हम मानव कहलाने वाले किससे मांगे ?

मानव कहलाने वाले हम किस से मांगे ?
वैदिक संस्कृति में मानव मात्र का एक ही ईष्ट देव है, जिसका मुख्य नाम ओ३म है,जिसका अर्थ है सर्व रक्षक | और प्रजा के स्वामी जिन्हें कहा जाता है वेद में इसे इस प्रकार कहा गया और वेद के जानने वाले इस प्रकार कहते है और उन प्रजा के स्वामी से मांगते भी है |
ओ३म, प्रजापते न त्वदेतान्यन्यो विश्वा जातानि परि ता वभुव |
यत्कामास्ते जुहुमस्तन्नो sअस्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम् ||

अर्थ : हे सब प्रजा के स्वामी परमात्मा, आप से भिन्न दूसरा कोई उन इन सब उत्पन्न हुए जड चेतनादिकों को नहीं तिरस्कार करता है | अर्थात आप सर्वोपरी हैं, जिस -जिस पदार्थ की कामना वाले हम लोग आपका आश्रय लेवें और वांछा करें वह कामना हमारी सिद्ध होवें हमलोग धनैश्र्यों के स्वामी होवे |

मानव मात्र का एक ही इष्टदेव है वेद मन्त्र में जिनसे यह प्रार्थना की गई मानवों का जन्म और मृत्यू भी उसी के अधीन है | सृष्टि का रचने वाला वही है | स्थिति और प्रलय भी उन्ही के पास है और मानव मात्र का किये कर्मों का फल दाता भी वही है | वह अन्य सम्प्रोदाय के अल्लाह- गॉड, या यहोवा जैसा जिसे चाहे उसे दे और जिसे चाहे नहीं दे यह अन्याय जिन परमात्मा के पास नहीं है |

ऐसे परमात्मा को छोड़ किसी साईं के दरबार में कोई जाएँ मांगने के लिए इसका मतलब भी यही हुवा की उस परमात्मा पर उन्हें भरोसा नहीं है |
और किसी मरे व्यक्ति की मूर्ति से कुछ मांगने को जाने का मतलब अकल पर पर्दा पड़ा है | इस सदी में अगर लोग बुद्धि पर ताला डाले हों, की जिस सदी में लोग चद्रमा के सैर कर रहे हों | और भारत के प्रधान मन्त्री गर्भ से कहते भी हों की हमने कम खर्च में रॉकेट बनाये हैं |

अब वही प्रधान मन्त्री किसी साईं के मन्दिर को अपना सहारा मानने लगें तो देश का उद्धार हम लोग किससे उम्मीद करें ? जो पत्रकरों के सामने यह कहे की हमें जवाब का सवाल चाहिए ? क्या देश वासी उसी से उमीद करेंगे ? अथवा उनसे उम्मीद रखेंगे जो मूर्ति के सामने हाथ जोड़ कर खड़े हैं ?

हम भारत वासी आज जानना चाहते हैं अपने प्रधान मंत्री जी से की क्या साईं ने आप को प्रधान मन्त्री का वरदान दिया है, अथवा देश की जनता से आप को वरदान मिलना है ? धन्यवाद के साथ महेन्द्रपाल आर्य =राष्ट्रिय प्रवक्ता-राजार्य सभा = 20 /10 /18 = शाम 8 बजे |