मुझे मौलाना कहने वालों को जवाब |

 

 

आर्य हिमाँशु मोहन

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यदि आप संघ के कार्यकर्ता हैं और विधर्मियों के प्रश्नों पर पंचर पंचर चिल्लाने के अलावा और कुछ नहीं कर पाते तो एक बार सत्यार्थ प्रकाश अति शीघ्र पढ़ें

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स्नेहाशीष हिमाँशु जी जब से आप मेरे साथ जुड़े है, मैंने आप को सत्यार्थ प्रकाश के साथ परिचय और देव ऋषि दयानन्द जी के साथ परिचय कराया | आपने अपने इतने कम समय में उसी सत्यता को जाना और पहचाना है, मात्र जाना ही नहीं अपितु अपने जीवन में अक्षर स: उसे उतारा है | और आपने सत्यता को उजागर करने में लगे हैं, मेरा परिश्रम सफल करने में आप अगसर हैं | आप के माता पिता का संस्कार, अपने शिक्षा गुरोंओं के दिए गये संस्कार और RSS द्वारा संचालित नानिताल के विद्यालय में आप को मिला राष्ट्रीयता का पाठ | यही आप जे जीवन को सफल से सफलतम बनने बनाने का एक मात्र आधार है | परन्तु ईश्वर और धर्म के बारेमें कोई शिक्षा आप को नहीं मिली थी, ईशानुकम्पा से मैंने आप को जोड़ा ऋषि दयानन्द जी के वैदिक विचारों से और आप ने ऋषि के वैदिक मान्यता को अपने जीवन में उतारा है |

आप मेरे सानिध्य पाने के बाद आपने अपना समय अरबी और संस्कृत पढ़ने लगे हैं, मैं आप को अरबी सिखा कर एक योग्य शिष्य जैसा गुरु विरजा नन्द जी को दयानन्द जी मिले थे ठीक उसी भांति आप मुझे मिले हैं | आप जैसा ही RSS के संस्कारित प्रोफेसर यशवन्त मेहता जी को भी मैंने ऋषि दयानन्द और वेद व वैदिक मान्यता के साथ जोड़ पाया | जोड़ा तो हजारों को किन्तु मुख्य रूपसे RSS से सम्पर्क रखने वाले उल्लेख योग्य आप दो हैं | जिन पर मुझे गर्व है परमात्मा आप को और शक्ति दे अरबी सिखाने में मेरी मदद रहेगी आप के साथ एक इंजीनियर होने के बाद भी जो लगन सत्य असत्य को जानने में आप की रूचि का मैं सराहना करता हूँ | परमात्मा और शक्ति दें आप को सत्य के प्रचार प्रसार के लिए आप और आगे बढ़ें मेरी शुभ कामना आप के साथ है | मेरे किये कार्य का मुकाबला करने की हिम्मत अनेक धुरन्धर कहलाने वालों में नहीं है, यही कारण है यह इर्शालू जीव मेरा विरोध भी करते हैं | कुछ भी हो आप आगे बढ़ें इसी आशाके साथ = पण्डित महेंद्र पाल आर्य | 31 जुलाई 2018 =प्रातः 7 ,45