सत्य को कोई हरा नहीं सकता |

सत्यका सामना कोई नहीं कर सकता  ||

सत्य का सामना कोई इसी लिए नहीं कर सकता – सत्यमेव जयते – गलत प्रमाणित हो गा ||

सत्यमेव जयते हमारा शास्त्र की मान्यता है इससे यह सत्य सिद्ध होगया की इसे कोई हरा नहीं सकता |       यही दुनिया के लोग भी जानते हैं | हमारे कोर्ट कचहरी और पुलिस थाने में भी यह लिखा रहता है, जहाँ सत्य पर वल देने की बातें है | इस विचार को जरुर पढ़े दया होगी |

 

अगर वहां सत्य कार्य न हो वह कार्य करने वालों की गलती है चाहे वह कहीं भी हो ? लेकिन सत्य को सत्य ही रहना है | सत्य को कोई झुठला नहीं सकता यह हमारी मान्यता है |  यही कारण बना की कुरान के मानने वाले और बाइबिल के मानने वाले सामने आने से मना कर रहे हैं |  सत्य की जीत होती रही है होती रहेगी |

|मजहर अहमद सामने आने से मना कर दिया |

भाई मजहर मियां सत्य और असत्य पर विचार करने के लिए यह विडिओ =विडिओ =खेल से समाधान होना संभव नहीं है एक ही मात्र रास्ता है सामने बैठ कर डिबेट से ही मसला हल हो सकता है | आप लोग सामने आना नहीं चाहते वह किसलिए मैं नहीं समझ पाया ?

 

पर बात यह तो जरुर है की सत्य के सामने असत्य आने में घबराता है यह तो पक्की बात है | त्रियम बकम का जो अर्थ मैंने बताया है उसका अर्थ आप ने अपने हिसाब से बदलना चाहा |

मैंने आप से पूछा की त्रियम शब्द बना कैसे उसमें कौन कौन से पद है =कौन से अक्षर हैं वह बताव अक्षर किसे कहते हैं बताव देकर दिखाव |

 

तुम्हें स्वर का ही ज्ञान नहीं है वेद पढने चलदिए ? स्वर किसे कहा गया स्वर नाम इस का किस लिए पड़ा बताना पहले |

तुम पहले अपनी कुरान से पिण्ड छूडाव वेद को देखेंगे बाद में तुम ने अल्लाह का अर्श का जो हवाला दिया है वह गलत है तुमने कहा अल्लाह अर्श पर है यह नहीं है उसमें ? कुर्सी का अर्थ तुमने मर्यादा बताया फरिश्तों को बताया |

 

भेजा घांस चरने गया लग रहा है, जब अर्श अल्लाह का है =फिर उसपर अल्लाह नहीं है इसका हवाला कहाँ है ? मैंने सूरा अलक को उठा कर दिया उसीका जवाब नहीं दे सके फिर पूछ रहा हूँ जिब्राइल ने गारेहिरा में आकर मुहम्मद को सुनाया 5 आयात |

 

यह आयत जिब्राइल को कहाँ से मिली अल्लाह ने पढ़ाकर बोलकर भेजा उसका हवाला दो ? मैंने तो साफ कहा है सामने डिबेट करो मुझे हरा दो मैं इस्लाम स्वीकार कर लूँगा | और अगर तुम हार जाते हो तो वैदिक धर्मी बनना यह बात स्टाम्प पेपर में लिखा पढ़ी कर के होगी चर्चा |

 

इस पर अपनी राय क्यों नहीं देना चाहते सत्य असत्य को जानने का तरीका यही तो हो सकता है आप बोम्बे रहते हैं =मैं कभी कोलकाता=कभी दिल्ली इस लिए स्थान दिल्ली रखा गया आप को किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं होगी सभी व्यबस्था मेरी तरफ से ही होना है |

आपको सिर्फ आना है मैंने आप को 28 जून का समय दिया था आप ने उत्तर ही नहीं दिया | विडिओ वाला खेल हमें नहीं चाहिए | इस से बात नहीं बनेगी आप ने बोला मैंने बोला = निर्णय कौन देगा किसकी सही है किसकी गलत यह कौन तैय करेगा ? यह व्यबस्था भी होगी

इस लिए सत्य असत्य दुनिया वालों के सामने रखने के लिए बैठ कर ही समझना और समझाना सही होगा | पर आप तो क्या आप के अल्लाह ने भी तो नहीं समझा पाया और कहदिया तुम्हारा दीन तुम्हारे पास = हमारा दीन हमारे पास | देखो अपनी कुरान >  लकुम दी नुकुम वालिया दीन | बोला अल्लाह ने – पहले तो कहा एक ही दीन है इस्लाम फिर अल्लाह पलट गये | आप सामने आने से मना इस लिए कर रहे हैं की यह पता चलगया आप को की महेन्द्र पाल आर्य के सामने खाता खोलना सम्भव नहीं है | 3 /1 /21