वह लोग कितने जाहिल हैं जो यह कहते हैं ||

वह लोग कितने जाहिल हैं जो यह कहते हैं ||
एक चेनल में यह लिखा की हिन्दुओं के पैसे अच्छे लगते हैं हिन्दू धर्म अच्छा नहीं लगता |
यह लोग कितने मुर्ख है देखें जिन्हें धर्म का ध नहीं आता वह यही लिख रहे हैं, उनसे पहला सवाल तो यह है की पैसा माँगा कौन और किससे माँगा ?
 
कोई पैसा देता है वह सत्य के प्रचार प्रसार के लिए देते हैं, वेद प्रचार के नाम से देते हैं | वेद प्रचारक कब कहा किस से कि हिन्दू धर्म के प्रचार के लिए पैसा दो ? और अगर पैसा दिया तो वह स्वेच्छा से ही दिया,इसमें हिन्दू धर्म कहां से आ गया?
यह मुर्ख लोगों को यह भी नहीं मालूम की धर्म हिन्दू है या धर्म मुसलमान है ? जिन्हें इसी का ही ज्ञान नहीं है वह धर्म की बात करने लगे ? जो मानव समाज में झूठ बोलकर समाज को धोखा दे रहे हैं की मुझे काली का दर्शन हुआ |
 
जो लोग दुनिया को सच बताने के बजाए झूठ बोलकर कमा रहे हैं वह हिन्दू धर्म के ठेके दार बने हैं | झूठ क्या है वह देखें काली का दर्शन होना कितना बड़ा झूठ है यह देखें ? की इससे जनमानस को क्या लाभ है पहली बात ? काली का दर्शन हुआ है मुझे यह कहना समाज में क्या दर्शाता हैं ?
 
की मैं कितना बड़ा साधक, या साधिका हूँ ? तो मानव कहलाने वाले साधना अपनी आत्मिक उत्थान के लिए करते हैं या जन साधारण के लिए ? जो लोग यह कहते हैं की मुझे काली का दर्शन हुआ पहला सवाल तो यह होगा की दर्शन है क्या चीज ?
अगर किसी को काली का दर्शन हो तो उस काली को जो परमात्मा मानते हैं यही शब्द ही गलत होगा काली अगर परमात्मा होती तो उन्हें देवी किस लिए कहा जाता ?
जो लोग परमात्मा और देवी देवता का भेद को नहीं जानते है वह धर्म के ठेके दार बन बैठे | हमारे समाज में यह बहुत बड़ी भूल है की हमें सत्य असत्य का ज्ञान ही नहीं है और न धर्म अधर्म का ही ज्ञान है |
झूठ बोलकर समाज को धोका दे रहे हैं और धर्म को हिन्दू और मुस्लिम बता कर मानव समाज को सत्य के बजाये अन्धकार में ले जा रहे हैं | ऐसे धर्मिक दूकानदारों से सावधान रहना वरना यह आप को भी ले डूबेंगे | महेन्द्र पाल आर्य 26/7