मुझे गर्व है  की मैं पाखण्ड को छोड़ प्रकाश में आया ||

मुझे गर्व है  की मैं पाखण्ड को छोड़ प्रकाश में आया ||

आर्य कहलाने वालो ध्यान से सुनना मेरी बात यदिवा मै अपनी पुस्तक में लिखा हूँ फिर भी आप लोगों को बताना मेरा कर्तव्य है | मै 1983 में इस्लाम छोड़ कर जाँच पड़ताल करने के बाद ही सत्य सनातन वैदिक धर्म को अपनाया |

उसके बाद मैंने इसी सत्य को अपने उपर लागु करने के लिए घर और बाहर से दुश्मनी ली है, मैंने इस्लाम को छोड़ा सिर्फ और सिर्फ उसमे अन्ध विश्वास, और पाखण्ड भरा होने के कारण,  प्रमाण भी देता चलूँ जैसा, किसी के ऊँगली की इशारे से चाँद का दो टुकड़ा होना | अल्लाह बिना होस्पिटल बिन डाक्टर बिना दावा बिना पट्टी के आदम के पसली निकाल कर किसी महिला को बनादेना जो उसकी पत्नी बनी बिना शादी कराए पत्नी बना दिया अल्लाह का यही काम होना उचित है ?

जन्नत के फल को खाना अल्लाह को पता न लग पाना, जिस अल्लाह को सब कुछ जानने वाला भी बताया कुरान में |  जिस जन्नत में खाने पीने की मनाही नहीं जो सामान है सब खाना और पीना किन्तु मल, मूत्र करने के लिए इन जन्नती के शारीर में छिद्र न होना अर्थात जन्नत में शौचालय नहीं है और न जाना पड़ेगा |

अब आदम पति पत्नी उसी शारीर को लेकर धरती पर आये, खाया पीया संतान भी बनाया, जिस शारीर में छिद्र नहीं उसी शारीर से संतानका बनाना क्यों और कैसा सम्भव है ? इस्लाम में इन सवालों का जवाब नहीं है और मात्र आँख बंद कर के इस असत्य और अंध विश्वास को मानने का नाम ही इस्लाम है |

इसे मेरे से स्वीकारना सम्भव नहीं हुवा सत्यार्थ प्रकाश पढने के बाद, बहुत सवालों को जन्म दे दिया मेरे मन में जवाब कहीं से मिला भी नहीं | और भी पाखंड भरा है देखते जाएँ यही सभी सवाल कुरान और बाइबिल पर किया गया |  यह दोनों ही किताब सवालों के घेरे में है |

फ़रिश्ता का कापी लेकर पाप और पुण्य का लिखना = अल्लाह का किसी इन्सान को बन्दर बनादेना = किसी की लाठी को जमीन में पटकने पर सांप बन जाना = किसी की लाठी को पत्थर पर मारने से उसमे से चश्मा फौवारा निकलना, सौ साल में गधा का कंकाल बनजना–और उसी सौ साल मे रखा खाने का सामानों का ख़राब न होना समुंदर को फाड़ कर लोगों को हलाक कर देना= इस प्रकार अनेकों सवाल खाडा है |

यह सब काम अल्लाह का है = मरने के बाद कबर में फरिश्तों का मुर्दों से सवाल जवाब करना=अरबी जुबान हो जाना =दुनिया कभी भी बनी हो तबसे आज तक जो मरते आये,सब को आने वाली कयामत के दिन  एक साथ उठाना,आदि अनेक प्रमाण है |

जब ऋषि दयानन्द का सत्यार्थ प्रकाश उर्दू वाली मैंने पढ़ी –इस्लाम के आलिमों से सवाल किया –किसी से उत्तर देना संभव नहीं हुवा | तो उस अन्ध विश्वास से मै अपना पिण्ड छुड़ाया | मात्र इस्लाम ही नही किन्तु ऋषि ने सभी अन्धविश्वास और पाखंड से मानव मात्र को बाहर निकाला  |

ऋषि दयानन्द ने जिस अन्धकार और पाखण्ड से मानव समाज को बाहर निकाला आज ऋषि की संस्था आर्यों को कर्म कांड के लिए  ऋषि ने दो पुस्तकों में दिया, संस्कार विधी, और पञ्चमहा यज्ञ विधी | एक में पांच महा यज्ञ, ब्रहमयज्ञ = देवयज्ञ =पित्रीयज्ञ=वलिवैश्यदेवयज्ञ =और अतिथियज्ञ | और संस्कार विधि में गर्भाधान से =अंतेष्टि तक -16 =ही संस्कार है

सबके लिए –तरीका मन्त्र का चयन आदि कही भी ढूंडने की जरूरत नहीं कुछ भी, मैंने इन सबको देख जान मान परख कर ही उन पाखंड को छोड़ा |

पर यहाँ उससे भी ज्यादा पाखंड को देख कर मै बहुत दु:खी हुवा  की हमने क्या पढ़ा और यह क्या कर रहे आर्य लोग ? यह पद्धति दयानन्द का नहीं जो मन्त्र यह बोल रहे हैं यह सभी  दयानन्द की लिखी पुस्तक से बाहर की ही होगी यह मान्यता किनकी है ?

दयानन्द को भी पीछे छोड़ने की होड में यह पंडा गिरी किस लिए ? पाखण्डी लोगो यज्ञ से अगर मनों कामना सिद्ध होती है तो जाव पाकिस्तान की बम बारी को यज्ञ से रुकवा दो -तब तो जानेंगे की यज्ञ से यह कामना भी सिद्ध हो रही है ? महेन्द्रपालआर्य =वैदिकप्रवक्ता=दिल्ली=8  /9  /21