हमारे देश के नेता ही देश के घातक हैं ||

हमारे देश के नेता ही देश के घातक हैं ||
अफ़गानिस्तान को बनाने के लिए भारत ने अब तक न मालूम कितने धन लगाये यह काम चालू किया था कांग्रेस ने |
मोदी जी के लिए यह रोकना संभव नहीं हुआ वही नितन्तर किया गया या किया जा रहा था | अब यह अफगानी मोदी के गले की हड्डी बन गये के इन्हें मानवता के नामपर अब इन्हें न रोका जाय और न भगाया जाय यह सारा किया कराया कांग्रेस का है |
भारत सरकार को चाहिए कांग्रेस की जहाँ जहाँ संपत्ति है सबको नीलाम करके देश हित में लगाया जाय | यही काम मोदी जी को दृढ़ता से करना होगा वरना देश वासियों के साथ धोखा होगा |
 
रही बात अफगानियों के बसने बसाने की उसके लिए एह ही रास्ता है अगर अफगानी इस बात को समझे | अफगानी ही क्या पूरी दुनिया ने देखा इस्लाम के शांति प्रियता को जहाँ कतले आम हो रहा है महिलाओं पर और बच्चों पर खुले मैदान के कतल किये जा रहे हों उसे शांति कह रहे हैं |
अगर इस्लामिक शांति इसी का नाम है तो दश्युता किसे कहेंगे लोग ? खुले मैदान में दोनों इस्लाम के मानने वाले लड़ रहे हैं पर यह ध्यान में रखना है की यह लड़ाई इन की आज से नहीं है यह लड़ाई की शुरुयत हुई इस्लाम के प्रवर्तक के जाने के बाद से, उन्हों ने अपने जीवन में गैर इसलामियों से लडे उनके बाद इस्लाम इस्लाम से ही लड़ना शुरू होगया जब की कुरान में इसे हराम बताया गया है |
 
अफगानी अगर चाहें तो सत्य सनातन वैदिक धर्म को अपना कर सुपर एकेश्वर वाद को अपने जीवन में उतार लें तो उन्हें इस्लाम की अशांति से छुटकारा और भारत के नागरिक बिना रोक टोक के बन सकते हैं |
 
एक मात्र रास्ता है अफगानियों के वैदिक धर्म को अपना लें जो मानव मात्र का धर्म है और इस्लाम से बेहतर एकेश्वर वाद है इसे अपना कर मानव होने का परिचय दें और इस खुनी इस्लाम के चंगुल से निकलें यही रास्ता मानव कल्याण का रास्ता है दूसरा और कोई रास्ता भी नहीं है अपने को मुसलमान कहना छोड़ मानव कहलाना सीखें | महेन्द्रपाल आर्य -26 /8/21