8 फ़रिश्ते उठाएंगे, अल्लाह वजनदार है |

|| 8 फ़रिश्ते उठायेगे, अल्लाह वजनदार है ||

وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍ ثَمَانِيَةٌ [٦٩:١٧]

और तुम्हारे परवरदिगार के अर्श को उस दिन आठ फ़रिश्ते अपने सरों पर उठाए होंगे |

 

नोट :- क्या इससे यह सिद्ध नहीं होता की कुरानी अल्लाह एक शारीर धारी भारी भरकम अच्छा खासा वजनदार, शकल सूरत वाला इंसान का ही नाम अल्लाह है ?

اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ [٢٧:٢٦]

अल्लाह वह है जिससे सिवा कोई माबूद नहीं वही (इतने) बड़े अर्श का मालिक है (सजदा) |

 

नोट :- यहाँ भी अल्लाह को उसी अर्श {सिंहासन } का मलिम बताया गया जिस पर वह बैठते हैं और अपना डिक्टेटर शिप चलते हैं | जो कुरानी आयत में ही देख सकते हैं |

धर्म प्रेमी सज्जनों और मानव कह्लाने वालों, हमारा नाम मानव है,हम विचारशील है यह परमात्मी की बड़ी कृपा है हम मानव कहलाने वलों पर | जब परमात्मा ने हमें मानव बनाया तो परमात्मा को जानना हम मानव मात्र के लिए कर्तव्य बनजाता है की, कौन है परमात्मा हम उसे जानें | परमात्मा को बिना जाने उसे मानना कैसा सम्भव होगा ?

हम मानव कहलाने वाले जब भी कोई काम करते हैं तो पहले उस काम को सीखते हैं जानते हैं,तभी उस काम को करने लगते हैं | बिना जाने किसी भी काम को अंजाम देना संभव नहीं और उचित भी नहीं होगा, हो सकता है जिसे जाने बिना करने लगें तो गलत हो जाना बिलकुल स्वभाविक है | ठीक इसी प्रकार परमात्मा को जानना जरूरी है नहीं तो यही होगा,जो जिसको चाहां उसी को परमात्मा मान लिया | यहाँ परमात्मा मानने की बात नहीं है जानने की बात है | दुनिया में यही देखने को मिलता है, की परमात्मा को जानना कठिन देख कर उसे मानने से ही इनकार कर दिया | कुछ लोगों ने तो ईंट और पत्थर को भी परमात्मा मान लिया, नतीजा यह हुवा की ना परमात्मा को पा सके और ना परमात्मा का सानिध्य मिला |

शास्त्र कारों ने कहा =न तत्र चक्षुर्गच्छति न बाग्गच्छती नो मनः |

वहाँ आंख नहीं जा,पाती, न वाणी की वहां गती है | वह तो मन की पहुँच से भी बाहर है ||

अतः आत्मनात्मान मभिसंविवेश ||

अर्थात मैं अपनी आत्मा के द्वारा उस अन्तरात्मा में प्रवेश करता हूँ |

यहाँ परमात्मा के शारीर का बैठने का तख़्त का कोई प्रश्न ही नहीं है | दुनिया वालों ने अपनी मनमानी तरीके से जैसा चाहां वैसा कह दिया जब की यह सत्य नहीं है |

मानव होने हेतु परमात्मा का जानना जरूरी है ध्यान पूर्वक इसे जानने व समझकर ही परमात्मा को मानें =धन्यवाद =

महेन्द्र पाल आर्य =9 /6 /18 =