हमारा लक्ष्य वैदिक संस्कृति की जन जन तक पहुंचना |

|| हमारा लक्ष्य वैदिक संस्कृति को जन जन तक पहुंचाना ||

आज मै अपने साथ जुड़े सभी साथी और मित्र मण्डली को अपने पोस्ट के माध्यम से एक विशेष जानकारी देना चाहता हूँ की, आप सभी लोगों को पता है की मै विगत प्रायः 37 वर्षों से आर्य समाज का प्रचारक बनकर कार्य करता आया हूँ 1983 से 1994, तक मैंने सार्वदेशिक सभा का प्रचारक रह कर काम किया है | उसके बाद मै स्वतन्त्र प्रचारक के रूप में काम करता आया हूँ |

 

मेरा उपयोग विभिन्न हिन्दू संगठनों ने भरपुर किया है, और मै बिना भेद भाव के सभी को अपना समय देता आया हूँ | जिसमे उल्लेखनीय कार्य विहिप, और हिन्दू जागरण मंच, और भारतीय हिन्दू शुद्धी सभा के माध्यम से भारत भर के अनेक प्रान्तों में परावर्तन का कार्य किया, और इस काम को बड़े रूचि से करते हुए अपनी पहचान बनाया हूँ |

 

इसी प्रकार लेखनी के माध्यम से स्पष्ट लेखक, और अपने को स्पष्ट वक्ता के रुप मे अपनी पहचान बना पाया हूँ | आज मात्र अपने देश में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण जगत में हजारों नौजवानों को तैयार कर चुका हूँ, जो मेरे न रहने पर भी इस्लाम के जाने माने विद्वानों की जुबान बन्द करने में अपना  सामर्थ रखते है | वह अरब देशों से लेकर सम्पूर्ण जगत में छाए है, आज मुझे ख़ुशी है की उन नौजवानों पर मै अपना गौरव महसूस करता हूँ, अनेक उल्लेखनीय नाम हैजो अब तक बहुतों मौलाना और मुफ्तियों के बोलती बन्द करा चुके हैं |

 

आज मै अपने साथ जुड़े सभी से प्रार्थना कर रहा हूँ की, हमारा काम आर्य समाज जैसे संस्था से जुड़ कर सीमित न हो जाये, कारण आर्य समाज में जो मै देखा और पाया, यहाँ मात्र संपत्ति पर कौन कब्जा कर सकता है इसी को चरितार्थ कर करने में लगें है |  हमें वेद को जन-जन, तक पहुचाने के लिए काम करना है | वैदिक संस्कृति पर कुठाराघात करने वालों के खिलाफ काम करना है |

 

राष्ट्रीयता के लिए काम करना है, सत्यसनातन वैदिक धर्म को जन जन तक पहुँचाने के लिए काम करना है |  वेद और परमात्मा के नाम से जो गलत धारनाये मानव समाज में फैलाई जा रही हैं, ईसाई मुसलमान व बौधिष्टों द्वारा गलत प्रचार को रोकना,और मानव धर्म से हटा कर जो लोग किसी को मुस्लमान और ईसाई बना रहे है तथा बुद्धिष्ट बनारहे हैं, उनको मुह तोड़ जवाब देकर पुन: अपने घरसे गये लोगों को वैदिक धर्म में लाना ,है वैदिक धर्म की रक्षा करना है हमारा लक्ष्य है और सबका  यही लक्ष्य होना चाहिए न की हम अपने को आर्य समाज तक सीमित रखें |

 

आप सभी लोग मेरे विचारों से अगर सहमत है तो हमें इन तथाकथित लोगों से अलग होकर काम करने में मदद करें, जिससे की हमारा लक्ष्य पूरा हो सके | मै देखना चाहता हूँ की कितने लोग मेरे साथ जुड़े हैं, जो मात्र वैदिक संस्कृति की रक्षा के लिए काम करना चाहते हैं | आप सभी का       महेन्द्रपाल आर्य, वैदिक प्रवक्ता –दिल्ली = मोo 9810797056 | 14 /11 /20