्मद {स} का हवाला दे रहे हैं और यह भी कह रहे हैं, की उनका जीवन इस्लाम के लिए है, अल्लाह हमें जन्नत नसीब करायेंगे आदि |
अब सवाल यह उठता है की भारतीय कुछ इस्लामिक धर्मगुरु, मौलाना महमूद मदनी, अहमद बुखारी जैसे दिल्ली जामा मस्जिद के इमाम, और भी कई इस्लामिक विद्वानों ने दिल्ली के जन्तर मनतर पर धरना में बैठे थे, यही कहते नज़र आ रहे थे की इस्लाम में दहशतगर्दी के लिए कोई जगह नही है ? अर्थात इस्लाम दहशतगर्दी की इज़ाज़त नही देता, या इस्लाम दहशतगर्दी से रोकता है आदि |
यहाँ आप लोगों ने ज़रूर देखा होगा, ऊपर दर्शाए गये मौलानाओं के वक्तव्य को, वहलोग इस्लाम के लिए अल्लाह, और अल्लाह के फरमान और अल्लाह के पैगम्बर नबी करीम के बताये रास्ते पर चलरहे हैं | और यह दोनों मौलाना कह रहे हैं इस्लाम में इसकी गुन्जायश ही नही है ? क्या इस्लाम में दो प्रकारकी बातें हैं अथवा इस्लाम के बारे में इन मौलानाओं के बयान बाजी में सही किन लोगों का है ? मौलाना मसयुदअजहर के अथवा, महमूद मदनी, व अहमदबुखारी का ? हमें किन की बात सही माननी चाहिए ? एक प्रश्न और खड़ा हो गया की यह लोग जब इस्लाम के ही दावेदार हैं, नाम इस्लाम का ही ले रहे हैं, तो हमें अब इस्लामिक शिक्षा को जानना पड़ेगा की सही कौन कह रहे हैं ? अथवा इस्लामिक शिक्षा के अन्तरगत बयान किनका है ? जो कुरान के अनेक जगह अल्लाह का हुक्म है इस्लाम को फ़ैलाने में गैर इस्लामियों से लड़ो तुम 20 मुसलमान 200 काफिरों पर भारी पड़ोगे | सूरा अनफाल=65 देखें |
يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى الْقِتَالِ ۚ إِن يَكُن مِّنكُمْ عِشْرُونَ صَابِرُونَ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ يَغْلِبُوا أَلْفًا مِّنَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ [٨:٦٥]
ऐ रसूल तुम मोमिनीन को जिहाद के वास्ते आमादा करो (वह घबराए नहीं ख़ुदा उनसे वायदा करता है कि) अगर तुम लोगों में के साबित क़दम रहने वाले बीस भी होगें तो वह दो सौ (काफिरों) पर ग़ालिब आ जायेगे और अगर तुम लोगों में से साबित कदम रहने वालों सौ होगें तो हज़ार (काफिरों) पर ग़ालिब आ जाएँगें इस सबब से कि ये लोग ना समझ हैं |

दूसरी बात यह भी है की इस्लाम की शुरुआत अरब के शहर मक्का, और मदीना से है, जो आज भी इस्लाम के मानने वाले हर वर्ष उसी मक्का और मदीना का परिक्रमा करने के लिए जाते हैं, जिसे हज कहा जाता है | वहां तक जाने के लिए अपने पास पूरा पैसा ना हो काफ़िर सरकार से अनुदान लेकर ही जाना क्यों ना पड़े, उसे इस्लाम का स्तंभ मान कर जान कर ही करना पड़ेगा | तो जब इस्लाम की शुरुयात उसी अरब से है तो वहां इस्लाम के जानकार धर्म गुरु भी होंगे ज़रूर ? उन इस्लामिक धर्म गुरुओं ने कभी उन आतंकवादिओं के पक्ष में अथवा विपक्ष में कुछ कहा है ? सही पूछिए तो हमारा भारतवर्ष आज 20 या 22 वर्षों से इन इस्लामिक आतंकवादिओं को झेल रहा है, आज तक उन अरब देश के इस्लामिक धर्म गुरुओं ने उन इस्लामिक अतंकवादियो के खिलाफ कभी किसी ने कुछ भी नहीं कहा | अब हमें मालूम कैसे हो की सही कौन बोल रहे हैं, मौलाना मसयुदअजहर, अथवा महमूद मदनी व अहमद बुखारी ?
इसका सही जवाब है की महमूदमदनी और अहमद बुखारी सरीखे इस्लामिक धर्म गुरुओं ने भारत के लोगों को वर्गला रहे हैं, इन दोनों नेता ने भारत के हिन्दुओं का या भारतियों के हमदर्द भी बनना चाहते हैं और इस्लामी भी बन कर रहना चाहते हैं |
कैसे देखें मैं प्रमाण दे रहा हूँ, की आज तक जितने भी इस्लामिक आतंकवादी पकड़े गये उन लोगों के खिलाफ इन साहिबानों ने कुछ भी नही कहा | चाहे वह यही मौलाना मसयुदअजहर के लिए हो, हाफिजसईद के लिए हो, ओसामाबिनलादेन के लिए हो, याकूब मेमन व टाईगर मेमन के लिए हो,कस्साव के लिए हो, या फिर पिछले दिन पकडे गये गाजियाबाद जिला के पिलखवा का रहने वाला अब्दुल करीम टुंडा, जो एक हाथ लम्बी दाढ़ी गोल टोपी के साथ पकडे गये, यह मदनी साहब, और मियां बुखारी साहब इन लोगों से यह किस लिए नही कह सके, की इस्लाम में दहशतगर्दी नहीं है तो तुम लोग इस पवित्र इस्लाम को बदनाम किस लिए कर रहे हो ?
आज सम्पूर्ण जगत में इस्लाम के नाम से आतंकवादियों ने इसी इस्लाम नामी धर्म के नाम से मानव समाज को भयभीत किया है | और मानव समाज को धर्म के नाम से एक दुसरे को डरा धमका रहे हैं | यहाँ तक के कत्लेआम कर भी यही लोग अपने को धर्मिक बता रहे हैं, जो की सरासर यही काम धर्म विरुद्ध है | कारण धर्म का काम है मानव से मानव को जोड़ना, अब जो धर्म मानव को मानव से जोड़ता हो, उसीके नाम से मानवों को कत्लेआम कर भी इस्लाम को धर्म क्यों और कैसे बताया जा रहा है ? इसी पर मैंने डॉ असलम कासमी को जवाब देते हुए एक पुस्तक सरल हिन्दी में कुरान और वेद का हवाला दे कर लिखा ई | जिस पुस्तक का नाम है अक्ल पर दखल ना देने वाले धर्म और मज़हब के भेद को क्या जानें ? इस के साथ मेरे द्वारा दियागया प्रवचन इन्दौर के गाँधी हाल में, आतंकवाद का कारण और निवारण पर, जो youtube में आप लोग सुन सकते हैं | आप लोगों का यह दायित्व बनता है सही क्या है और गलत क्या है इसका निर्णय लेना, अर्थात धर्म क्या है और आतंकवाद क्या है इसकेजन्मदाता कौन है उसे सही सही जानना और तदनुसार अपने आप में प्रयास करना इस राष्ट्र को इन आतंकवादीयों के हाथ से कैसा बचाया जाये | धन्यवाद के साथ {महेन्द्रपाल आर्य =वैदिकप्रवक्ता}दिल्ली