|| सृष्टि कर्ता ने केवल मानव को यह सौभाग्य दिया ||

 

सृष्टि कर्ता ने केवल मानव को यह सौभाग्य दिया ||
कुरान में अल्लाह ने कहा मानव कीट पतंग लता विरिक्ष जितने भी हैं वह सब अल्लाह की तस्बीह करते हैं | देखें कुरान सूरा 17 बनी इसराईल,आयात 42,43,44 को || इस आयात से पता लगा की अल्लाह ने दुनिया नहीं बनाई |
ईश्वर का गुणगान गा सके उसकी उपासना कर सके, मानव से इतर जितने भी प्राणी है वह सब भोग योनी में होने के कारण, वह कर्म नहीं कर सकता, अर्थात किसी भी पुन्य कार्य से वह वंचित हैं उन किसी भी जीव से कोई पुन्य कार्य नहीं हो सकता तो वह तस्बीह और अल्लाह को याद कैसे कर सकते ?
एक साथ कितने सवाल सामने आगये दुनिया के लोग कहते हैं अल्लाह ने दुनिया बनाई – परन्तु कुरान की इन भाष्य से और आयातों से भी इनके जितने भाष्य हैं उसमें दर्शाए या लिखी बातों पर जरा विचार करें तो सत्य और असत्य का पता लगना संभव है | जैसा इसी आयत में अल्लाह ने फरमाया सातों आसमान में और जमीन में जो कुछ भी हैं वह सबके सब अल्लाह की तस्बीह करते हैं, अर्थात अल्लाह की नाम जपते हैं | फिर इसके भाष्य में लिखा गया की हजरत मुहम्मद {स} मुकामे इब्राहिम और जमजम के दरम्यान से जिब्रील और मीकाईल, मस्जिदे अक्सा तक ले गये शबे मेराज में ले गये एक दाहिने और एक बाएँ तरफ से उन्हें उड़ाकर ले गये तो उन्हों ने बुलन्द आसमान में बहुत सी तस्बीह की आवाज़ सुनी |
> सब्बहतिस समावातुल युला मिन्दिल मुहायते मुशाफिकतिल्लाजील युलुईन बीमा यला सुबहानाल यली ईनल आयला सुबहांनाहू व तयाला <
मखलूक में से हरेक चीज उसकी पाकीजगी और तयरीफ़ बयान करती है – लिखा है की तुम उनकी भाषा को नहीं समजते |
सवाल यह है की बुलन्द आसमान में किसी तस्बीह की आवाज सुनी यह बातें क्यों कर सच हो सकती है ? दूसरी बात है की एक मानव को छोड़ किसी और प्राणी को यह सौभाग्य ही प्राप्त नहीं हुवा की वह अल्लाह की इबादत करे ? फिर यह बातें किस प्रकार से सच माना जाय ?
इधर मानव तो फ़रिश्ते को देख नहीं सकता तो हजरत मुहम्मद {स} जिब्रील और मिकाईल को देखा और पहचाना कैसे ? क्या कुरान की बातों पर सन्देह नहीं होना चाहिए ? इसी लिए मैंने मानव समाज के सामने रखा कुरान पर एक स्वस्थचिंतन हर एक मानव कहलाने वाले को करना चाहिए | इस्लाम के मानने वाले जवाब देकर दिखाएँ | महेन्द्रपाल आर्य =5 =1 =21