kuran klamullahh nahi hai yah pramann paryapt

|| कुरान क्लामुल्लाह न होने का प्रमाण यही पर्याप्त है ||
وَتَرَىٰ كَثِيرًا مِّنْهُمْ يُسَارِعُونَ فِي الْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَأَكْلِهِمُ السُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ [٥:٦٢]
(ऐ रसूल) तुम उनमें से बहुतेरों को देखोगे कि गुनाह और सरकशी और हरामख़ोरी की तरफ़ दौड़ पड़ते हैं जो काम ये लोग करते थे वह यक़ीनन बहुत बुरा है | sura 5 = 62
لَوْلَا يَنْهَاهُمُ الرَّبَّانِيُّونَ وَالْأَحْبَارُ عَن قَوْلِهِمُ الْإِثْمَ وَأَكْلِهِمُ السُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَصْنَعُونَ [٥:٦٣]
उनको अल्लाह वाले और उलेमा झूठ बोलने और हरामख़ोरी से क्यों नहीं रोकते जो (दरगुज़र) ये लोग करते हैं यक़ीनन बहुत ही बुरी है | sura 5 = 63

दुनिया के लोग इसे अल्लाह की कलाम मानते हैं, जरा ध्यान से इसे पढ़ें की यह क्लामुल्लाह होना संभव है क्या ? अल्लाह अपने रसूल को कह रहे हैं, तुम उनमें अनेकों को देखोगे जो गुनाहगार हैं, पापी हैं हराम खोरी की तरफ दौड़ ते हैं, जो काम यह लोग करते हैं वह सच में बुरा है |
विचार करें मानव धरती पर आता है अपने किये कर्मानुसार पाप पुन्य जो कुछ भी करेगा उसका फल उसे ही मिलेगा | अब कोई बुरा कर्म करने वाला होगा उसके बारे में अल्लाह किस लिए किसी को कहने जायेंगे की वह बुरा है पापी है ?

अल्लाह सृष्टि चलाने वाला हैं या मानव के चरित्र प्रमाण पत्र देने वाला है ? फिर कहा उनको अल्लाह वाले, और उलामा {विद्वान यालिम} उनको क्यों नहीं रोकते ? यह लोग जो करते हैं वह सही में बहुत बुरा है |
हम मानव कहलाने वाले धरती पर आये हैं अपने किये कर्मानुसार हमें सजा मिलना है हमारे किये कर्मों का | तो हम मानव का किया कर्म अल्लाह किसी को किसलिए बताने जा रहे हैं और अल्लाह जिसे चाहता है सही रास्ता दिखता है, जिसे चाहता भटका देता है, जब अल्लाह खुद किसी को सही रास्ते पर चला सकता है तो किसी और यालिमों विद्वानों से उन्हें सही रास्ते पे चलाने का उपदेश क्यों देते ? यह कहना कहाँ तक सत्य हो सकता है ?
दुनिया वालो आप लोग ही खुद विचार करें और निर्णय लें की यह अल्लाह का कहना सत्य है या असत्य ? महेन्द्र पाल आर्य = 7 /6 /19

|| कुरान क्लामुल्लाह न होने का प्रमाण यही पर्याप्त है ||
وَتَرَىٰ كَثِيرًا مِّنْهُمْ يُسَارِعُونَ فِي الْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَأَكْلِهِمُ السُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ [٥:٦٢]
(ऐ रसूल) तुम उनमें से बहुतेरों को देखोगे कि गुनाह और सरकशी और हरामख़ोरी की तरफ़ दौड़ पड़ते हैं जो काम ये लोग करते थे वह यक़ीनन बहुत बुरा है | sura 5 = 62
لَوْلَا يَنْهَاهُمُ الرَّبَّانِيُّونَ وَالْأَحْبَارُ عَن قَوْلِهِمُ الْإِثْمَ وَأَكْلِهِمُ السُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا يَصْنَعُونَ [٥:٦٣]
उनको अल्लाह वाले और उलेमा झूठ बोलने और हरामख़ोरी से क्यों नहीं रोकते जो (दरगुज़र) ये लोग करते हैं यक़ीनन बहुत ही बुरी है | sura 5 = 63

दुनिया के लोग इसे अल्लाह की कलाम मानते हैं, जरा ध्यान से इसे पढ़ें की यह क्लामुल्लाह होना संभव है क्या ? अल्लाह अपने रसूल को कह रहे हैं, तुम उनमें अनेकों को देखोगे जो गुनाहगार हैं, पापी हैं हराम खोरी की तरफ दौड़ ते हैं, जो काम यह लोग करते हैं वह सच में बुरा है |
विचार करें मानव धरती पर आता है अपने किये कर्मानुसार पाप पुन्य जो कुछ भी करेगा उसका फल उसे ही मिलेगा | अब कोई बुरा कर्म करने वाला होगा उसके बारे में अल्लाह किस लिए किसी को कहने जायेंगे की वह बुरा है पापी है ?

अल्लाह सृष्टि चलाने वाला हैं या मानव के चरित्र प्रमाण पत्र देने वाला है ? फिर कहा उनको अल्लाह वाले, और उलामा {विद्वान यालिम} उनको क्यों नहीं रोकते ? यह लोग जो करते हैं वह सही में बहुत बुरा है |
हम मानव कहलाने वाले धरती पर आये हैं अपने किये कर्मानुसार हमें सजा मिलना है हमारे किये कर्मों का | तो हम मानव का किया कर्म अल्लाह किसी को किसलिए बताने जा रहे हैं और अल्लाह जिसे चाहता है सही रास्ता दिखता है, जिसे चाहता भटका देता है, जब अल्लाह खुद किसी को सही रास्ते पर चला सकता है तो किसी और यालिमों विद्वानों से उन्हें सही रास्ते पे चलाने का उपदेश क्यों देते ? यह कहना कहाँ तक सत्य हो सकता है ?
दुनिया वालो आप लोग ही खुद विचार करें और निर्णय लें की यह अल्लाह का कहना सत्य है या असत्य ? महेन्द्र पाल आर्य = 7 /6 /19