|| सत्य के लिए जी रहा हूँ, मरूँगा भी सत्य के लिए ही  ||

|| सत्य के लिए जी रहा हूँ, मरूँगा भी सत्य के लिए ही  ||

जिन सत्य  के लिए अपना घरबार सब कुछ छोड़ा की सत्य क्या है जानने, के लिए,  और पूरी दुनिया को दिखा भी दिया की सत्य के सामने कोई जुबान नहीं खोल सकता | दुनिया ने देख भी लिया की सत्यका मुकाबला करना संभव नहीं |  इसी लिए शास्त्र की मान्यता है सत्यंमेव जयते |

जिस काम को कर. न मालूम कितने ही हिन्दू घराने वालों को मुस्लमान होने से बचाया | और कितने ही मुसलमानों को वैदिक धर्मी बनाया | कितने हिन्दू लड़कियों को मुसलमानों के चंगुल से छुड़ाया है |

आर्य समाज और हिन्दू संगठनो के माघ्यम से यह काम करता आ राह हूँ, इन तथाकथित रट्टू तोता जो मै अपनी पुस्तक में भी लिखा हूँ | मै नहीं जान पाया की जिनके लिए या जिस समाज के लिए मै काम कर रहा हूँ, उन्हों ने इस काम को छोड़  दिया, जो इस समाज की पहचान बनी दुनिया में |

इस काम में हिन्दू कहलाने वालों की मर्यादा बचा दिया ऋषि दयानन्द जी ने, इस कार्य को मैंने अपना लक्ष माना, मेरे काम केवल भारत में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण दुनिया में चलरहा है, मेरे सिखाये बताये लोग इसे करते जा रहे हैं |

बहुतों ने मेरे बारे में बकवास लिख कर लोगों को भ्रमित करना चाहा, मुझे आर्य समाज का पालतू बताया जा रहा है,जब की मै किसी आर्य समाज से जुडा भी नहीं हूँ – हाँ वेद विचार से जुडा हूँ | सार्वदेशिक सभा में 1983 से 1994 तक सभा का प्रचारक रहा,  मुझे 6 वर्ष अर्याप्रतिनिधि सभा बंगाल में नियुक्त किया गया था  उसके बाद से मै स्वतन्त्र प्रचारक हूँ |  1994 से  वेद प्रचारक ही हूँ किसी सभा से नहीं स्वतंत्र प्रचारक हूँ |

किन्तु सच्चाई यह है की मै किसी के साथ नहीं हूँ, अपितु इन तथाकथित आर्य कहलाने वालों को चाहिए यह था की एक दुसरे समाज से आकर काम कर रहे है उन्हें सहयोग करना चाहिए, जिस समाज से मैं आया शायद उनका विरोध इतना नहीं हुवा जितना की यह तथा कथित आर्य कहलाने वालों ने मेरा विरोध किया | यह सब ईर्षालू जीव हैं नहीं चाहते किसी का सम्मान हो |  आर्य सम्मेलन हॉलैंड में मेरे हाथ से माइक ही छीन लिया था जब मैं बोल रहा था |

वरना मेरा विरोध किस बातकी हैं बताएं क्या मैंने किसी के घर डाका डाला ? फिर यह बकवास किसलिए ? आर्य समाज पहाड़ गंज में कई वर्ष पहले मैंने एक को वैदिक धर्मी बनाया, जो इस्लाम जगत का सबसे बड़ा मदरसा जामे अजहर से पढ़ कर आया | मेरेसे डिबेट में हार गया, जिसको मैंने वैदिक धर्मी बनाया,| इस प्रकार जो लोग वैदिक धर्म को छोड़ गये थे उन्हें पुनह वैदिक धर्में वापस लाने का काम मेरा निरन्तर है |

राजसिंह जी ने उसे  गोद लिया खर्चा भे देते रहे, पहाड़ गंज आर्य समाज के मंत्री आजभी उसे  खर्च देरहे हैं, तुम रट्टूतोता गण यह तो बताव की तुमने कब किस को इस प्रकार का शुद्धि किया अपने समाज में किया हो ? मेरा सारा काम भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा से प्रमाण पत्र बनवा कर उन लोगों को दिया, हिन्दू जागरण मँच का काम स्वदेश पाल गुप्ता जी के साथ निरन्तर मेरे ही पौरोहित्य में सारा काम होता  है आज भी  |

बलके तुमलोगों ने किसी हिन्दू जो मुस्लमान बनगया उसे ही नहीं लौटा सके, तुम्ही लोगों का भेजा हुवा 6  को मै ही लौटाया | अपने जेब से किराया लगाकर मै इसकाम को किया, एक केस तो मेवात का था जो नागलोई में कर्मवीर जी के घर में बैठ कर किया  क्या इस कोई झुठला सकता  है  ?

अब मेरे साथ क्या क्या बिता है या हो रहा है, लिखित सबको पकडाया किसने मुझे पूछा की क्या और कैसा कुछ होना या करना चाहिए ?  अज एक सप्ताह से निरंतर मुझे  फोन पर परेशन  किया जा रहा है कई नो० मैं लिख कर भी बताया यह तो हलाला के औलाद हैं सामने आकर डिबेट नहीं कर सकते फोन पर ही परेशन  करना गाली देना इनका काम  है |

एक आदमी अपना सबकुछ छोड़कर वैदिक धर्म के लिए काम कर रहा है उन्हें क्या सुबिधा क्या असुबिधा है पूछें उसे दूर करें, न उल्टा और बकवास किये जा रहे हैं ? मेरे साथ जो घटना घटी इन तथा कथित आर्यों कहलाने वालों से दुसरे समाज के लोग सुनेंगे तो हंसी उड़ायेंगे इनकी |

जिस समाज से मै आया हूँ शायद उनलोगों से मुझे इतनी तकलीफ नहीं हुई जितना की इनलोगों से | मै अगर सब लिखने लगूं तो यह सुन नही सकते उन बातों को, मेरे कुछ मित्र हैं जिनके सहयोग से  मैं काम कर रहा हूँ | मै उनके सहारे साँस ले रहा हूँ  कुछ ने मुझे धोखे से कहीं से कहीं लेकर आये, और लोगों से चंदा इकठ्ठा कर साफ निकल गये |

अब कोई संपर्क ही नहीं रखा मै किसको कहने जाऊंगा ? यह कहावत है की सुनता मेरी कौन है किसे सुनाऊ मै, मै यही मांगने वाला काम आज तक नहीं हुवा मेरे से | तो इस प्रकार यह समाज की दशा है, |  मेरे साथ क्या मुसीबत है यह लोग पूछते भी तो नहीं यह सब समस्या मेरे सामने है |

मै तो घर और बाहर सबसे दुश्मनी मोली सिर्फ और सिर्फ वैदिक धर्म के खातिर, सत्य के लिए  फिरभी इन अकल के दुश्मनों को सुध ही नहीं है | कोई बात नहीं सत्य के लिए जी रहा हूँ तो सत्य के लिये ही मरूँगा |

महेन्द्र पाल आर्य 12 /1 / 21