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आर्य समाज के संस्थापक ऋषि दयानन्द ने अपने कालजयी ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के अन्तमें स्वमंताव्यामंताव्य्प्रकाश: में क्या लिखा है आर्य कहलाने वालो कभी पढ़ कर देखा भी ? ऋषि लिखते

इस देश का नाम आर्यवर्त था है, और रहेगा, जिसका प्रमाण हमारे ऋषि और मुनियों ने अनेक बार अनेक प्रकार से दिया है | ऋषि दयानन्द जी ने भी अपने

आज विशेष कर भारत वर्ष में,कई वर्षोंसे, कुछ आतंकवादी संगठनों द्वारा यत्र तत्र,हमला हो रहा उसका मुख्य कारण ही धर्म है | इसबात को कोई मानें या न मानें इसे

ऋषि दयानंद जी ने अपने अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के अंत में, स्वमत्वव्यामन्तव्यप्रकाश प्रकरण में धर्म और अधर्म को समझाते हुए लिखते है : “धर्माधर्म” जो पक्षपातरहित, न्यायाचरण, सत्यभाषादियुक्त ईश्वराज्ञा,

सृष्टि के प्रथम से ही अनेकों महापुरुषों का आगमन हुवा अनेकों ऋषि महर्षि, और ऋषिकायें इसी धरती पर आयें, अनेकों मुनियों का भी आगमन हुवा,फिर महा पुरुष भी आयें,सबने मानवता

हम भारत वासियों ने सत्य को स्वीकार ही कहाँ किया ? हमें जो पाठगलत पढाया गया आज तक उसी को हम रटे जारहे हैं, उसे सुधार ने का प्रयास कभी


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कुरान का इंशाल्लाह शब्द सही नहीं, फिर भारत को इस्लामिस्तान क्यों नहीं बना पाए ?

कहना किसका सत्य है अल्लाह का या फिर मुसलमानों का ?

व्यक्ति पूजा का नाम इस्लाम है, उन्ही के आलिमों से सुनिए, और मेरा जवाब भी |

अल्लाह का कहना क्या है दुनिया वाले भी सुनें ||

तर्क के कसौटी पर अल्लाह,और अल्लाह वाले नहीं आ सकते |

तर्क के सामने अल्लाह भी निरुत्तर

अल्लाह ने कहा कुरान का नक़ल नही बना सकते =इसी कुरान का नकल सुनिये |

मौलाना अब्दुर रज्जाक से फोन पर वार्ता ,इनलोगों के पास जवाब ही नहीं है |

मौलाना अब्दुर रज्जाक से वार्ता फोनपर

कुरान कला मुल्ला नहीं है प्रमाण तफसीरे इबने कसीर से |

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