यह है संस्कार की बात, शायद लोगों को जानकारी ना हो ?

यह है संस्कार की बात, शायद लोगों को जानकारी ना हो ?
राहुल गांधी प्रधानमंत्री जी को फेकू कहा यह संस्कार राहुल ने अपनी इटली वाली माँ से पाया,अगर राहुल गाँधी की माँ भारत की होती तो नहीं कह पाता।
 
कल शाम 7 बजे मैं देख रहा था IBN 7 का न्यूज़ प्रोग्राम,देख रहा था | जिसमें कांग्रेस की तरफ से दिल्ली विश्वविद्यालय का एक प्रोफेसर बैठा था | जो राहुल गाँधी की यह फेकू शब्द प्रधानमन्त्री जी के लिए कहने को जायज ठहराया है |
 
देश का दुर्भाग्य ही कहा जायगा की जब भारत की राजधानी के विश्वविद्यालय में पढाने वाले प्रोफेसर ही कू संस्कार वाले हों, तो फिर कन्हैया जैसे पढने वाले देशद्रोही नही बनेंगें तो राष्ट्र भक्त बनने की आशा हम किनसे करें ?
 
जब बनाने का निर्माण केन्द्र ही बिगड़ जाये तो निर्मित सामानों का सही होना अथवा बनना सही कैसे संभव होगा भला ?
 
हमारी संस्कृति में मानव बनने के लिए तीन केन्द्र ऋषियों ने बताया है, जिसे हम बिलकुल प्राथमिक शिक्षा मानते हैं | जिसमें बताया गया, मात्रीमान, पितृमान, आचार्यमान पुरुषो वेदः | अर्थात मानव निर्माण के लिए तीन की जिम्मेदारी होती है बताया गया | जिसमें पहला नाम माँ का है + दूसरा नाम पिता का बताया गया + और तीसरा नाम आचार्य का है यह शास्त्रीय मान्यता है |
 
जब पहला नाम माँ का है, और माता निर्माता कहा है यानि माँ ही निर्माण करती है | पिता सिर्फ माँ को देता है निर्माण करो,माँ को कहते हैं,पिता खुद निर्माण नही कर सकते | यह निर्माण का काम माँ का है, एक माँ अपने मनके मुताबिक जैसा चाहेगी संतान को ठीक वैसा ही बनायेंगी | माँ चाहे तो सन्त बनादे,माँ चाहे तो राष्ट्रभक्त बनादे, माँ चाहेतो राष्ट्र विरोधी बनादे | यह सभी जिम्मेदारी पहला गुरु माँ को ही बताया गया है |
 
दूसरा गुरु है पिता, जब कि पिता ने ही माँ को दिया है,, फिरभी पिता अपना नम्बर प्रथम नही ले पाए माँ का ही नम्बर प्रथम है |
 
तीसरा नम्बर है गुरु का, पढ़ाने वाले आचार्य का | यह तीन गुरु ही टीक होना चाहिए फिर मानव का निर्माण करना या होना संभव है | वैदिक संस्कृति में इसे संस्कार कहा है बताया गया है | यही कारण है कि माँ के उदर में ही तीन संस्कार होता है | यही ऋषि परम्परा है, वैदिक परम्परा है,भारतीय परम्परा है |
 
अर्थात,माँ का लाड़ना {लाड करना } पिता का पालना {पालन पोषण करना } और गुरु का ताड़ना { डाट ना } निर्माण के यही केंद्रबिंदु है हमारी परम्परा में |
 
अब जिस माँ का जन्म इटली में हुवा हो, और रंगरलियाँ, या प्यार मुहब्बत कर, जिसे अंग्रेजी में { lov} कहा गया है, उसी परम्परा में शादी की हो वह माँ क्या जानेगी वैदिक संस्कार को | दूसरी बात यह भी तो होगी उस खानदान का भी इतिहास यही तो है | राहूल गाँधी की दादी की शादी भी कहाँ और कैसी हुई थी संस्कार वहां से भी तो मिलना है आदि |
 
सभी बातों को बटोरकर देखेंगे तो यह संस्कार राहुल गाँधी को तो अपनी विरासत में मिली है | जो उन्हों ने भारत के प्रधान मंत्री जी को फेकू कहा है उसे नही पता की वह किसके लिए क्या कह रहे हैं ? कारण यह सभ्यता व संस्कार तो उसे बचपन से ही नही मिली, फिर राहुल गाँधी क्या जान सकेगा भला बड़ों से कैसी बातें की जाती है ?
 
बोलने के लिए मात्र डेढ़ या दो साल ही लगते हैं, जन्म लेने के बाद से, किन्तु क्या बोलना है उसे सीखने में पूरी जिन्दगी लगजाती है या लगाना पड़ता है |
मैंने कल केजरीवाल के लिए भी लिखा था, आज मैं फिर सम्पूर्ण भारत वासियों से यही कहूँगा की भारत के सभी प्रान्तों से सभी थाने में FIR दर्ज होना चाहिए और सभी प्रान्तों के उच्चन्यालय में राहुल गाँधी और केजरीवाल पर मानहानी का केस दर्ज होना चाहिए |
 
सभी भारतियों को मिलकर इन्हें सबक सिखाना चाहिए ता की आगे पाठ पढने में गलती ना करें | हम सभी के लिए यह इम्तेहान की घडी है | नोट बदली को लेकर सम्पूर्ण भारत में जो कुछ भी हुवा है और हो रहा है हम भारतियों को इस से सीख लेनी चाहिए और यह पहचान भी कर लेनी चाहिए की कौन, सी राजनीती पार्टी है भारत में, जिनमें राष्ट्र की चिंता है,पार्टी की नही ? आनेवाला समय में अगर हम उन राष्ट्र वादी पार्टी को चुनें जिन्हों ने सिर्फ राष्ट्र के लिए काम करने की प्रतिज्ञा ली है | और मात्र अपने इसी भारत को फिरसे सोने की चिडया बनाने के लिए काम करना चाहते हैं हम उन्हें जीत दिलाएं और राष्ट्र धर्म का पालन करें |
महेन्द्रपाल आर्य =वैदिक प्रवक्ता =दिल्ली = 17/12/16 =“