वसीम अहमद को दूसरा जवाब

Wasim Ahemed22 hours agoHighlighted reply
Mahender Pal Arya… 1no sawal se 4no sawal ap ka matlab ek hi hai..
..AP KO PEHLE BHI BATA CHUKA INSAN OR JIN KO ALLHA NE YE ZINDAGI EK IMTEHAN K LIYE DI HAI..
….OR IBLIS BHI EK JIN HAI…..
AUR US K SATH ALLHA NE HUM INSAN OR JIN KO YE TAQAT DI OR ILM DIYA K HUM ACHCHE BURE KA FAISLA KUDH KAR SAKE…
….AUR JO KUCH INSAN OR JIN SATH HOA HAI YA WO KERTA HAI US ME KUCH HISSA ALLHA BANDE KO BHI IKHTEYAR DIYA HAI…
…ALLHA K HUKM SE…
AUR YE ZINDAGI HAQIQAT NAHI ASAL ZINDAGI AKHIRAT KI HAI ….
YE ZINDAGI BAS EK IMTEHAN HAI….
… IS ME HAME KUCH KUDRAT ALLHA NE DI HAI TA KE HUM ACHCHE BURE KA FAISLA KUDH KARE…
…IS KA YE MATLAB NAHI ALLHA NAHI JANTA HUM KIYA KARE GE KIYA KARNE WALE HAI..
YE BAS EK AAZMAISH KA WAQT HAI..
JO ACHCHA KARE GA USE ACHCAH MILE GA
JO BURA KARE GA USE BURA…
….I HOPE YOUR ANS IS COMPLIT…
………….. ..INSHAALLHA………
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Wasim Ahemed
मियां वासिम अहमद मेरा सवाल का जवाब कहाँ और क्या है तुमने लिखा है इन्सान और जिन को अल्लाह ने एक इमतेहान के लिए पैदा किया है | तुम अकाल के दुश्मन हो और तुम्हें ज्ञान ही नहीं है की इमतेहान किसे लेना पड़ता है ? जो सर्वज्ञ होगा {सबकुछ जानने वाला } होगा उसे कभी इम्तेहान लेने की जरूरत ही नहीं होगी, तुम्हें यह अकाल की नहीं है और ना तुम जानते हो इस सत्यता को | कारण इस्लाम की मान्यता यही है वह इम्तेहान लेता है | जैसे हज़रत इब्राहीम का लिया ? अल्लाह ज्ञानी नहीं है और ना वह जानता है ज्ञान किसे कहते हैं और ज्ञान होता क्या है ?
يَمْحُو اللَّهُ مَا يَشَاءُ وَيُثْبِتُ ۖ وَعِندَهُ أُمُّ الْكِتَابِ [١٣:٣٩]
फिर इसमें से ख़ुदा जिसको चाहता है मिटा देता है और (जिसको चाहता है बाक़ी रखता है और उसके पास असल किताब (लौहे महफूज़) मौजूद है | सूरा राद 39

नोट :- जो अच्छा और नेक इन्सान होगा वह कभी अपनी बात कहकर, फिर उसे टालेगा नहीं जो कहदिया वह पत्थर की लकीर जैसी होगी | दुनिया में लोग उसका मजाक उड़ायेंगे | कभी कुछ और कभी कुछ कहने वाला इन्सान को लोग बुरा भला कहेंगा | किन्तु अल्लाह जिसे चाहता है कहकर हटा देता है |

इसलिए याद रखना तुम जिस कुरान की बात कर रहे हो की अल्लाह इम्तेहान लेता है तुम्हारा यह कुरान असली नहीं है असली कुअरण तो लौहे महफूज में मौजूद है |

قَالَ أَنَا خَيْرٌ مِّنْهُ ۖ خَلَقْتَنِي مِن نَّارٍ وَخَلَقْتَهُ مِن طِينٍ [٣٨:٧٦]
इबलीस बोल उठा कि मैं उससे बेहतर हूँ तूने मुझे आग से पैदा किया और इसको तूने गीली मिट्टी से पैदा किया | सूरा स्वाद 76 =

जिस इबलीस की बात तुमने की है =वह अल्लाह से बात कर रहा है =इबलीस बोल उठा कि मैं उससे बेहतर हूँ तूने मुझे आग से पैदा किया | आदम से बेहतर हूँ तूने मुझे आग से पैदा किया |
मैं पूछता हूँ इसलाम जगत के आलिमों से आग से बोलने वाला बात करने वाला पैदा कैसे होसकता है ? आग से पैदा होगा धुंवा -कोयला – राख | तुम्हें यह अकाल ही नहीं की किस से क्या बनता है ?

सामने आकर देखो सवालों का जवाब देना इस्लाम की बीएस की बात नहीं है यही कारन बना की इसलाम जगत के आलिम मेरे से दूर रहते हैं सामने आना नहीं चाहते उन्हें पता है की जवाब देना संभव नहीं | तुम जैसे मुर्ख लोग ही मेरे सवालों को सुनकर तिल मिलाते हो | और अनाप शनाप कहने लगते हो सामने आने पर पता लगेगा | मैं प्रतीक्षा में हूँ आ जाव सत्य और असत्य को हम जानें सत्य को दुनिया वालों के सामने उजागर करें दुनिवालों का भला हो | महेन्द्रपाल आर्य =21 x 17 =